आगरा: जैसे ही खुले गोकुल बैराज के दरवाजे, यमुना में मर गईं लाखों मछलियां, जानें क्या है वजह

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा Published by: मुकेश कुमार Updated Sat, 24 Jul 2021 01:27 PM IST

सार

हथिनीकुंड बैराज और गोकुल बैराज से यमुना में पानी छोड़ा गया है, जिससे शुक्रवार को नदी का जलस्तर बढ़ गया। पानी के साथ मृत मछलियां भी बहकर आईं। 
यमुना में मरी पड़ीं मछलियां
यमुना में मरी पड़ीं मछलियां - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

आगरा में शुक्रवार शाम को यमुना नदी का जलस्तर बढ़ गया। सिकंदरा से लेकर ताजमहल तक यमुना में दोनों छोर पर पानी पहुंच गया है। हालांकि इसमें गंदगी और जलकुंभी बड़ी मात्रा में नजर आई। इसके साथ ही सिकंदरा के कैलाश घाट और जीवनी मंडी वाटर वर्क्स पर लाखों मछलियां मरी हुई पाईं गईं। 
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उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी भुवन प्रकाश ने इस मामले में दोनों जगह कैलाश घाट और जीवनी मंडी का निरीक्षण किया और सैंपल एकत्र कराए। क्षेत्रीय अधिकारी भुवन प्रकाश के मुताबिक गोकुल बैराज से ही मछलियां मृत बहती हुई आई हैं। महीनों से बैराज में पानी एकत्र था, जिसमें मथुरा के नाले और औद्योगिक अपशिष्ट गिर रहा है। 


हरियाणा के हथिनीकुंड बैराज से पानी छोड़े जाने के कारण गोकुल बैराज से बड़ी मात्रा में पानी छोड़ा गया। उसी में मछलियां मरी पाई गई हैं, जो बहती हुई आगरा तक आई हैं। इसमें जलकुंभी की मात्रा ज्यादा है। पानी की स्थिति अगर आगरा में खराब होती तो पूरे क्षेत्र की मछलियां मृत पाई जातीं। 

यमुना को प्रदूषण मुक्त करने के लिए हुए आंदोलन 
मथुरा में यमुना को प्रदूषण मुक्त करने के लिए लगाातार अभियान चल रहे हैं। इसके बावजूद नदी में गंदा पानी है। विश्वधर्म रक्षक दल के अध्यक्ष विजय चतुर्वेदी ने कहा कि यमुना शुद्धिकरण के लिए यमुना भक्तों ने तमाम आंदोलन भी किए, उसके बाद भी सरकार की चुप्पी यमुना भक्तों को असहनीय प्रतीत हो रही है।

उन्होंने बताया कि संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के अनुसार यमुना नदी सबसे अधिक प्रदूषित नदी है, जबकि यमुना नदी के प्रदूषण को दूर करने के लिए 1993 में सरकार ने जापान अंतरराष्ट्रीय सहयोग एजेंसी (जायका) से सहायता लेकर यमुना कार्य योजना को लागू किया था। योजना का पहला चरण 2003 में पूरा होने का दावा भी केंद्र सरकार कर चुकी है। 

इस योजना में लगभग 682 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे। 2003 में इसका द्वितीय चरण चरण शुरू हुआ, जिसकी लागत 624 करोड़ तय की गई। 2011 में तीसरे चरण में 1656 करोड़ रुपये की योजनाएं स्वीकृत की गईं, दिल्ली में यमुना की सफाई पर केंद्र एवं राज्य सरकारें 1200 करोड़ रुपये से अधिक खर्च कर चुकी हैं। फिर भी प्रदूषण खत्म नहीं हुआ है। 
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