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करवाचौथ पर यह संयोग बढ़ाएगा पति-पत्नी का प्रेम, इस समय होगा 'चांद का दीदार'
Wed, 16 Oct 2019 10:36 AM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Wed, 16 Oct 2019 10:36 AM IST
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करवाचौथ
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विजय नगर निवासी ज्योतिषाचार्य पूनम वार्ष्णेय के अनुसार करवाचौथ पर 17 अक्तूबर को शाम 8:34 बजे चंद्र दर्शन होंगे। हालांकि, चतुर्थी गुरुवार सुबह 6:49 बजे से शुक्रवार 7:28 बजे तक रहेगी। यानि चतुर्थी तिथि गुरुवार को पूरे दिन रहेगी।
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जिसमें पूजन का सबसे अधिक शुभ मुहूर्त 5:50 से 7:06 तक का है। वहीं चंद्रमा को 27 नक्षत्रों में रोहिणी नक्षत्र सबसे अधिक प्रिय है, जिसमें करवाचौथ का पूजन किया जाएगा। इस बार चंद्रमा की पूजा करने से पति-पत्नी में प्रेम की वृद्धि करने वाला योग भी बन रहा है।
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यह है व्रत की सामग्री
मिट्टी या पीतल का करवा, जल से भरा लोटा, करवा के ढक्कन में रखने के लिए गेहूं, दीपक, हल्दी, पुष्पमाला, चंदन, फल, मिठाई, गंगाजल, चावल, सुहाग पिटारी, प्रसाद के लिए हलवा-पूड़ी-मिठाई, दक्षिणा के लिए रुपये।
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जिसमें पूजन का सबसे अधिक शुभ मुहूर्त 5:50 से 7:06 तक का है। वहीं चंद्रमा को 27 नक्षत्रों में रोहिणी नक्षत्र सबसे अधिक प्रिय है, जिसमें करवाचौथ का पूजन किया जाएगा। इस बार चंद्रमा की पूजा करने से पति-पत्नी में प्रेम की वृद्धि करने वाला योग भी बन रहा है।
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यह है व्रत की सामग्री
मिट्टी या पीतल का करवा, जल से भरा लोटा, करवा के ढक्कन में रखने के लिए गेहूं, दीपक, हल्दी, पुष्पमाला, चंदन, फल, मिठाई, गंगाजल, चावल, सुहाग पिटारी, प्रसाद के लिए हलवा-पूड़ी-मिठाई, दक्षिणा के लिए रुपये।
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इस तरह करें पूजन
लकड़ी के पट्टे पर लाल कपड़ा बिछाएं। मिट्टी से भगवान शिव-पार्वती और गणेश की प्रतिमा स्थापित करें। प्रतिमा को लाल चुन्नी उड़ाने के साथ शृंगार करें। घी का दीपक जलाएं। करवे और लोटा का सात बार स्थान परिवर्तन करें। चंद्रोदय होने पर छलनी से देखने के बाद चंद्रमा की पूजा करें। इसके बाद पति के हाथ से जल पीकर व्रत खोलें। घर के बुजुर्गों से आशीर्वाद लें।
लकड़ी के पट्टे पर लाल कपड़ा बिछाएं। मिट्टी से भगवान शिव-पार्वती और गणेश की प्रतिमा स्थापित करें। प्रतिमा को लाल चुन्नी उड़ाने के साथ शृंगार करें। घी का दीपक जलाएं। करवे और लोटा का सात बार स्थान परिवर्तन करें। चंद्रोदय होने पर छलनी से देखने के बाद चंद्रमा की पूजा करें। इसके बाद पति के हाथ से जल पीकर व्रत खोलें। घर के बुजुर्गों से आशीर्वाद लें।