स्मृति शेष: कल्याण सिंह ने आगरा में कराया था भाजपा का राष्ट्रीय अधिवेशन, रोडवेज बस से पहुंचे थे यहां
उत्तर प्रदेश में भाजपा का मजबूत आधार बनाने वाले कल्याण सिंह ही थे। प्रदेशाध्यक्ष बनने के बाद यूपी में पार्टी की मजबूती के लिए उन्होंने अप्रैल, 1988 में कोठी मीना बाजार में राष्ट्रीय अधिवेशन करवाया।
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पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह का आगरा से गहरा नाता रहा। उनको यहां भी पार्टी से जुड़े कार्यकर्ता बाबूजी कहकर पुकारते थे। वर्ष 1987 में भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष बनकर वह रोडवेज बस से आगरा पहुंचे थे। विधायक पुरुषोत्तम खंडेलवाल उन्हें रिसीव करने पहुंचे थे। आगरा में पार्टी का राष्ट्रीय अधिवेशन कराने के लिए दो माह तक आम कार्यकर्ता की तरह यहां रहे थे।
विधायक पुरुषोत्तम खंडेलवाल ने बताया कि कल्याण सिंह जब प्रदेशाध्यक्ष बने तो केवल 16 विधायक पार्टी के थे। वह वर्ष 1987 में लखनऊ से रोडवेज बस से आगरा आए थे। खंडेलवाल ने बताया कि तब उनके पास पार्टी के महानगर महामंत्री की जिम्मेदारी थी।
उन्होंने बाबूजी को रिसीव किया। कल्याण सिंह कई बार आगरा आए। आगरा में सांसद रहे भगवान शंकर रावत, सत्यप्रकाश विकल, रमेशकांत लवानिया और राजकुमार सामा से उनके व्यक्तिगत संपर्क रहे। वह मेरे और इन नेताओं के घरों में ठहरते थे। सर्किट हाउस नहीं जाते थे।
आगरा में कराया पार्टी का पहला राष्ट्रीय अधिवेशन: हरद्वार दुबे
वरिष्ठ नेता एवं राज्यसभा सांसद हरद्वार दुबे ने कल्याण सिंह से जुड़ी यादों को साझा करते हुए बताया कि प्रदेश में भाजपा का मजबूत आधार बनाने वाले कल्याण सिंह ही थे। प्रदेशाध्यक्ष बनने के बाद यूपी में पार्टी की मजबूती के लिए उन्होंने अप्रैल, 1988 में कोठी मीना बाजार में राष्ट्रीय अधिवेशन करवाया। अधिवेशन के लिए दो माह तक आम कार्यकर्ता की तरह काम करते रहे।
उन्होंने अपने संबोधन में कहा था कि दिल्ली का रास्ता उत्तर प्रदेश से होकर जाता है। उन्होंने बताया कि आगरा महानगर की समस्याओं को लेकर भाजपा ने वार्ड स्तर पर धरने प्रदर्शन किए थे। कलक्ट्रेट पर हुए धरने में प्रदेशाध्यक्ष कल्याण सिंह ने भाग लिया था। इसके बाद ही महानगर पालिका के चुनावों में आगरा में भाजपा को 80 में से 42 सीट मिलीं और पहली बार नगर निगम में भाजपा के मेयर के रूप में रमेशकांत लवानियां बने।
धन संग्रह के लिए 11 जगह सिक्कों से तोला
विधायक पुरुषोत्तम खंडेलवाल ने बताया कि कल्याण सिंह स्कूटर से शहर में घूमते थे। पार्टी को धन संग्रह करने की जरूरत पड़ी तो उन्हें 1987 में आगरा दौरे पर 11 जगह सिक्कों से तोला गया। 14 जगह तोला जाना था लेकिन रात अधिक होने के कारण तीन जगह वह नहीं जा सके। आगरा फोर्ट रेलवे स्टेशन पर भी उनका हाथी पर बैठाकर अभूतपूर्व स्वागत किया गया था।
आगरा की बेड़ई जलेबी के लिए रुकवाया हेलीकॉप्टर
भाजपा के प्रदेश सह संयोजक स्थानीय निकाय प्रकोष्ठ नागेंद्र दुबे गामा ने बताया कि कल्याण सिंह के लिए आगरा दूसरा घर था। उन्हें यहां की बेड़ई, जलेबी बड़ी पसंद थी। वर्ष 1999 के लोकसभा चुनाव के दौरान रात्रि विश्राम के बाद वह हेलीकॉप्टर से वापस जा रहे थे।
उन्होंने मुझसे कहा कि नाश्ता नहीं किया है, बेड़ई और जलेबी ले आना। इसके बाद एयरपोर्ट पर उनके पायलट ने मना कर दिया। तब कल्याण सिंह ने हेलीकॉप्टर की खिड़की से उन्हें पास बुलाया और कहा कि नाश्ता कहां है। उन्होंने बेड़ई व जलेबी उन्हें दीं। उन्हें रामबाबू के पराठे भी बेहद पसंद थे।
द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी को दी ‘बच्चों के गांधी’ की उपाधि
आगरा के साहित्यकार द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी को मुख्यमंत्री कल्याण सिंह ने बाल साहित्य भारती का सर्वोच्च पुरस्कार अपने हाथों से प्रदान किया था। उन्होंने ही द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी को उनकी बाल साहित्य के क्षेत्र में की गईं उल्लेखनीय सेवाओं के लिए ‘बच्चों के गांधी’ उपाधि से अलंकृत किया था। उनके निधन पर माहेश्वरी परिवार ने श्रद्धांजलि अर्पित की है।