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Janmashtami 2022: जरासंध के आक्रमण से बचने के लिए आगरा से सटे शौरीपुर में रुके थे कृष्ण और बलदाऊ, जानें इतिहास
Thu, 18 Aug 2022 02:43 PM IST
धीरेन्द्र सिंह
अमर उजाला ब्यूरो, आगरा
अमर उजाला ब्यूरो, आगरा
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Thu, 18 Aug 2022 02:43 PM IST
सार
आगरा से सटे शौरीपुर-बटेश्वर से भगवान श्रीकृष्ण का गहरा नाता है। जरासंध के आक्रमण से बचने के लिए कृष्ण और बलदाऊ यहां रुके थे।
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राधा-कृष्ण की प्रतिमा
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
आगरा से सटे बाह शौरीपुर-बटेश्वर और कृष्ण के बीच गहरा नाता रहा है। आचार्य श्याम पंडित ने बताया कि विदाई के समय कंस वासुदेव और देवकी को मथुरा से शौरीपुर छोड़ने के लिए निकला था। तभी आकाशवाणी के चलते दोनों को मथुरा कारागार में डाल दिया था। इतना ही नहीं कंस वध का बदला लेने के लिए जरासंध ने हमला बोला तो आक्रमण से बचने के लिए श्रीकृष्ण और बलदाऊ शौरीपुर-बटेश्वर में ही ठहरे थे।
भदावर का इतिहास के लेखक डॉ शिवशंकर कटारे कहते हैं कि पुरातत्ववेत्ता एसीआई कारलायल ने शौरीपुर बटेश्वर में खुदाई कराकर महाभारतकालीन इतिहास को उजागर किया था। खुदाई के दौरान बटेश्वर में श्रीकृष्ण के पुत्र प्रद्युम्न ने पदमन खेड़ा, पौत्र अनुरुद्ध ने औंध खेड़ा बसाया था। बटेश्वर के दोनों प्राचीन मोहल्ले आज भी पूरन खेड़ा नाम से जाने जाते हैं। साहित्यकार डॉ. वीपी मिश्र ने बताया कि बटेश्वर के प्राचीन वनखंडेश्वर मंदिर में सूरसेन से लेकर वासुदेव तक पूजा करते थे।
शौरीपुर-बटेश्वर जैन सिद्ध क्षेत्र तीर्थ कमेटी के उपमंत्री विनोद जैन ने बताया कि 22वें तीर्थंकर भगवान नेमिनाथ और कृष्ण चचेरे भाई थे। बटेश्वर मंदिर के पुुजारी जय प्रकाश गोस्वामी ने कृष्ण बलदाऊ के बटेश्वर से जुडे़ इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि कृष्ण जन्माष्टमी बटेश्वर में धूमधाम से मनाई जाएगी।
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भदावर का इतिहास के लेखक डॉ शिवशंकर कटारे कहते हैं कि पुरातत्ववेत्ता एसीआई कारलायल ने शौरीपुर बटेश्वर में खुदाई कराकर महाभारतकालीन इतिहास को उजागर किया था। खुदाई के दौरान बटेश्वर में श्रीकृष्ण के पुत्र प्रद्युम्न ने पदमन खेड़ा, पौत्र अनुरुद्ध ने औंध खेड़ा बसाया था। बटेश्वर के दोनों प्राचीन मोहल्ले आज भी पूरन खेड़ा नाम से जाने जाते हैं। साहित्यकार डॉ. वीपी मिश्र ने बताया कि बटेश्वर के प्राचीन वनखंडेश्वर मंदिर में सूरसेन से लेकर वासुदेव तक पूजा करते थे।
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शौरीपुर-बटेश्वर जैन सिद्ध क्षेत्र तीर्थ कमेटी के उपमंत्री विनोद जैन ने बताया कि 22वें तीर्थंकर भगवान नेमिनाथ और कृष्ण चचेरे भाई थे। बटेश्वर मंदिर के पुुजारी जय प्रकाश गोस्वामी ने कृष्ण बलदाऊ के बटेश्वर से जुडे़ इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि कृष्ण जन्माष्टमी बटेश्वर में धूमधाम से मनाई जाएगी।
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