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शुरू हुई पेड़ घोटाले की पड़ताल

Fri, 31 Jul 2015 01:12 AM IST
ब्यूरो अमर उजाला, आगरा
ब्यूरो अमर उजाला, आगरा Updated Fri, 31 Jul 2015 01:12 AM IST
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investigation start on tree scam
ताजमहल की 500 मीटर की परिधि (ताज नेचर वाक) और बाबरपुर वन क्षेत्र में काटे गए करीब 12000 पेड़ और उनकी अवैध रूप से बिक्री के मामले की जांच शुरू हो गई है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने मामले की जांच की जिम्मेदारी पर्यावरणविद् एमसी मेहता को सौंपी है। उन्होंने गुरुवार को बाबरपुर वन क्षेत्र और ताज नेचर वाक का निरीक्षण किया। पेड़ कटान से संबंधित दस्तावेज खंगाले और वन विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक कर साक्ष्य जुटाए। मेहता जल्द ही अपनी रिपोर्ट एनजीटी के समक्ष प्रस्तुत करेंगे।
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गौरतलब है कि मुख्य वन संरक्षक आगरा क्षेत्र एके जैन ने शासन को भेजी रिपोर्ट में आरोप लगाया था कि आगरा में तैनात रहे डीएफओ एनके जानू ने अपने कार्यकाल के दौरान बाबरपुर वन क्षेत्र में करीब 8000 पेड़ और ताजमहल की 500 मीटर की परिधि में 4000 पेड़ों को अवैध रूप से कटवाकर बेच दिए थे। मामला अखबारों की सुर्खियां बना तो एनजीटी ने स्वत: संज्ञान लेते हुए इस मामले की जांच कराने का निर्णय लिया।
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एनजीटी के निर्देश पर गुरुवार को पर्यावरणविद् एमसी मेहता अपनी टीम के साथ जांच करने आगरा आए। उन्होंने सबसे पहले बाबरपुर वन क्षेत्र देखा। जिस स्थान (आनंद वन) से पेड़ काटने की बात कही जा रही हैं, वहां का निरीक्षण किया। वहां बनाई जा रही इमारतों को देखा और फोटोग्राफी कराई। यहां से वे कैलाश मंदिर भी गए और रामलाल वृद्धाश्रम का भी निरीक्षण किया। यहां निरीक्षण के बाद उनका काफिला सीधा ताज नेचर वाक पहुंचा।
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यहां भी उस स्थान को देखा गया जहां से 4000 पेड़ों को काटने की रिपोर्ट दी गई है। निरीक्षण के बाद उन्होंने वन विभाग के गेस्ट हाउस में अधिकारियों के साथ वार्ता की। सूत्रों का कहना है कि उन्होंने दस्तावेज भी खंगाले हैं। जानकारी होने पर मीडियाकर्मी भी पहुंच गए थे, लेकिन एमसी मेहता ने जांच के संबंध में कुछ कहने से इनकार दिया। उनका कहना था कि वे अपनी रिपोर्ट कोर्ट में प्रस्तुत करने से पहले इस मुद्दे पर कुछ नहीं कहेंगे। सूत्रों का कहना है कि वे जल्द ही अगली विजिट कर सकते हैं। निरीक्षण के दौरान वन विभाग के अधिकारी भी मौजूद रहे।   
आश्रम तो बना दिया पर वृद्धों को बचाएगा कौन
कैलाश मंदिर और गांव के निरीक्षण के दौरान एमसी मेहता ने रामलाल वृद्धाश्रम का दौरा किया। आश्रम के बराबर से बह रही यमुना नदी को देख कर वे हैरत में पड़ गए। उन्होंने कहा कि यह तो डूब क्षेत्र में है। यहां आश्रम बन कैसे गया। इस पर एसीएम एमपी सिंह ने प्रशासन का बचाव करने की कोशिश करते हुए कहा कि अपने सताए हुए वृद्धों को आसरा देने के लिए जनहित में इस आश्रम की स्थापना की गई है। यहां करीब 50-60 वृद्ध सुकून के पल बिता रहे हैं। इस पर एमसी मेहता ने कहा कि आश्रम तो बना दिया है लेकिन जब कभी बाढ़ आई तो वृद्धों को बचाएगा कौन? इस पर अधिकारियों के पास कोई जवाब नहीं था। उन्होंने साईं धाम को भी देखा।
पूर्वी गेट के दुकानदारों ने सौंपा ज्ञापन
ताजमहल के पूर्वी गेट के दुकानदारों का एक प्रतिनिधिमंडल भी एमसी मेहता से मिला। दुकानदारों का कहना था कि बैटरी वाहन ताजमहल के पूर्वी गेट तक आते हैं। इसका काफी समय से विरोध हो रहा है। वाहनों के गेट तक आना ताजमहल की सुरक्षा के लिए खतरा भी बन सकता है लेकिन स्थानीय प्रशासन इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है।

मानीटरिंग कमेटी के सदस्य रमन भी मिले
सुप्रीम कोर्ट मानीटरिंग कमेटी के सदस्य रमन भी एमसी मेहता से मिलने पहुंचे। रमन ने फोन पर बताया कि पेड़ काटने के संबंध में उनसे कोई बात नहीं हुई। उन्होंने एमसी मेहता से केवल इतना ही कहा कि जांच में जो भी दोषी पाया जाए उसके खिलाफ कार्रवाई हो लेकिन जो अच्छे काम हुए हैं उन्हें भी नजरंदाज न किया जाए।
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