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गले नहीं उतरी दूध में ‘प्लास्टिक ’ की मिलावट
ब्यूरो अमर उजाला, आगरा
Updated Tue, 27 Oct 2015 02:04 AM IST
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खेरागढ़ ब्लॉक के ऊंटगिरि गांव में 30 सितंबर को मिड-डे मील के तहत दिया गया दूध पीने से 139 बच्चों की तबीयत बिगड़ जाने के मामले में सोमवार को दूध के सैंपल की जांच रिपोर्ट आ गई।
इसे देखकर एफडीए के अधिकारी हैरान रह गए क्योंकि दूध में डिटर्जेंट या यूरिया की नहीं, बल्कि प्लास्टिक के टुकड़ों की मिलावट बताई गई है। यह बात किसी के गले नहीं उतर रही कि दूध में प्लास्टिक की मिलावट भला कोई क्यों करेगा और इसका फायदा क्या है?
फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एफडीए) ने दूध का नमूना लखनऊ लैब भेजा था। जांच रिपोर्ट के मुताबिक, दूध में फैट की मात्रा 1.7 प्रतिशत पाई गई है, जो निर्धारित मानक 4.5 प्रतिशत से कम है।
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एफडीए अधिकारियों का मानना है कि दूध में पानी की मिलावट की वजह से फैट की मात्रा कम हुई है। पर आश्चर्यजनक यह है कि दूध में प्लास्टिक के टुकड़े पाए गए हैं। लैब ने दूध को अधोमानक (सबस्टैंडर्ट) और मानव शरीर के लिए खतरनाक(अनसेफ) करार दिया है।
अभिहीत अधिकारी राम नरेश यादव का कहना है कि जब सैंपल लिया गया था, तब गंध से लग रहा था कि दूध फटने के कगार पर पहुंच चुका था। इसमें प्लास्टिक की मिलावट पाए जाने के बारे में कुछ कहा नहीं जा सकता है।
खेरागढ़ प्रकरण
- मिड-डे मील का दूध पीने से बिगड़ी थी 139 बच्चों की तबीयत
- 30 सितंबर को हुई घटना की जांच रिपोर्ट 27 दिन में आई
- दूध में प्लास्टिक के टुकड़ों की मिलावट बताई गई है
रिपोर्ट और मायने
--। फैट मानक से कम - पानी मिला था।
--। शुगर की मात्रा होना - चीनी मिली थी।
--। प्लास्टिक के टुकड़े - समझ से परे।
क्यों हुआ ऐसा ...
1. प्लास्टिक की जिस बोतल में सैंपल लिया गया, कहीं उसमें ही प्लास्टिक के टुकड़े मौजूद हों।
2. जिस बर्तन में दूध रखा गया था, हो सकता है उसकी सफाई ठीक से न हुई है, उसमें प्लास्टिक के कण हों।
3. कहीं ऐसा तो नहीं कि आरोपी को बचाने के लिए दूध का सैंपल ही बदल दिया गया हो।
... तो तैर रहे होते प्लास्टिक के कण
अगर दूध में प्लास्टिक मिला होता तो यह सैंपल लेते वक्त ही दिखाई दे जाता। क्योंकि दूध तरल होता है और प्लास्टिक ठोस। जाहिर है प्लास्टिक के कण ऊपर तैर रहे होते।
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इसे देखकर एफडीए के अधिकारी हैरान रह गए क्योंकि दूध में डिटर्जेंट या यूरिया की नहीं, बल्कि प्लास्टिक के टुकड़ों की मिलावट बताई गई है। यह बात किसी के गले नहीं उतर रही कि दूध में प्लास्टिक की मिलावट भला कोई क्यों करेगा और इसका फायदा क्या है?
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फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एफडीए) ने दूध का नमूना लखनऊ लैब भेजा था। जांच रिपोर्ट के मुताबिक, दूध में फैट की मात्रा 1.7 प्रतिशत पाई गई है, जो निर्धारित मानक 4.5 प्रतिशत से कम है।
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एफडीए अधिकारियों का मानना है कि दूध में पानी की मिलावट की वजह से फैट की मात्रा कम हुई है। पर आश्चर्यजनक यह है कि दूध में प्लास्टिक के टुकड़े पाए गए हैं। लैब ने दूध को अधोमानक (सबस्टैंडर्ट) और मानव शरीर के लिए खतरनाक(अनसेफ) करार दिया है।
अभिहीत अधिकारी राम नरेश यादव का कहना है कि जब सैंपल लिया गया था, तब गंध से लग रहा था कि दूध फटने के कगार पर पहुंच चुका था। इसमें प्लास्टिक की मिलावट पाए जाने के बारे में कुछ कहा नहीं जा सकता है।
खेरागढ़ प्रकरण
- मिड-डे मील का दूध पीने से बिगड़ी थी 139 बच्चों की तबीयत
- 30 सितंबर को हुई घटना की जांच रिपोर्ट 27 दिन में आई
- दूध में प्लास्टिक के टुकड़ों की मिलावट बताई गई है
रिपोर्ट और मायने
--। फैट मानक से कम - पानी मिला था।
--। शुगर की मात्रा होना - चीनी मिली थी।
--। प्लास्टिक के टुकड़े - समझ से परे।
क्यों हुआ ऐसा ...
1. प्लास्टिक की जिस बोतल में सैंपल लिया गया, कहीं उसमें ही प्लास्टिक के टुकड़े मौजूद हों।
2. जिस बर्तन में दूध रखा गया था, हो सकता है उसकी सफाई ठीक से न हुई है, उसमें प्लास्टिक के कण हों।
3. कहीं ऐसा तो नहीं कि आरोपी को बचाने के लिए दूध का सैंपल ही बदल दिया गया हो।
... तो तैर रहे होते प्लास्टिक के कण
अगर दूध में प्लास्टिक मिला होता तो यह सैंपल लेते वक्त ही दिखाई दे जाता। क्योंकि दूध तरल होता है और प्लास्टिक ठोस। जाहिर है प्लास्टिक के कण ऊपर तैर रहे होते।