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जन्माष्टमी पर 75 साल बाद बन रहा दुर्लभ योग
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 25 Aug 2016 01:14 AM IST
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मंदिरों में आकर्षक सजावट की गई
- फोटो : अमर उजाला
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इस बार कृष्ण जन्माष्टमी पर गुरुवार को 75 साल बाद दुर्लभ योग बन रहा है। 25 अगस्त को मध्य रात्रि में छह ग्रहों का केन्द्रीय योग और तीन ग्रहों का त्रिकोण योग होगा। इस दुर्लभ योग में कन्हाई का जन्म होगा। ज्योतिषाचार्य शिव शरण पारासर ने बताया कि भगवान कृष्ण के जन्म के समय सूर्य, चंद्रमा, मंगल, शनि, राहु और केत़ु कुंडली के केन्द्रीय भाव में होंगे। जबकि बुध, गुरु और शुक्र मिलकर त्रिकोण योग बनाएंगे। यह योग समृद्धि कारक रहेगा। लोगों के रुके हुए काम बनेंगे।
ज्योतिषाचार्य ने बताया कि दुर्लभ योग का प्रसाद लोगों को पंजीरी और पंचामृत के माध्यम से मिलेगा। पंजीरी में बुध और गुरु का समावेश होता है। जबकि पंचामृत में लौकिक और पारलौकिक प्रभावों को संतुलित करने की क्षमता होती है। इसलिए पंजीरी और पंचामृत से लोगों को कार्य में सिद्घि और सफलता मिलेगी। बटेश्वर-शौरीपुर में कृष्ण का जन्मोत्सव धूमधाम से मनाने के लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। शास्त्रों के अनुसार जब कंस देवकी को छोड़ने के लिए शौरीपुर जा रहा था तब आकाशवाणी न होती तो कृष्ण का जन्म शौरीपुर-बटेश्वर में होता। इतिहासकार डॉ. शिवशंकर कटारे कहते हैं कि आकाशवाणी में देवकी की आठवीं संतान को कंस का काल बताने पर कारागार में डाल दिया था। वासुदेव की बरात शौरीपुर से मथुरा गई थी। कंस के वध से क्रोधित उसके ससुर जरासंध ने शौरीपुर-बटेश्वर में कृष्ण और बलदाऊ पर कई बार हमला किया था। कृष्ण के पुत्र प्रद्युम्न ने पदमन खेड़ा और पौत्र अनुरुद्ध ने औंध खेड़ा गांव बसाया था। इन्हें आज कल पूरन खेड़ा के नाम से जाना जाता है। जन्माष्टमी की पूर्व बेला पर बटेश्वर में रासलीला का आयोजन हो रहा है।
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ज्योतिषाचार्य ने बताया कि दुर्लभ योग का प्रसाद लोगों को पंजीरी और पंचामृत के माध्यम से मिलेगा। पंजीरी में बुध और गुरु का समावेश होता है। जबकि पंचामृत में लौकिक और पारलौकिक प्रभावों को संतुलित करने की क्षमता होती है। इसलिए पंजीरी और पंचामृत से लोगों को कार्य में सिद्घि और सफलता मिलेगी। बटेश्वर-शौरीपुर में कृष्ण का जन्मोत्सव धूमधाम से मनाने के लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। शास्त्रों के अनुसार जब कंस देवकी को छोड़ने के लिए शौरीपुर जा रहा था तब आकाशवाणी न होती तो कृष्ण का जन्म शौरीपुर-बटेश्वर में होता। इतिहासकार डॉ. शिवशंकर कटारे कहते हैं कि आकाशवाणी में देवकी की आठवीं संतान को कंस का काल बताने पर कारागार में डाल दिया था। वासुदेव की बरात शौरीपुर से मथुरा गई थी। कंस के वध से क्रोधित उसके ससुर जरासंध ने शौरीपुर-बटेश्वर में कृष्ण और बलदाऊ पर कई बार हमला किया था। कृष्ण के पुत्र प्रद्युम्न ने पदमन खेड़ा और पौत्र अनुरुद्ध ने औंध खेड़ा गांव बसाया था। इन्हें आज कल पूरन खेड़ा के नाम से जाना जाता है। जन्माष्टमी की पूर्व बेला पर बटेश्वर में रासलीला का आयोजन हो रहा है।
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