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मैनपुरी: मुकदमे के बीच में वकील बदलना होगा मुश्किल, हाईकोर्ट के आदेश से अधिवक्ताओं में खुशी
Fri, 30 Jul 2021 12:10 AM IST
मुकेश कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मैनपुरी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मैनपुरी
Published by: मुकेश कुमार
Updated Fri, 30 Jul 2021 12:10 AM IST
सार
हाईकोर्ट ने कहा है कि अदालत में लंबित किसी भी मुकदमे में तब तक नए वकील का वकालतनामा मान्य नहीं होगाऽ जब तक पुराने वकील से एनओसी लेकर वादकारी अदालत में जमा नहीं कर देगा।
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अदालत (सांकेतिक तस्वीर)
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विस्तार
मुकदमे के बीच में वादकारी आसानी से वकील नहीं बदल सकेंगे। नए वकील का वकालतनामा लगवाने से पहले पुराने वकील से वादकारी को एनओसी (अनापत्ति प्रमाणपत्र) लेना होगा। एनओसी जमा होने के बाद ही अदालत में नए वकील का वकालतनामा मान्य होगा। हाईकोर्ट ने इस संबंध में एक याचिका पर आदेश जारी किया है।
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मुकदमा दायर करने के बाद आमतौर पर वादकारी अपने लाभ के लिए वकील बदलते हैं। पुराने वकील की ओर से तय की गई फीस पूरी अदा न करके नए वकील का मुकदमे में वकालतनामा लगवाते हैं। इससे पुराने वकील को नुकसान होता है।
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एक याचिका पर सुनवाई करने के बाद हाईकोर्ट ने कहा है कि अदालत में लंबित किसी भी मुकदमे में तब तक नए वकील का वकालतनामा मान्य नहीं होगा जब तक पुराने वकील से एनओसी लेकर वादाकारी अदालत में जमा नहीं कर देगा।
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वकीलों ने जताई खुशी
हाईकोर्ट के आदेश से मैनपुरी के वकील खुश हैं। वकीलों का कहना है हाईकोर्ट के आदेश के बाद वादकारियों पर भी शिकंजा कस जाएगा। वादकारी अपने लाभ के लिए किसी भी मौके पर वकील नहीं बदल सकेंगे। पुराने वकील की एनओसी अब महत्वपूर्ण होगी।
मैनपुरी बार एसोसिएशन के अध्यक्ष सौरभ यादव ने कहा कि वादकारी अपने लाभ के लिए मुकदमे के बीच में वकील बदल लेते हैं। इससे मुकदमे के पुराने वकील का नुकसान होता है। एनओसी जमा कराए जाने से वकील का आर्थिक नुकसान नहीं होगा।
एडवोकेट अनिल कुमार शर्मा ने कहा कि मोटर दुर्घटना के मामलों में इस तरह की शिकायतें ज्यादा मिलती हैं। हाईकोर्ट के आदेश का वकीलों को लाभ मिलेगा। वादकारी अब पुराने वकील से बिना एनओसी लिए नया वकील नहीं कर सकेंगे।
हाईकोर्ट के आदेश से मैनपुरी के वकील खुश हैं। वकीलों का कहना है हाईकोर्ट के आदेश के बाद वादकारियों पर भी शिकंजा कस जाएगा। वादकारी अपने लाभ के लिए किसी भी मौके पर वकील नहीं बदल सकेंगे। पुराने वकील की एनओसी अब महत्वपूर्ण होगी।
मैनपुरी बार एसोसिएशन के अध्यक्ष सौरभ यादव ने कहा कि वादकारी अपने लाभ के लिए मुकदमे के बीच में वकील बदल लेते हैं। इससे मुकदमे के पुराने वकील का नुकसान होता है। एनओसी जमा कराए जाने से वकील का आर्थिक नुकसान नहीं होगा।
एडवोकेट अनिल कुमार शर्मा ने कहा कि मोटर दुर्घटना के मामलों में इस तरह की शिकायतें ज्यादा मिलती हैं। हाईकोर्ट के आदेश का वकीलों को लाभ मिलेगा। वादकारी अब पुराने वकील से बिना एनओसी लिए नया वकील नहीं कर सकेंगे।