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कारगिल विजय दिवस पर छलका शहीदों के परिजनों का दर्द, बोले- सरकार के वादे अधूरे
न्यूज डेस्क, अमर उजाला फिरोजाबाद
Updated Thu, 26 Jul 2018 10:59 AM IST
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शहीद हेमसिंह यादव और सतीश चंद्र बघेल की प्रतिमाएं
- फोटो : अमर उजाला
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कारगिल युद्ध में फिरोजाबाद जिले के दो जवानों ने अपनी शहादत दी। शहीद होने के बाद शव जिले में आए, फिर क्या सरकार से लेकर प्रशासन तक ने वादों की झड़ी लगा दी थी। लेकिन कई वादे ऐसे जो आज तक पूरे नहीं हुए।
शहीद हेम सिंह के गांव में सड़क नहीं है तो वहीं शहीद सतीश बघेल के नाम पर जिस मार्ग का नाम रखा गया उस पर शहीद के नाम की पट्टिका टूटी पड़ी है। जमीन टुकड़ों में मिली जो खेती योग्य तक नहीं रही। शहीदों के नामों पर बनाए गए पार्क भी दुर्दशा का शिकार हैं।
एका के गांव नगला खेड़ा निवासी रामेश्वर दयाल यादव के घर एक फरवरी 1970 को हेम सिंह का जन्म हुआ था। गांव में पढ़ाई के बाद एटा के जवाहरलाल पीजी कालेज से बीए के फाइनल करने से पहले दो मार्च 1988 को फौज में चयन हुआ था।
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शहीद हेम सिंह के गांव में सड़क नहीं है तो वहीं शहीद सतीश बघेल के नाम पर जिस मार्ग का नाम रखा गया उस पर शहीद के नाम की पट्टिका टूटी पड़ी है। जमीन टुकड़ों में मिली जो खेती योग्य तक नहीं रही। शहीदों के नामों पर बनाए गए पार्क भी दुर्दशा का शिकार हैं।
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एका के गांव नगला खेड़ा निवासी रामेश्वर दयाल यादव के घर एक फरवरी 1970 को हेम सिंह का जन्म हुआ था। गांव में पढ़ाई के बाद एटा के जवाहरलाल पीजी कालेज से बीए के फाइनल करने से पहले दो मार्च 1988 को फौज में चयन हुआ था।
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देश पर मर मिटने को तैयार
रानीखेत में ट्रेनिंग के बाद 1988 में श्रीलंका के बार्डर पर तैनाती हुई। 1999 में कारगिल युद्ध के दौरान लाइनपैरा कमांडों के रूप में तैनात किया गया। पाक सैनिकों को धूल चटाते हुए लांस नायक हेम सिंह एक जुलाई 1999 को शहीद हो गए थे।
अमर शहीद हेम सिंह का शव आने पर गांव में अनेक वादे किए गए। शहीद के भाई सुघर सिंह ने बताया कि वो खुद कारगिल में तैनात रहे उनकी अंगुली में चोट आई थी। पूरा परिवार देश के लिए मर मिटने को तैयार है। क्योंकि देश हमारा है। रक्षा हम करेंगे। कोई और नहीं।
15 अगस्त एवं 26 जनवरी को जो सम्मान इस परिवार को मिलना चाहिए वो नहीं दिया जाता। गांव को ही जाने वाली सड़क नहीं बनीं। हवलदार सिंह रिटायर्ड हुए व तीसरे भाई हरवीर सिंह आसाम में पैरा कमांडों के रूप में स्पेशल फोर्स में तैनात हैं।
अमर शहीद हेम सिंह का शव आने पर गांव में अनेक वादे किए गए। शहीद के भाई सुघर सिंह ने बताया कि वो खुद कारगिल में तैनात रहे उनकी अंगुली में चोट आई थी। पूरा परिवार देश के लिए मर मिटने को तैयार है। क्योंकि देश हमारा है। रक्षा हम करेंगे। कोई और नहीं।
15 अगस्त एवं 26 जनवरी को जो सम्मान इस परिवार को मिलना चाहिए वो नहीं दिया जाता। गांव को ही जाने वाली सड़क नहीं बनीं। हवलदार सिंह रिटायर्ड हुए व तीसरे भाई हरवीर सिंह आसाम में पैरा कमांडों के रूप में स्पेशल फोर्स में तैनात हैं।
