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शीलवान व्यक्ति जीवन-मरण के भंवरजाल से रहता है मुक्त-विशोक सागर

Sat, 16 Jan 2021 10:54 PM IST
Agra Bureau आगरा ब्यूरो
Updated Sat, 16 Jan 2021 10:54 PM IST
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Jain Acharya,jain mandir firozabad
टूंडला में प्रवचन करते आचार्य विशोक सागर महाराज व श्रद्धालु। - फोटो : TUNDLA
टूंडला। शील धारण करने वाले व्यक्ति ही जीवन में सफलता की सीढ़ी को चढ़ पाते हैं, इसलिए व्यक्ति को अपने जीवन में शील धारण करना चाहिए। ये बातें नगर के पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर में प्रवचन के दौरान जैन मुनि विशोक सागर ने कहीं।
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उन्होंने कहा कि शील से शरीर तेजस्वी बनता है। यदि व्यक्ति जीवनभर शील का पालन करता रहे तो वह जीवन-मरण के भंवरजाल से मुक्त हो जाता है और उसको निश्चित ही मोक्ष प्राप्त होता है। कुशील पुरुष जीवन भर अपने किए पर पछतावा करता है।
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शील गुणों की खान है और कुशील अवगुणों की खान होती है जो व्यक्ति कुशील हैं वो अपने जीवन में निरंतर गलत कार्य ही करता है लेकिन जिसके अंदर शील है वह हमेशा ऐसे कार्य करता है जिसका नाम सारे संसार में रोशनी के समान फैलता रहता है। वह दूसरे लोगों के लिये एक आदर्श का काम करता है।
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