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250 वर्ष प्राचीन है तीर्थनगरी का द्वारिकाधीश मंदिर
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सोरों (कासगंज)। तीर्थनगरी में स्थित द्वारिकाधीश मंदिर 250 वर्ष प्राचीन है। मंदिर में भगवान द्वारिकाधीश एवं रुक्मणि की प्रतिमाएं एक साथ विराजमान हैं। यहां भक्तों की अगाध श्रद्धा है। माना जाता है कि दरबार में पहुंचने वालों के मनोरथ भगवान अवश्य पूर्ण करते हैं।
द्वारिकाधीश मंदिर का निर्माण जमींदार द्वारिका प्रसाद की पत्नी लक्ष्मी देवी ने 250 वर्ष पूर्व लगभग सन 1770 के आसपास करवाया था। लक्ष्मी देवी राजस्थान मारवाड़ी ब्राहमण पालीवाल परिवार की बेटी थीं। उनका विवाह हाथरस के ग्राम थूलई से जमींदार द्वारिका प्रसाद से हुआ था। पति की मृत्यु के बाद राजस्थान के पैतृक पंडित गोपानीथ की सलाह पर लक्ष्मी देवी ने तीर्थनगरी में द्वारिकाधीश मंदिर का निर्माण कराया था।
पंडित गोपीनाथ की देखरेख में यह मंदिर 16 वर्ष में बनकर तैयार हुआ था। राजस्थानी शैली में लाल पत्थरों से निर्मित यह मंदिर अपनी आकर्षक बनावट के कारण पर्यटकों को सहज ही अपनी ओर आकर्षित करता है। पं. गोपीनाथ ने मंदिर में द्वारिकाधीश -रूक्मणी, कृष्ण- राधिका, लड्डू गोपाल की प्रतिमाओं की प्राण प्रतिष्ठा की।
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वर्तमान में पं. गोपीनाथ की पांचवी पीढ़ी के वंशज पं. बृज कुमार गौड़ मंदिर में पूजा अर्चना करते हैं। प्रतिवर्ष कृष्ण जन्माष्टमी पर मंदिर में विशेष उत्सव का आयोजन किया जाता है। इसमें भाग लेने दूर दूर से श्रद्धालु आते हैं। पं. बृज कुमार गौड़ ने बताया कि इस बार भी मंदिर में फूल बंगला आदि सजाया जाएगा। लेकिन कोरोना के चलते सरकार की गाइडलाइन के अनुसार ही कार्यक्रम होगे।
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द्वारिकाधीश मंदिर का निर्माण जमींदार द्वारिका प्रसाद की पत्नी लक्ष्मी देवी ने 250 वर्ष पूर्व लगभग सन 1770 के आसपास करवाया था। लक्ष्मी देवी राजस्थान मारवाड़ी ब्राहमण पालीवाल परिवार की बेटी थीं। उनका विवाह हाथरस के ग्राम थूलई से जमींदार द्वारिका प्रसाद से हुआ था। पति की मृत्यु के बाद राजस्थान के पैतृक पंडित गोपानीथ की सलाह पर लक्ष्मी देवी ने तीर्थनगरी में द्वारिकाधीश मंदिर का निर्माण कराया था।
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पंडित गोपीनाथ की देखरेख में यह मंदिर 16 वर्ष में बनकर तैयार हुआ था। राजस्थानी शैली में लाल पत्थरों से निर्मित यह मंदिर अपनी आकर्षक बनावट के कारण पर्यटकों को सहज ही अपनी ओर आकर्षित करता है। पं. गोपीनाथ ने मंदिर में द्वारिकाधीश -रूक्मणी, कृष्ण- राधिका, लड्डू गोपाल की प्रतिमाओं की प्राण प्रतिष्ठा की।
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वर्तमान में पं. गोपीनाथ की पांचवी पीढ़ी के वंशज पं. बृज कुमार गौड़ मंदिर में पूजा अर्चना करते हैं। प्रतिवर्ष कृष्ण जन्माष्टमी पर मंदिर में विशेष उत्सव का आयोजन किया जाता है। इसमें भाग लेने दूर दूर से श्रद्धालु आते हैं। पं. बृज कुमार गौड़ ने बताया कि इस बार भी मंदिर में फूल बंगला आदि सजाया जाएगा। लेकिन कोरोना के चलते सरकार की गाइडलाइन के अनुसार ही कार्यक्रम होगे।