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न्याय दिलाने वालों को 15 साल बाद भी नहीं मिला न्याय
न्याय दिलाने वालों को 15 साल बाद भी नहीं मिला न्याय
Updated Sun, 25 Sep 2016 01:18 AM IST
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आगरा। दीवानी में 15 साल पहले 26 सितंबर को अधिवक्ताओं और न्यायिक अधिकारियों पर हुई लाठीचार्ज की घटना में अब तक दोषी पुलिस अधिकारियों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। इस दिन को अधिवक्ता काला दिवस के रूप में मनाएंगे। कार्य से विरत रहकर विरोध करेंगे।
बता दें, 26 सितंबर 2001 को दीवान में पुलिस और पीएसी ने अधिवक्ताओं पर लाठीचार्ज किया था। उनके चेंबरों को तोड़ दिया था। घटना में 500 अधिवक्ताओं को चोट लगी थी। इनमें 136 अधिवक्ता गंभीर घायल हो गए थे। पुलिस ने तत्कालीन जिला जज सहित कई न्यायिक अधिकारियों को भी नहीं बख्शा था। उन पर भी लाठीचार्ज किया था। अधिवक्ता बताते हैं कि हाईकोर्ट बेंच बनाने की मांग के लिए संघर्षरत अधिवक्ताओं ने लाठीचार्ज की घटना से दो दिन पहले फरह, मथुरा में आयोजित तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की सभा मेें पहुंचकर वी वांट हाईकोर्ट के नारे लगाए थे। उस समय केंद्र और प्रदेश में भाजपा की सरकार थी। प्रदेश में मुख्यमंत्री राजनाथ सिंह थे।
घटना की न्यायिक जांच के लिए जस्टिस गिरधर मालवीय जांच आयोग गठित हुआ, जिसने अपनी जांच रिपोर्ट में जिले के तत्कालीन आला पुलिस अधिकारियों को दोषी पाते हुए रिपोर्ट प्रदेश सरकार को सौंपते हुए कार्रवाई की संस्तुति की थी। मगर, 15 साल के बाद भी इसमें न्याय नहीं मिल सका है।
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आगरा एडवोकेट्स एसोसिएशन अध्यक्ष सरेंद्र लाखन, जनपद बार अध्यक्ष गजेंद्र शर्मा बाबा, हाईकोर्ट खंडपीठ स्थापना मंच के संयोजक अजय सिंह, खंडपीठ संघर्ष समिति के मनीष सिंह, शरद कुमार लवानिया, नरेंद्र शर्मा, वीरेंद्र फौजदार, बीएस फौजदार, गगन शर्मा, कु. वीर बहादुर सिंह आदि ने कहा कि 26 सितंबर को अधिवक्ता काला दिवस के रूप में मनाएंगे। कार्य से भी विरत रहेंगे। प्रदेश सरकार से घटना के दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
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बता दें, 26 सितंबर 2001 को दीवान में पुलिस और पीएसी ने अधिवक्ताओं पर लाठीचार्ज किया था। उनके चेंबरों को तोड़ दिया था। घटना में 500 अधिवक्ताओं को चोट लगी थी। इनमें 136 अधिवक्ता गंभीर घायल हो गए थे। पुलिस ने तत्कालीन जिला जज सहित कई न्यायिक अधिकारियों को भी नहीं बख्शा था। उन पर भी लाठीचार्ज किया था। अधिवक्ता बताते हैं कि हाईकोर्ट बेंच बनाने की मांग के लिए संघर्षरत अधिवक्ताओं ने लाठीचार्ज की घटना से दो दिन पहले फरह, मथुरा में आयोजित तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की सभा मेें पहुंचकर वी वांट हाईकोर्ट के नारे लगाए थे। उस समय केंद्र और प्रदेश में भाजपा की सरकार थी। प्रदेश में मुख्यमंत्री राजनाथ सिंह थे।
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घटना की न्यायिक जांच के लिए जस्टिस गिरधर मालवीय जांच आयोग गठित हुआ, जिसने अपनी जांच रिपोर्ट में जिले के तत्कालीन आला पुलिस अधिकारियों को दोषी पाते हुए रिपोर्ट प्रदेश सरकार को सौंपते हुए कार्रवाई की संस्तुति की थी। मगर, 15 साल के बाद भी इसमें न्याय नहीं मिल सका है।
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आगरा एडवोकेट्स एसोसिएशन अध्यक्ष सरेंद्र लाखन, जनपद बार अध्यक्ष गजेंद्र शर्मा बाबा, हाईकोर्ट खंडपीठ स्थापना मंच के संयोजक अजय सिंह, खंडपीठ संघर्ष समिति के मनीष सिंह, शरद कुमार लवानिया, नरेंद्र शर्मा, वीरेंद्र फौजदार, बीएस फौजदार, गगन शर्मा, कु. वीर बहादुर सिंह आदि ने कहा कि 26 सितंबर को अधिवक्ता काला दिवस के रूप में मनाएंगे। कार्य से भी विरत रहेंगे। प्रदेश सरकार से घटना के दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।