{"_id":"63ad60b24ca6d86ed37fe380","slug":"krishiv-won-the-championship-of-the-under-9-khelgaon-badminton-league-in-agra","type":"story","status":"publish","title_hn":"मोबाइल छूटा तो जीता स्वर्ण पदक: कृशिव बने अंडर-9 खेलगांव बैडमिंटन लीग के चैंपियन, रोज तीन घंटे करते हैं अभ्यास","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मोबाइल छूटा तो जीता स्वर्ण पदक: कृशिव बने अंडर-9 खेलगांव बैडमिंटन लीग के चैंपियन, रोज तीन घंटे करते हैं अभ्यास
Thu, 29 Dec 2022 03:14 PM IST
भूपेन्द्र सिंह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: भूपेन्द्र सिंह
Updated Thu, 29 Dec 2022 03:14 PM IST
सार
कृशिव ने अंडर-09 में खेले गए फाइनल मैच में विद्वान मिश्रा को 15-09, 08-15 और 15-10 से हराकर खिताबी जंग जीती। इससे पहले खेले गए सेमीफाइनल मैच कृशिव ने आर्यन मदान को 21-11 से हराकर फाइनल में प्रवेश किया था।
विज्ञापन
ट्रॉफी के साथ कृशिव
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
आगरा में बैडमिंटन में जिले के उभरते सितारे सात साल के कृशिव बजाज का खेल लोगों को काफी पसंद आया। एक साल पहले तक मोबाइल से चिपके रहने वाले कृशिव ने हाथों में जब बैडमिंटन थामा, तो मोबाइल से पूरी तरह ध्यान हटा लिया। बैडमिंटन कोर्ट में हर रोज तीन घंटे अभ्यास करने वाले कृशिव ने एक साल के अंदर पहला टूर्नामेंट जीतकर कई लोगों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया। कृशिव खेलगांव स्पोर्ट्स लीग के तहत खेली गई खेलगांव बैडमिंटन लीग के नए चैंपियन बने है।
विज्ञापन
चंद्रलोक कॉलोनी, प्रताप नगर में रहने वाले कृशिव ने अंडर-09 में खेले गए फाइनल मैच में विद्वान मिश्रा को 15-09, 08-15 और 15-10 से हराकर खिताबी जंग जीती। इससे पहले खेले गए सेमीफाइनल मैच कृशिव ने आर्यन मदान को 21-11 से हराकर फाइनल में प्रवेश किया था। लीग में खेले गए चार मैचों में से तीन में कृशिव विजेता बने। श्रवण बैडमिंटन एकेडमी में प्रैक्टिस करने वाले कृशिव के कोच अमित उपाध्याय कहते हैं कि कृशिव का धैर्य और प्रतिद्वंद्वी खिलाड़ी की कमी को जल्द पढ़ने की क्षमता उन्हें दूसरे खिलाड़ियों से अलग करती है।
विज्ञापन
डीपीएस स्कूल में कक्षा चार के छात्र कृशिव के पिता सुनील बजाज और मां नेहा बजाज बताती हैं कि वह कृशिव के मोबाइल देखने से एक साल पहले काफी परेशान थे। हर समय मोबाइल हाथ में रहता था। एक दिन टीवी पर बैडमिंटन देखने के दौरान खेलने के लिए कहा। हमें लगा कि खेलने से शायद मोबाइल की आदत छूट जाए। ऐसा हुआ भी। एक साल के अभ्यास में पदक जीता है।
विज्ञापन