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इंटरपास झोलाछाप स्त्री रोग विशेषज्ञ बनकर कर रहा था इलाज, दुकान में थी ये व्यवस्थाएं

Wed, 27 Nov 2019 03:53 PM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा Published by: Abhishek Saxena Updated Wed, 27 Nov 2019 03:53 PM IST
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Jholachap Treatment Make Fake Gynecologist in Agra
झोलाछाप की दुकान - फोटो : अमर उजाला
ग्वालियर रोड पर इंटरपास झोलाछाप स्त्री रोग विशेषज्ञ बनकर इलाज कर रहा था। इसके यहां से भारी मात्रा में दवाएं जब्त की, इसमें स्त्री रोग विशेषज्ञ की दवाएं ज्यादा थी। बायोमेडिकल वेस्ट भी था, ड्रिप चढ़ाने की भी व्यवस्था कर रखी थी। दुकान सील कर दी है। 
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स्वास्थ्य विभाग की टीम ग्वालियर रोड स्थित नेशनल क्लीनिक पहुंची। यहां पर धर्मवीर चौधरी इलाज कर रहा था। दो महिला मरीज भी थी। टीम ने इससे चिकित्सकीय डिग्री और क्लीनिक का लाइसेंस मांगा तो यह दिखा नहीं पाया।
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शैक्षणिक योग्यता के बारे में पूछा तो टालमटोल जवाब देने लगा, सख्ती पर उसने इंटर पास बताया। अलमारी में एंटीबायोटिक, इंजेक्शन सीरप समेत अन्य तरह की दवाएं भरी हुई थी। इसमें स्त्री रोग की ज्यादा दवाएं मिली।
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यमुनापार में झोलाछाप चला रहा था श्रीधाम हॉस्पिटल - फोटो : अमर उजाला
आसपास के लोगों से पता चला कि यह तीन-चार साल से दुकान चला रहा है। इसके यहां से दो कार्टन दवाएं जब्त की। एक ही डिब्बे में सिरिंज समेत अन्य बायोमेडिकल वेस्ट भरा हुआ था।

अपंजीकृत अस्पताल प्रभारी डॉ. आरके अग्निहोत्री ने बताया कि धर्मवीर इंटर पास था और इसके पास चिकित्सा की कोई डिग्री नहीं थी। इसके यहां से स्त्री रोग की दवाएं ज्यादा मिली हैं। दुकान सील कर दी है। नोटिस दिया है, एफआइआर कराई जाएगी। टीम में स्वास्थ्य विभाग के शिवकांत
दीक्षित रहे। 

स्वास्थ्य विभाग को कालिंदी विहार स्थित श्रीधाम हॉस्पिटल बिना लाइसेंस के चलता मिला। इसे इंटर पास झोलाछाप चला रहा था। यहां चिकित्सक और पैरामेडिकल स्टाफ नहीं मिला। अस्पताल सील कर दिया है। 

मंगलवार को स्वास्थ्य विभाग की टीम पहुंची तो यहां दो मरीज भर्ती थे, जिनको ड्रिप लगी हुई थी। उनको बुखार और सांस की परेशानी थी। संचालक राजकुमार सिंह मिला, उससे अस्पताल का पंजीकरण, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का प्रमाणपत्र और चिकित्सक-पैरामेडिकल स्टाफ का पैनल दिखाने के लिए कहा। उसने 2017-18 का छलेसर के नाम पर लाइसेंस दिखाया।

लेकिन वर्तमान पते का लाइसेंस नहीं दिखा पाया। मरीजों का कौन इलाज कर रहा है, इस पर उसने एक हड्डी रोग चिकित्सक का नाम बताया, लेकिन वह भी नहीं आए। पूछने पर संचालक ने खुद को इंटर पास बताया और कहा कि उसने 15 साल चिकित्सक के यहां कंपाउंडर के रूप में काम किया है।

कमरों में गंदगी पसरी हुई थी, बायो मेडिकल वेस्ट बिखरा हुआ था। कोने में इसका ढेर लगा हुआ था। आसपास के लोगों से टीम को पता चला कि यह लगभग दो साल से यहां चल रहा है। अस्पताल को सील कर दिया गया। 
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