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शरद की चांदनी में कथक ने बांधा समां
आगरा, अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 10 Dec 2014 02:11 AM IST
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जयपुर कथक केंद्र और उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग के संयुक्त तत्वावधान में सूर सदन प्रेक्षागृह में कथक समारोह 2014-15 का आयोजन किया गया। इसमें कथक नृत्य में शरद ऋतु के सौंदर्य को दर्शाया गया। पद्म श्री मोईनुद्दीन खां ने सारंगी पर धुन छेड़ी।
कथक के अंग, प्रत्यंग और उपांगों के साथ कथक नृत्य की पारंपरिक शैली और नवीन संरचनाआें को शामिल किया गया। शरद ऋतु के तीन रंगों शरद चांदनी, शरद प्रकृति और शरद मन को प्रस्तुत किया गया। शरद चांदनी में पारंपरिक कथक नृत्य को चांदनी के रूप में पिरोया गया। शरद प्रकृति में सुमित्रानंदन पंत और डा. हरिराम आचार्य की रचनाओं द्वारा शरद ऋतु में प्राकृतिक वर्णन को दर्शाया गया। शरद मन में मन की भावनाओं को भी दर्शाया गया। कनिका कोठारी, देवांशी दुबे, और्वी शर्मा, रवींद्र, तरुण, शगुन, चेतन, तोषिवा गोठरवाल, फैरी, हर्षिता शर्मा, कीर्ति आदि ने नृत्य प्रस्तुत किया। डा. रेखा ठाकर व राजकुमार जंबड़ा का निर्देशन रहा। परवाज पर प्रवीण आर्य, तबले पर हनुमान भारती, सितार पर हरिहर शरण भट्ट और अन्य तबले पर दिनेश खींची थे। मुन्नालाल भाट ओर रमेश मेवाल ने गाने का बीड़ा उठाया।
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कथक के अंग, प्रत्यंग और उपांगों के साथ कथक नृत्य की पारंपरिक शैली और नवीन संरचनाआें को शामिल किया गया। शरद ऋतु के तीन रंगों शरद चांदनी, शरद प्रकृति और शरद मन को प्रस्तुत किया गया। शरद चांदनी में पारंपरिक कथक नृत्य को चांदनी के रूप में पिरोया गया। शरद प्रकृति में सुमित्रानंदन पंत और डा. हरिराम आचार्य की रचनाओं द्वारा शरद ऋतु में प्राकृतिक वर्णन को दर्शाया गया। शरद मन में मन की भावनाओं को भी दर्शाया गया। कनिका कोठारी, देवांशी दुबे, और्वी शर्मा, रवींद्र, तरुण, शगुन, चेतन, तोषिवा गोठरवाल, फैरी, हर्षिता शर्मा, कीर्ति आदि ने नृत्य प्रस्तुत किया। डा. रेखा ठाकर व राजकुमार जंबड़ा का निर्देशन रहा। परवाज पर प्रवीण आर्य, तबले पर हनुमान भारती, सितार पर हरिहर शरण भट्ट और अन्य तबले पर दिनेश खींची थे। मुन्नालाल भाट ओर रमेश मेवाल ने गाने का बीड़ा उठाया।
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