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मथुराः ठप है टोंटी, चांदी और साड़ी का कारोबार, कच्चे माल का अभाव
Mon, 18 May 2020 02:53 PM IST
Abhishek Saxena
नागेश शर्मा, अमर उजाला, मथुरा
नागेश शर्मा, अमर उजाला, मथुरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Mon, 18 May 2020 02:53 PM IST
सार
प्रशासन ने 358 उद्योगों को दी अनुमति, लेकिन सभी चालू नहीं
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साड़ी उद्योग का फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
लॉकडाउन के बाद से जनपद की कुल 1351 औद्योगिक इकाइयां बंद पड़ीं हैं। अब सरकार इन्हें पुन: चालू करने पर जोर दे रही है और इनके संचालन की अनुमति धड़ाधड़ दी जा रही है। जिले में अब तक 358 औद्योगिक इकाइयों को चालू करने की अनुमति दी जा रही है। लेकिन अधिकांश मजदूर अपने घर चले गए और कच्चे माल का अभाव भी है। ऐसे में आवश्यक वस्तुओं का उत्पादन करने वाली इकाइयों को छोड़कर अधिकांश शुरू नहीं हो पा रही हैं।
संकट... श्रमिक पूरे नहीं तो कैसे चलें जूते के कारखाने, देश और विदेश से नहीं मिल रहे ऑर्डर
उद्यमी हेमंत अग्रवाल बताते हैं कि अभी मजदूर घर गए हैं, उनका वापस आना संभव नहीं है। कच्चा माल भी नहीं है। सामान की डिमांड भी नहीं है। आवश्यक वस्तुओं से जुड़ी इकाइयों में ही काम हो रहा है। मथुरा का टोंटी, चांदी, साड़ी कारोबार पूरी तरह से शांत पड़ा है। यानि इनके जल्द शुरू होने की सूरत नहीं बन पा रही है।
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संकट... श्रमिक पूरे नहीं तो कैसे चलें जूते के कारखाने, देश और विदेश से नहीं मिल रहे ऑर्डर
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उद्यमी हेमंत अग्रवाल बताते हैं कि अभी मजदूर घर गए हैं, उनका वापस आना संभव नहीं है। कच्चा माल भी नहीं है। सामान की डिमांड भी नहीं है। आवश्यक वस्तुओं से जुड़ी इकाइयों में ही काम हो रहा है। मथुरा का टोंटी, चांदी, साड़ी कारोबार पूरी तरह से शांत पड़ा है। यानि इनके जल्द शुरू होने की सूरत नहीं बन पा रही है।
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उद्यमी हेमंत अग्रवाल बताते हैं कि अभी मजदूर घर गए हैं, उनका वापस आना संभव नहीं है। कच्चा माल भी नहीं है। सामान की डिमांड भी नहीं है। आवश्यक वस्तुओं से जुड़ी इकाइयों में ही काम हो रहा है। मथुरा का टोंटी, चांदी, साड़ी कारोबार पूरी तरह से शांत पड़ा है।
सरकारी विभागों द्वारा अनुमति में कोई बाधा नहीं आ रही है, लेकिन वर्तमान हालत में किसी भी उद्योग को चलाना संभव नहीं है। इस समय सिर्फ लॉक डाउन से अधूरे रह गए उत्पादन को किसी तरह सीमित संसाधनों में पूरा करने की कोशिश हो रही है। कम क्षमता के लिए मजदूरों की व्यवस्था हो जाएगी, लेकिन साड़ी उद्योग के लिए गुजरात से कच्चा माल आता है, वह उपलब्ध नहीं है। - राजेश बजाज, अध्यक्ष नेशनल चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री
प्रिंटिंग कारोबार ने अनुमति प्राप्त की है, लेकिन जो पुराना कागज उपलब्ध है उसी से पुराने ऑडर पूरा करने की कोशिश कुछ मजदूरों से शुरू की जा रही है। जब तक बाजार नहीं खुलेंगे, सामान का आवागमन नहीं होगा तब तक फैक्टरी शुरू करना असंभव है। अधिकांश उद्यमी इनकंप्लटी काम को पूरा करने की कोशिश में हैं। इकाइयों के शुरू होने में अभी वक्त लगेगा। - मुकेश अग्रवाल, पूर्व अध्यक्ष नेशनल चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री
सरकारी विभागों द्वारा अनुमति में कोई बाधा नहीं आ रही है, लेकिन वर्तमान हालत में किसी भी उद्योग को चलाना संभव नहीं है। इस समय सिर्फ लॉक डाउन से अधूरे रह गए उत्पादन को किसी तरह सीमित संसाधनों में पूरा करने की कोशिश हो रही है। कम क्षमता के लिए मजदूरों की व्यवस्था हो जाएगी, लेकिन साड़ी उद्योग के लिए गुजरात से कच्चा माल आता है, वह उपलब्ध नहीं है। - राजेश बजाज, अध्यक्ष नेशनल चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री
प्रिंटिंग कारोबार ने अनुमति प्राप्त की है, लेकिन जो पुराना कागज उपलब्ध है उसी से पुराने ऑडर पूरा करने की कोशिश कुछ मजदूरों से शुरू की जा रही है। जब तक बाजार नहीं खुलेंगे, सामान का आवागमन नहीं होगा तब तक फैक्टरी शुरू करना असंभव है। अधिकांश उद्यमी इनकंप्लटी काम को पूरा करने की कोशिश में हैं। इकाइयों के शुरू होने में अभी वक्त लगेगा। - मुकेश अग्रवाल, पूर्व अध्यक्ष नेशनल चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री
जनपद में छोटी-बड़ी कुल 1351 उद्योगिक इकाइयां पंजीकृत हैं। इसमें से अब तक 358 को 5848 मजदूरों के साथ काम करने की अनुमति दी गई है। अधिकांश इकाइयां शुरू हो रही हैं। इसमें प्रिंटिंग, साड़ी, टोंटी, बिटुमिन, ऑटोमोबाइल वर्कशॉप आदि हैं। जल्द ही और भी इकाइयों को शुरू कराया जाएगा। - रामेंद्र कुमार, उपायुक्त उद्योग जिला उद्योग केंद्र, मथुरा
उद्योगों के समक्ष आ रही ये दिक्कतें
-लॉकडाउन के दौरान घर लौटे मजदूर अभी आने को तैयार नहीं
-स्थानीय स्तर पर मजदूरों के आवागम को कोई अनुमति नहीं
-बड़े शहरों से आना वाला कच्चा माल उपलब्ध नहीं हो पा रहा है
-बाजार बंदी के कारण पूर्व से तैयार सामान की नहीं हो पा रही खपत
उद्योगों के समक्ष आ रही ये दिक्कतें
-लॉकडाउन के दौरान घर लौटे मजदूर अभी आने को तैयार नहीं
-स्थानीय स्तर पर मजदूरों के आवागम को कोई अनुमति नहीं
-बड़े शहरों से आना वाला कच्चा माल उपलब्ध नहीं हो पा रहा है
-बाजार बंदी के कारण पूर्व से तैयार सामान की नहीं हो पा रही खपत