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रात में सैकड़ोें मील दूरी पैदल ही तय कर रहे मजदूर
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कोसीकलां (मथुरा)। कोरोना वायरस के संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए लागू लॉकडाउन में मजदूरों का पलायन थम गया था, लेकिन अब फिर से शुरू हो गया है। हालांकि राज्य सरकार मजदूरों को उनके घर पहुंचाने का दावा कर रही है, लेकिन उन्हें रात में भी सिर पर गठरी रखे और अपनी मंजिल पहुंचने की जल्दी में पैदल ही घर को कूच करने में जुटे हैं।
बुधवार की रात्रि में करीब 11 बजे राष्ट्रीय राजमार्ग 19 पर कहीं पैदल तो कहीं साइकिलों पर मजदूर अपनी जन्मभूमि की ओर जाते देखे गए। मजदूरों ने बताया कि अब पता नहीं कब तक लॉकडाउन चलेगा। उनके पास जितना पैसा था, खर्च कर लिया। अब उनके पास न रसद सामग्री है और ना ही खर्च करने के लिए पैसे। उनको काम भी नहीं मिल रहा है। वाहन भी नहीं चल रहे हैं।
ऐसे में भला घर जाने में ही है। जब इस संवाददाता ने देखा कि राजमार्ग पर बठैन गेट पुल के समीप से करीब एक दर्जन अधिक लोग सिर पर गठरी लेकर मथुरा की ओर बढ रहे है, तो उन्हे रोका। पहले तो वे ठिठक गए, लेकिन अनाजमंडी परिसर में टीन शेड देखा तो वही आराम करने रुक गए।
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गुरुग्राम में एक स्पोर्ट फैक्ट्री में काम करने वाले सुरेन्द्र का कहना था कि फैक्ट्री बंद हो गई, सभी मजदूर घर चले गए, वे रुक गए कि लॉकडाउन खत्म हो जाएगा। लॉकडाउन समाप्त होने की उम्मीद नही थी कि अपने 10-12 साथियों के साथ पैदल ही घर को निकल पड़े। अगर कोई वाहन गुजरता है तो वे हाथ देते है, लेकिन रुकता ही नही।
गोद में बच्चे को लेकर जा रही माया का कहना था कि रास्ते में बिस्किट व नमकीन जो कुछ मिलता है, उसे खाकर ही आगे बढ़ जाते हैं। क्योंकि सभी होटल ढाबे भी बंद होने के कारण उन्हें भोजन भी नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में भूखे प्यासे ही दिन रात बिना रुके बिना थके अपने घरों की ओर बढ़ते चले जा रहे हैं। खाद्य सामग्री खत्म हो गई तथा उनके पास रुपया पैसा भी नहीं बचा।
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बुधवार की रात्रि में करीब 11 बजे राष्ट्रीय राजमार्ग 19 पर कहीं पैदल तो कहीं साइकिलों पर मजदूर अपनी जन्मभूमि की ओर जाते देखे गए। मजदूरों ने बताया कि अब पता नहीं कब तक लॉकडाउन चलेगा। उनके पास जितना पैसा था, खर्च कर लिया। अब उनके पास न रसद सामग्री है और ना ही खर्च करने के लिए पैसे। उनको काम भी नहीं मिल रहा है। वाहन भी नहीं चल रहे हैं।
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ऐसे में भला घर जाने में ही है। जब इस संवाददाता ने देखा कि राजमार्ग पर बठैन गेट पुल के समीप से करीब एक दर्जन अधिक लोग सिर पर गठरी लेकर मथुरा की ओर बढ रहे है, तो उन्हे रोका। पहले तो वे ठिठक गए, लेकिन अनाजमंडी परिसर में टीन शेड देखा तो वही आराम करने रुक गए।
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गुरुग्राम में एक स्पोर्ट फैक्ट्री में काम करने वाले सुरेन्द्र का कहना था कि फैक्ट्री बंद हो गई, सभी मजदूर घर चले गए, वे रुक गए कि लॉकडाउन खत्म हो जाएगा। लॉकडाउन समाप्त होने की उम्मीद नही थी कि अपने 10-12 साथियों के साथ पैदल ही घर को निकल पड़े। अगर कोई वाहन गुजरता है तो वे हाथ देते है, लेकिन रुकता ही नही।
गोद में बच्चे को लेकर जा रही माया का कहना था कि रास्ते में बिस्किट व नमकीन जो कुछ मिलता है, उसे खाकर ही आगे बढ़ जाते हैं। क्योंकि सभी होटल ढाबे भी बंद होने के कारण उन्हें भोजन भी नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में भूखे प्यासे ही दिन रात बिना रुके बिना थके अपने घरों की ओर बढ़ते चले जा रहे हैं। खाद्य सामग्री खत्म हो गई तथा उनके पास रुपया पैसा भी नहीं बचा।