आगरा: आईआरसीटीसी के 341 एजेंट ब्लैकलिस्टड, जानें क्यों हुई कार्रवाई
रेलवे के टिकट दलालों पर आरपीएफ ने बडी कार्रवाईड की है। विशेष अभियान में आईआरसीटीसी के 341 एजेंट को काली सूची में डाला गया है। इसके साथ ही 1459 टिकट दलालों को गिरफ्तार किया गया है।
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रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) ने ऑपरेशन उपलब्ध के तहत रेलवे टिकट दलालों के खिलाफ माहभर के अभियान में 1459 टिकट दलालों को गिरफ्तार किया गया, जबकि 366 एजेंट की आईडी और 6751 निजी आईडी को ब्लॉक किया गया।
मुख्य जनसंपर्क अधिकारी शिवम कुमार ने बताया कि एक मार्च 2022 में रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) ने दलालों की गतिविधियों के खिलाफ क्षेत्रीय इकाइयों ने क्षेत्र, डिजिटल माध्यम से जानकारी इकट्ठा की। इसमें 1459 टिकट दलालों को गिरफ्तार किया गया, जिनमें से 341 अधिकृत आईआरसीटीसी एजेंट थे, लेकिन वे रेलवे टिकटों की दलाली में भी शामिल थे।
इन एजेंटों को ब्लैकलिस्ट करने और 366 एजेंटों की आईडी और 6751 व्यक्तिगत आईडी को ब्लॉक करने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। इन दलालों द्वारा अवैध रूप से खरीदे गए 65 लाख रुपये से अधिक मूल्य की भविष्य की यात्रा के रेलवे टिकटों को बरामद कर रद्द कर दिया गया है।
कबाड़ बेचकर की 26.9 करोड़ रुपये की कमाई
आगरा मंडल द्वारा वित्तीय वर्ष 2021-2022 में ई -ऑक्शन के माध्यम से लगभग 6500 मीट्रिक टन स्क्रैप बेचा गया। इससे 26.9 करोड़ रुपए का राजस्व प्राप्त हुआ है, जो पिछले वित्तीय वर्ष में की गई 18.98 करोड़ की बिक्री से 29 फीसदी अधिक है।
सीनियर डीसीएम अमन वर्मा ने बताया कि रेल स्लीपर, वैगन, कोच, लोको, कास्ट लोहा स्लीपर आदि विविध स्क्रैप सामग्री की बिक्री ई-ऑक्शन के माध्यम से की जाती है, जिसे उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश, राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली, वेस्ट बंगाल आदि के व्यापारी खरीदते हैं। पहले आगरा मंडल का स्क्रैप बिक्री के लिए झांसी जाता था, परंतु अब सारा स्क्रैप आगरा मंडल में ही बिक्री किया जाता है।
इसी तरह 2021-22 में उत्तर मध्य रेलवे आगरा द्वारा पार्सल और लगेज लदान से उल्लेखनीय अर्जन किया गया है। वर्ष 2020-21 में, पार्सल ट्रैफिक 16.4 मीट्रिक टन था, जबकि 2021-22 में यह बढ़कर 28.8 मीट्रिक टन हो गया। इसमें से अनुमानित राजस्व पिछले वर्ष के रुपए 5.5 करोड़ की तुलना में इस वर्ष लगभग रुपए 10 करोड़ रहने की संभावना है। अगरा मंडल से पार्सल यातायात के माध्यम से आगरा के कारोबारी कलकत्ता, मुंबई, आदि शहरों तक अपना माल पहुंचाते हैं, जिसमें आगरा से जूता, मथुरा से पूजा सामग्री और धोलपुर से दुग्ध उत्पाद प्रमुख हैं।