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कार्तिक पूर्णिमा पर विशेष- गंगाघाटों पर दीपदान करने से पूरी होती हैं मनौतियां
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कासगंज। कार्तिक पूर्णिमा स्नान मंगलवार को होगा। ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक कार्तिक पूर्णिमा का स्नान विधि विधानपूर्वक करने से सद्बुद्घि की प्राप्ति होती है और रोगों का नाश होता है। गंगाघाटों पर दीपदान करने से मनौतियां पूरी होती हैं। ज्योतिषाचार्य ने पूजा अर्चना की विधि भी बताई है।
ज्योतिषाचार्य पंडित राहुल वशिष्ठ ने बताया कि रविवार को दोपहर 12:45 बजे से कार्तिक पूर्णिमा तिथि का शुभारंभ हो गया। जो सोमवार दोपहर 3 बजे तक रहेगी। सुबह उदय तिथि में सोमवार को स्नान करने से पुण्य लाभ मिलेगा। स्नान पर्व पर निर्धनों को दान करने का महत्व भी विशेष पुण्य देता है।
डॉ. राधा कृष्ण का कहना है कि इस कार्तिक पूर्णिमा को देव दीपावली पर्व होने का भी बड़ा महत्व है। देवउठनी के दिन देवता जागृत होते हैं और कार्तिक पूर्णिमा के दिन घाटों पर स्नान कर दिवाली मनाते हैं। इसलिए इसे देव दिवाली कहा जाता है। इसी दिन संध्या काल को मत्स्यावतार हुआ था। इस पूर्णिमा को ब्रह्मा, विष्णु, शिव, अंगिरा और आदित्य आदि ने महापुनीत पर्व प्रमाणित किया है। इस दिन विधि-विधानपूर्वक पूजा करने से मनौतियां पूरी होती हैं। घाटों पर तो दीपदान का सबसे अधिक महत्व है।
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ज्योतिषाचार्य के मुताबिक यह करें कार्य
- सुबह गंगा स्नान कर घाट पर करें देवों की स्तुति।
- गंगाघाट पर दीपदान कर देवताओं को याद करें।
- इस दिन उपवास करके भगवान का स्मरण करना चाहिए।
- निर्धनों और साधू संतों को दान दें।
- इस दिन सालिग्राम के साथ ही तुलसी की पूजा का भी विशेष महत्व है।
- इस दिन मांसाहार का सेवन नहीं करना चाहिए।
- इस दिन ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए।
पूर्व संध्या पर ही पहुंचे श्रद्धालु
कार्तिक पूर्णिमा की पूर्व संध्या पर ही गंगाघाटों पर श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया। तीर्थनगरी सोरों में राजस्थान, मध्यप्रदेश सहित, प्रदेश के सुदूर इलाकों से श्रद्धालु पहुंचे। यहां सोमवार भोर में श्रद्धालु डुबकी लगाकर गंगास्नान करेंगे।
वर्जन-
कीं हैं तैयारियां
- गंगास्नान को लेकर प्रशासन ने तैयारियां की हैं। लहरा घाट पर एक कंपनी पीएसी गोताखोरों की तैनात की गई है। लहरा से कछला तक जगह जगह पुलिस फोर्स एवं यातायात पुलिस लगा दी है। मेला ग्राउंड में श्रद्धालुओं के लिए वाहनों के पार्किंग की व्यवस्था की है। - राजकुमार, थानाध्यक्ष, सोरों।
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ज्योतिषाचार्य पंडित राहुल वशिष्ठ ने बताया कि रविवार को दोपहर 12:45 बजे से कार्तिक पूर्णिमा तिथि का शुभारंभ हो गया। जो सोमवार दोपहर 3 बजे तक रहेगी। सुबह उदय तिथि में सोमवार को स्नान करने से पुण्य लाभ मिलेगा। स्नान पर्व पर निर्धनों को दान करने का महत्व भी विशेष पुण्य देता है।
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डॉ. राधा कृष्ण का कहना है कि इस कार्तिक पूर्णिमा को देव दीपावली पर्व होने का भी बड़ा महत्व है। देवउठनी के दिन देवता जागृत होते हैं और कार्तिक पूर्णिमा के दिन घाटों पर स्नान कर दिवाली मनाते हैं। इसलिए इसे देव दिवाली कहा जाता है। इसी दिन संध्या काल को मत्स्यावतार हुआ था। इस पूर्णिमा को ब्रह्मा, विष्णु, शिव, अंगिरा और आदित्य आदि ने महापुनीत पर्व प्रमाणित किया है। इस दिन विधि-विधानपूर्वक पूजा करने से मनौतियां पूरी होती हैं। घाटों पर तो दीपदान का सबसे अधिक महत्व है।
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ज्योतिषाचार्य के मुताबिक यह करें कार्य
- सुबह गंगा स्नान कर घाट पर करें देवों की स्तुति।
- गंगाघाट पर दीपदान कर देवताओं को याद करें।
- इस दिन उपवास करके भगवान का स्मरण करना चाहिए।
- निर्धनों और साधू संतों को दान दें।
- इस दिन सालिग्राम के साथ ही तुलसी की पूजा का भी विशेष महत्व है।
- इस दिन मांसाहार का सेवन नहीं करना चाहिए।
- इस दिन ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए।
पूर्व संध्या पर ही पहुंचे श्रद्धालु
कार्तिक पूर्णिमा की पूर्व संध्या पर ही गंगाघाटों पर श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया। तीर्थनगरी सोरों में राजस्थान, मध्यप्रदेश सहित, प्रदेश के सुदूर इलाकों से श्रद्धालु पहुंचे। यहां सोमवार भोर में श्रद्धालु डुबकी लगाकर गंगास्नान करेंगे।
वर्जन-
कीं हैं तैयारियां
- गंगास्नान को लेकर प्रशासन ने तैयारियां की हैं। लहरा घाट पर एक कंपनी पीएसी गोताखोरों की तैनात की गई है। लहरा से कछला तक जगह जगह पुलिस फोर्स एवं यातायात पुलिस लगा दी है। मेला ग्राउंड में श्रद्धालुओं के लिए वाहनों के पार्किंग की व्यवस्था की है। - राजकुमार, थानाध्यक्ष, सोरों।