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कारगिल विजय दिवस: वीर जवानों की शहादत पर जो वादे हुए, वो आज तक अधूरे

Fri, 26 Jul 2019 02:18 PM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, फिरोजाबाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, फिरोजाबाद Published by: मुकेश कुमार Updated Fri, 26 Jul 2019 02:18 PM IST
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Kargil vijay diwas 2019 government forgot martyrs of Firozabad
शहीद हेम सिंह की प्रतिमा - फोटो : अमर उजाला
कारगिल युद्ध में फिरोजाबाद जिले के दो बहादुर सैनिकों ने देश की खातिर अपने प्राण न्यौछावर कर दिए थे। जब शहीदों के पार्थिव उनके घर आए तो सरकार से लेकर प्रशासन, जनप्रतिनिधियों ने वादों की झड़ी लगा दी थी। मगर आज भी कई वादे पूरे नहीं हो सके हैं। 
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एका क्षेत्र के गांव नगला खेड़ा निवासी हेम सिंह कारगिल की लड़ाई में टाइगर हिल पर दुश्मनों से लड़ते हुए शहीद हो गए थे। जब शव आया था तो प्रशासन ने हेम सिंह द्वार बनवाने की बात कही लेकिन आज तक वो सिर्फ वादा ही रहे गया। 
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हेम सिंह दो मार्च 1988 को फौज में भर्ती हुए थे। रानी खेत में प्रशिक्षण लेने के बाद 1988 में श्रीलंका में बार्डर पर तैनाती मिली। 1999 में कारगिल युद्ध के दौरान लाइनपैरा कमांडो के रूप में तैनात किया गया। युद्ध के दौरन वो शहीद हो गए थे। 
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भाई सुघर सिंह ने बताया कि वो खुद भी कारगिल की लड़ाई में गिलेशियर पर तैनात रहे थे। उन्होंने कहा कि कारगिल शहीदों परिवारों को प्रशासन भूल चुका है। एका, वसुंधरा रोड का शहीद के नाम पर नहीं रखा है। 

शहीद के पिता की पेंशन बंद की

Kargil vijay diwas 2019 government forgot martyrs of Firozabad
शहीद सतीशचंद्र बघेल की प्रतिमा - फोटो : अमर उजाला
फरिहा क्षेत्र के मरसलगंज निवासी सतीशचंद्र बघेल भी कारगिल की लड़ाई में शहीद हो गए थे। इनके परिजनों को भूमि मिली, मगर अलग-अलग टुकड़ों में। शहीद की पत्नी मीना बघेल अपनी बेटी पूजा के साथ आगरा में रहती हैं। 

शहीद सतीशचंद्र बघेल की प्रतिमा परिजनों ने खुद की जमीन पर लगवाई। शहीद स्मारक की देखभाल पिता भोजराज बघेल करते हैं। पिता भोजराज को पेंशन 16 माह तक मिली, इसके बाद पेंशन भी बंद कर दी। 

परिजनों के मुताबिक सतीशचंद्र बघेल के शहीद होने के बाद न तो पेट्रोलपंप मिला है और न ही गैस एजेंसी। आज भी गांव में 26 जनवरी एवं 15 अगस्त को शहीद सतीश बघेल की प्रतिमा के समक्ष ध्वजारोहण किया जाता है।
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