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आगरा कथा: लोहार गली में रहते थे लौहारू जाति के लोग, जानिए इसका इतिहास
Tue, 23 Feb 2021 06:02 PM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Tue, 23 Feb 2021 06:02 PM IST
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लुहार गली का बाजार
- फोटो : अमर उजाला
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आगरा में जौहरी बाजार के पास के एक इलाके को लोहार गली कहा जाता है। इसका यह नाम पड़ने के पीछे बताया जाता है कि मुगलों के दौर में यहां लौहारू वैश्य जाति के लोग रहा करते थे। उनके नाम पर ही इसका नाम लोहार गली पड़ा। इतिहासकार राज किशोर शर्मा राजे बताते हैं कि मुगलकाल में भारत आए फ्रांसीसी यात्री बर्नियर ने बादशाह जहांगीर के जीवन पर लिखी गई किताब ‘तुजुक ए जहांगीरी’ के हवाले से लिखा है कि जिन जौहरियों ने जौहरी बाजार को बसाया, वे लौहारू वैश्य जाति के थे। ये लोग यहां रहते और व्यवसाय करते थे। लोहार गली में एक कुआं भी है, जिसे मस्तानी का कुआं कहते हैं।
तोपें ढाली जाती थीं यहां पर
इतिहासकार बाला दुबे ने अपनी किताब ‘मोहल्ले आगरा के’ में लोहार गली की दूसरी कहानी दी है। इसके अनुसार बादशाह अकबर के काल में यहां तोपें ढाली जाती थीं। कुछ प्रसिद्ध तोपों के नाम थे गाजी खां, शेर दहन, धूमधाम, गढ़भंजन, फतह लश्कर, बुर्ज शिकन। कुछ छोटी तोपें भी ढाली गईं। इनके नाम थे हरनाल, शुतुरनाल, जंबूर, रामजानकी, धमाका। छोटी तोपों के तोपखानों को तोपखाना के जिन्सी, तोपखाना के जंबिशी, तोपखाना ए रेजाह कहते थे।
अब कॉस्मेटिक का बड़ा बाजार
लोहार गली अब कॉस्मेटिक के सामान का बड़ा बाजार है।
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तोपें ढाली जाती थीं यहां पर
इतिहासकार बाला दुबे ने अपनी किताब ‘मोहल्ले आगरा के’ में लोहार गली की दूसरी कहानी दी है। इसके अनुसार बादशाह अकबर के काल में यहां तोपें ढाली जाती थीं। कुछ प्रसिद्ध तोपों के नाम थे गाजी खां, शेर दहन, धूमधाम, गढ़भंजन, फतह लश्कर, बुर्ज शिकन। कुछ छोटी तोपें भी ढाली गईं। इनके नाम थे हरनाल, शुतुरनाल, जंबूर, रामजानकी, धमाका। छोटी तोपों के तोपखानों को तोपखाना के जिन्सी, तोपखाना के जंबिशी, तोपखाना ए रेजाह कहते थे।
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