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कारगिल युद्ध में मैनपुरी ने भी बलिदान किए थे पांच लाल
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24एमएनपी-28-शहीद अमरुद्दीन का किशनी स्थित शहीद स्मारक
- फोटो : MAINPURI
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मैनपुरी। जब भी देश की आन, बान और शान की बात आई मैनपुरी ने कभी पीठ नहीं दिखाई। कारगिल के युद्ध में भी मैनपुरी के वीरों ने डटकर दुश्मनों का मुकाबला किया। युद्घ में पांच वीरों ने शहादत पाई और इतिहास में अमर हो गए। 1999 में हुए कारगिल युद्ध में जिले के पांच वीरों ने शहादत दी थी। हर जुबान पर आज भी शहीदों के शौर्य की कहानी है।
शहर से सटे गांव अंजनी निवासी प्रवीण कुमार यादव दुश्मनों से लोहा लेते हुए शहीद हो गए थे। गांव के बाहर बना उनका स्मारक आज भी उनकी शहादत की याद दिलाता है। आज भी गांव के लोग उनकी याद करते हैं तो उनकी आंखें नम हो जाती हैं। वे बताते हैं कि जब उनके शहीद होने की सूचना आई तो पूरे गांव में मातम था, लेकिन हर सीना गर्व से चौड़ा भी था। देश पर जान न्यौछावर करने वालों में बेवर के गांव घुटारा निवासी शहीद मुनीश कुमार यादव, कुरावली के नगला आंध्रा निवासी हेमचरन सिंह, किशनी के गांव दिवन्नपुर साहिनी निवासी अमरुद्दीन और घिरोर के गांव शाहजहांपुर निवासी पैरानायक सत्यदेव सिंह भी शामिल थे।
18 पर भारी पड़े थे अकेले शहीद सत्यदेव सिंह
शहीद सत्यदेव सिंह की वीरता के बारे में जब उनके साथियों ने बताया था तो हर कोई मैनपुरी के इस लाल पर फख्रकर रहा था। 24 जुलाई 1999 को शहीद होने से पहले अकेले सत्यदेव सिंह ने 18 पाक सैनिकों को मार गिराया था।
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युवाओं का बस एक ही सपना
गांव अंजनी निवासी प्रवीण कुमार यादव ने कारगिल युद्ध में अपने प्राणों की आहूति दे दी। इसके बाद जैसे युवाओं में एक नए जुनून को जन्म दिया। आज इस गांव के 200 से अधिक युवा सेना में हैं। अन्य भी सेना में जाने का ही सपना देखते हैं। इसके लिए वे कड़ी मेहनत कर रहे हैं।
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शहर से सटे गांव अंजनी निवासी प्रवीण कुमार यादव दुश्मनों से लोहा लेते हुए शहीद हो गए थे। गांव के बाहर बना उनका स्मारक आज भी उनकी शहादत की याद दिलाता है। आज भी गांव के लोग उनकी याद करते हैं तो उनकी आंखें नम हो जाती हैं। वे बताते हैं कि जब उनके शहीद होने की सूचना आई तो पूरे गांव में मातम था, लेकिन हर सीना गर्व से चौड़ा भी था। देश पर जान न्यौछावर करने वालों में बेवर के गांव घुटारा निवासी शहीद मुनीश कुमार यादव, कुरावली के नगला आंध्रा निवासी हेमचरन सिंह, किशनी के गांव दिवन्नपुर साहिनी निवासी अमरुद्दीन और घिरोर के गांव शाहजहांपुर निवासी पैरानायक सत्यदेव सिंह भी शामिल थे।
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18 पर भारी पड़े थे अकेले शहीद सत्यदेव सिंह
शहीद सत्यदेव सिंह की वीरता के बारे में जब उनके साथियों ने बताया था तो हर कोई मैनपुरी के इस लाल पर फख्रकर रहा था। 24 जुलाई 1999 को शहीद होने से पहले अकेले सत्यदेव सिंह ने 18 पाक सैनिकों को मार गिराया था।
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युवाओं का बस एक ही सपना
गांव अंजनी निवासी प्रवीण कुमार यादव ने कारगिल युद्ध में अपने प्राणों की आहूति दे दी। इसके बाद जैसे युवाओं में एक नए जुनून को जन्म दिया। आज इस गांव के 200 से अधिक युवा सेना में हैं। अन्य भी सेना में जाने का ही सपना देखते हैं। इसके लिए वे कड़ी मेहनत कर रहे हैं।