आज तक नहीं बजी ढोलक
शहीद भाई हेम सिंह के तीन बेटा-बेटी हैं। बड़ा बेटा सुबोध यादव सॉफ्टवेयर इंजीनियर में बंगलुरु में हैं। बेटी पूजा गाजियाबाद में, छोटा बेटा अतुल यादव चंढ़ीगढ़ से बीटेक कर रहे हैं। परिवार के अधिकांश सदस्य एटा में निवास करते हैं।
शहीद के नाम से द्वार एवं एका वसुंधरा रोड का नामकरण आज तक नहीं हो सका। कारगिल दिवस पर प्रतिमा पर माल्यार्पण करने के लिए कोई नहीं आता है। सुघर सिंह बताते हैं कि हेमसिंह के शहीद होने के बाद आज तक परिवार में ढोलक नहीं बजी है।
शहीद के नाम से द्वार एवं एका वसुंधरा रोड का नामकरण आज तक नहीं हो सका। कारगिल दिवस पर प्रतिमा पर माल्यार्पण करने के लिए कोई नहीं आता है। सुघर सिंह बताते हैं कि हेमसिंह के शहीद होने के बाद आज तक परिवार में ढोलक नहीं बजी है।
टुकड़ों में मिली जमीन
अमर शङीद सतीश चंद्र बघेल समाधि स्थल
- फोटो : अमर उजाला
कारगिल युद्ध में शहीद हुए मरसलगंज निवासी सतीशचंद्र बघेल पुत्र भोजराज बघेल के परिजनों को भूमि मिली लेकिन जिला प्रशासन ने टुकड़ों में दी। शहीद के पिता भोजराज बघेल को दर्द है कि करीब 19 वर्ष बीत गए, लेकिन जिला प्रशासन भूमि को एकत्रित नहीं करा सका।
फरिहा से मरसलगंज मार्ग को अमर शहीद सतीशचंद्र बघेल मार्ग की टूटी पट्टिका को नहीं लगवाया गया। शहीद सतीश की धर्मपत्नी मीना देवी बघेल अपनी बेटी पूजा (19) के साथ आगरा के शहीदनगर कालोनी में बहन संगीता देवी के सहारे रहती हैं।
मीना देवी ने कहा कि पति की प्रतिमा खुद की भूमि पर लगवाई, पार्क को सुधार को एक लाख रुपये देने की बात कही थी परंतु पार्क को नहीं सुधारा गया। शहीद के पिता भोजराज सिंह के लिए पेंशन 16 माह तक मिली। इसके बाद बंद कर दी गई। शहीद के भाई बबलू बघेल मजदूरी कर परिवार का पालन पोषण करते हैं।
फरिहा से मरसलगंज मार्ग को अमर शहीद सतीशचंद्र बघेल मार्ग की टूटी पट्टिका को नहीं लगवाया गया। शहीद सतीश की धर्मपत्नी मीना देवी बघेल अपनी बेटी पूजा (19) के साथ आगरा के शहीदनगर कालोनी में बहन संगीता देवी के सहारे रहती हैं।
मीना देवी ने कहा कि पति की प्रतिमा खुद की भूमि पर लगवाई, पार्क को सुधार को एक लाख रुपये देने की बात कही थी परंतु पार्क को नहीं सुधारा गया। शहीद के पिता भोजराज सिंह के लिए पेंशन 16 माह तक मिली। इसके बाद बंद कर दी गई। शहीद के भाई बबलू बघेल मजदूरी कर परिवार का पालन पोषण करते हैं।
प्रतिवर्ष प्रतिमा स्थल पर करते हैं भंडारा
टूटी पड़ी शिलापट्टिका
- फोटो : अमर उजाला
पिता भोजराज बघेल कहते हैं कि आज भी पुत्रवधू मीना देवी बघेल 20 जून को बेटे का शव आने के कारण प्रतिवर्ष भंडारा प्रतिमा स्थल पर करते हैं। 26 जनवरी एवं 15 अगस्त को ध्वजारोहण करने वो आगरा से आती हैं।
जिला सैनिक कल्याण अधिकारी कैप्टन शरद कुमार सिंह ने बताया कि कारगिल शहीदों को सरकार से अनुमन्य की सभी सुविधाएं दी जा रहीं है। उस समय क्या घोषणाएं हुई इसकी जानकारी नहीं है। लेकिन शहीद हेम सिंह को पेट्रोल पंप मिला। भूमि दी, हमारा प्रयास होगा कि सैनिकों के परिजनों को कोई दिक्कत नहीं होने पाए।
जिला सैनिक कल्याण अधिकारी कैप्टन शरद कुमार सिंह ने बताया कि कारगिल शहीदों को सरकार से अनुमन्य की सभी सुविधाएं दी जा रहीं है। उस समय क्या घोषणाएं हुई इसकी जानकारी नहीं है। लेकिन शहीद हेम सिंह को पेट्रोल पंप मिला। भूमि दी, हमारा प्रयास होगा कि सैनिकों के परिजनों को कोई दिक्कत नहीं होने पाए।