{"_id":"5bd06fbebdec2269774f02c1","slug":"lord-shri-krishna-maharas-in-chandra-sarowar-on-sharad-purnima","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"शरद पूर्णिमा पर श्रीकृष्ण ने यहां किया था महारास, धवल चांदनी में झिलमिलाए 21 हजार दीप","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
शरद पूर्णिमा पर श्रीकृष्ण ने यहां किया था महारास, धवल चांदनी में झिलमिलाए 21 हजार दीप
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गोवर्धन (मथुरा)
Updated Wed, 24 Oct 2018 06:42 PM IST
विज्ञापन
प्रतीकात्मक तस्वीर
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
यूं तो पूरा ब्रज धार्मिक महत्व को समेटे हुए है लेकिन साहित्य-संगीत और ब्रज संस्कृति का अनूठा संगम है पारसौली का चन्द्र सरोवर। यह वही स्थान है जहां शरद पूर्णिमा की धवल चांदनी में भगवान श्रीकृष्ण ने सोलह हजार एक सौ आठ गोपियों के साथ महारास किया था।
पौराणिक मान्यता में आज भी महारास चबूतरा है जिसका पुनरोद्धार किया गया है। पाराशर ऋषि का तपस्या स्थल होने के कारण इसे पारासौली नाम दिया गया। शरद पूर्णिमा पर आज एक बार फिर 21 हजार दीपों की रोशनियां इस सरोवर की छटा को अद्भुत रूप देती नजर आएंगी।
चन्द्र सरोवर तट स्थित बल्लभाचार्य जी की बैठक पर भारी संख्या में पुष्टी मार्गीय भक्त अपने आराध्य ठाकुर जी को लेकर पहुंच गए हैं। जहां महाप्रभु जी की बैठक के समीप खीर का भोग लगाया गया। महारास चबूतरे पर शाम 6 बजे पद गायन एवं गोपी गीत कन्हैया बाबा के सानिध्य में शुरू हुआ।
विज्ञापन
विज्ञापन
पौराणिक मान्यता में आज भी महारास चबूतरा है जिसका पुनरोद्धार किया गया है। पाराशर ऋषि का तपस्या स्थल होने के कारण इसे पारासौली नाम दिया गया। शरद पूर्णिमा पर आज एक बार फिर 21 हजार दीपों की रोशनियां इस सरोवर की छटा को अद्भुत रूप देती नजर आएंगी।
विज्ञापन
चन्द्र सरोवर तट स्थित बल्लभाचार्य जी की बैठक पर भारी संख्या में पुष्टी मार्गीय भक्त अपने आराध्य ठाकुर जी को लेकर पहुंच गए हैं। जहां महाप्रभु जी की बैठक के समीप खीर का भोग लगाया गया। महारास चबूतरे पर शाम 6 बजे पद गायन एवं गोपी गीत कन्हैया बाबा के सानिध्य में शुरू हुआ।
विज्ञापन
धवल चांदनी में जलेंगे 21 हजार दीप
इसके बाद दीपदान महोत्सव में चन्द्र सरोवर पर 21 हजार दीपों का दान किया गया। पारासौली निवासी रासबिहारी आचार्य की मानें तो श्रीकृष्ण ने अपने मन को महारास के समय चन्द्रमा के रूप में स्थापित किया था। वर्तमान में चन्द्र सरोवर जल के रूप में विराजमान हैं।
महाप्रभु जी बैठक के मुखिया बालकृष्ण कौशिक ने बताया कि गुजरात, महाराष्ट्र आदि राज्यों से भक्त अपने ठाकुर जी को लेकर आ गए हैं। जिन्हें चबूतरे पर धवल चांदनी में विराजमान किया जाएगा। इस मौके पर सैकड़ों भक्त मौजूद रहेंगे।
महाप्रभु जी बैठक के मुखिया बालकृष्ण कौशिक ने बताया कि गुजरात, महाराष्ट्र आदि राज्यों से भक्त अपने ठाकुर जी को लेकर आ गए हैं। जिन्हें चबूतरे पर धवल चांदनी में विराजमान किया जाएगा। इस मौके पर सैकड़ों भक्त मौजूद रहेंगे।