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एसएन मेडिकल कॉलेज में रैगिंग का खौफ, कई जूनियर छात्र लौट गए घर

Sat, 06 Oct 2018 01:13 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला आगरा Updated Sat, 06 Oct 2018 01:13 PM IST
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Junior students scare after ragging incident in sn medical collage agra
एसएन में रैगिंग के बाद प्राचार्य की क्लास - फोटो : अमर उजाला
आगरा के एसएन मेडिकल कॉलेज के एमबीबीएस पहली साल के छात्र रैगिंग की घटना के बाद से सहमे हुए हैं। कई छात्र घर चले गए हैं, कुछ कक्षाओं में जाने से बच रहे हैं। वहीं मेडिकल कॉलेज परिसर में एंटी रैगिंग सेल लगातार राउंड कर रही है। 
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कुछ दिन पूर्व एसएन में सीनियर छात्रों ने सात पेज का शपथ पत्र, अश्लील भाषा में मेडिकल की परिभाषाएं, लड़कियों के प्रकार, शारीरिक अंगों की परिभाषा तैयार कर जूनियरों के व्हाटसएप पर भेजा था। सीनियर एक-एक कर जूनियर को फोन कर एकांत में बुलाते और इसको सुनाने के लिए कहते। विरोध करने वाले छात्रों की पिटाई कर प्रताड़ित करते। 
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घटना से जूनियर छात्र सहमे हुए हैं। कुछ छात्र कक्षा में आने से डर रहे हैं, तो कई घर भी चले गए हैं। बाकी के छात्रों के अभिभावक रोजाना बात कर कुशलक्षेम पूछ रहे हैं। प्राचार्य डॉ. जीके अनेजा का कहना है कि सभी छात्रों के साथ बैठक कर रैगिंग के दुष्प्रभाव के बारे में बताकर जागरूक किया है। एंटी रैगिंग सेल जांच कर रही है। सीनियर शिक्षक भी सक्रिय हैं। 
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एंटी रैगिंग सेल टीम परिसर में ले रही राउंड

कक्षा के बाद जूनियरों की रैगिंग न हो जाए, इसके लिए एंटी रैगिंग सेल के सदस्य गेस्ट हाउस, स्त्री रोग विभाग, हॉस्टल, हेल्प आगरा हॉस्पिटल, फव्वारा चौराहा पर कक्षा शुरू होने और समाप्त होने पर राउंड ले रहे हैं। एंटी रैगिंग सेल के अध्यक्ष डॉ. एसके कठेरिया ने कहा कि टीम के सदस्य संभावित स्थानों पर राउंड ले रहे हैं। कोई भी रैगिंग करते हुए पाया गया, तो उसके खिलाफ कार्रवाई तय है। 

रैगिंग की घटना पर डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के समाज विज्ञान संस्थान के प्रो.मोहम्मद अरशद ने कहा कि परिवार छोड़कर आने वाले छात्रों को कॉलेज में संरक्षित माहौल न मिल पाने से वह खुद को असुरक्षित महसूस करता है। उसकी सामाजिक जिंदगी प्रभावित होने लगती है। 

मानसिक स्वास्थ्य संस्थान एवं चिकित्सालय के मनोरोग विशेषज्ञ डॉ दिनेश राठौर ने बताया कि रैगिंग से छात्र के करियर पर असर पड़ सकता है। लगातार रैगिंग से छात्र मानसिक रूप से परेशान होता है, तनावग्रस्त भी हो सकता है। वहीं जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन के इलेक्ट प्रेसीडेंट डॉ भूपेंद्र चाहर ने कहा कि रैगिंग में कुछ शरारती तत्व संलिप्त रहते हैं। ऐसे छात्रों को दंडित करना जरूरी है। पढ़ने वाले छात्र ऐसे कार्योँ से दूर रहते हैं।  
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