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वसंत पंचमी 2021: मां सरस्वती के हर प्रतीक का अपना महत्व, समाज को देता है संदेश
Tue, 16 Feb 2021 01:24 PM IST
मुकेश कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: मुकेश कुमार
Updated Tue, 16 Feb 2021 01:24 PM IST
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मां सरस्वती
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वसंत पंचमी विद्या और ज्ञान की देवी मां सरस्वती के प्राकट्य दिवस के रूप में मनाया जाता है। शास्त्रों के अनुसार सृष्टि की रचना के समय भगवान ब्रह्मा ने अपने कमंडल से जल छिड़का, जिससे हंस पर सवार होकर कमल पर विराजमान, हाथों में वीणा, पुस्तक और माला लिए सरस्वती मां प्रकट हुई। मां सरस्वती स्वयं में ज्ञान और जीवन का प्रतीक हैं। उनके साथ जुड़े हुए हर प्रतीक का अपना महत्व है।
पुस्तक : पुस्तक ज्ञान का प्रतीक है। आरबीएस कॉलेज के मनोविज्ञान विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. पूनम तिवारी का कहना है कि जीवन ज्ञान का स्वरूप है। पुस्तक के माध्यम से ज्ञान अर्जन करके अवसाद, चिंता, उन्माद आदि से बचने का रास्ता प्राप्त होता है। पुस्तकों को जीवन में अपनाकर नकारात्मक मनोवृत्तियों से बचा जा सकता है।
वीणा : मां सरस्वती वीणा के माध्यम से जीवन में रस होने का संदेश देती हैं। केंद्रीय हिंदी संस्थान के नवीकरण एवं भाषा प्रसार विभाग के अध्यक्ष प्रो. उमापति दीक्षित का कहना है कि कोरे ज्ञान वालों का जीवन शुष्क हो जाता है। कारण, वह रस को बिल्कुल भूल जाते हैं। मां सरस्वती हमें हमें वीणा और किताब दोनों को साथ लेकर चलने के लिए प्रेरित करती हैं।
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पुस्तक : पुस्तक ज्ञान का प्रतीक है। आरबीएस कॉलेज के मनोविज्ञान विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. पूनम तिवारी का कहना है कि जीवन ज्ञान का स्वरूप है। पुस्तक के माध्यम से ज्ञान अर्जन करके अवसाद, चिंता, उन्माद आदि से बचने का रास्ता प्राप्त होता है। पुस्तकों को जीवन में अपनाकर नकारात्मक मनोवृत्तियों से बचा जा सकता है।
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वीणा : मां सरस्वती वीणा के माध्यम से जीवन में रस होने का संदेश देती हैं। केंद्रीय हिंदी संस्थान के नवीकरण एवं भाषा प्रसार विभाग के अध्यक्ष प्रो. उमापति दीक्षित का कहना है कि कोरे ज्ञान वालों का जीवन शुष्क हो जाता है। कारण, वह रस को बिल्कुल भूल जाते हैं। मां सरस्वती हमें हमें वीणा और किताब दोनों को साथ लेकर चलने के लिए प्रेरित करती हैं।
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माला: सरस्वती जी स्फटिक की माला पहनती हैं। यह माला वैराग्य और ध्यान का प्रतीक है। आगरा कॉलेज के हिंदी के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. चंद्रशेखर शर्मा का कहना है कि वैराग्य और ध्यान के माध्यम से ही कोई व्यक्ति संपूर्णता को प्राप्त कर सकता है। पूर्ण तत्व की ओर जाने का रास्ता यहीं से प्राप्त होता है।
हंस : हंस, नीर, क्षीर और विवेक के नाते जाना जाता है। कहा जाता है कि हंस दूध में मिले पानी को अलग कर देता है और दूध पी लेता है। साहित्यकार सुशील सरित का कहना है कि हंस इस बात का संदेश देता है कि आप के सामने बहुत कुछ उपलब्ध है, उसमें से जो कल्याणकारी है, उसे ही अपनाएं। जो व्यर्थ है उन्हें छोड़ दें।
कमल : कमल हमें विपरीत परिस्थितियों में भी सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता है। डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के डीन रिसर्च प्रो. अजय तनेजा का कहना है कि कमल कीचड़ में खिलता है। इसके बाद भी सुंदरता और कोमलता का सभी को कायल बना लेता है। हमें इससे सीख लेनी चाहिए।
हंस : हंस, नीर, क्षीर और विवेक के नाते जाना जाता है। कहा जाता है कि हंस दूध में मिले पानी को अलग कर देता है और दूध पी लेता है। साहित्यकार सुशील सरित का कहना है कि हंस इस बात का संदेश देता है कि आप के सामने बहुत कुछ उपलब्ध है, उसमें से जो कल्याणकारी है, उसे ही अपनाएं। जो व्यर्थ है उन्हें छोड़ दें।
कमल : कमल हमें विपरीत परिस्थितियों में भी सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता है। डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के डीन रिसर्च प्रो. अजय तनेजा का कहना है कि कमल कीचड़ में खिलता है। इसके बाद भी सुंदरता और कोमलता का सभी को कायल बना लेता है। हमें इससे सीख लेनी चाहिए।