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तालाब की जमीन को पाटकर खोल लिए शराब के ठेके, डीएम के आदेश के बाद भी नहीं हटा अतिक्रमण
Thu, 22 Oct 2020 12:22 PM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Thu, 22 Oct 2020 12:22 PM IST
सार
मौजा भोगीपुरा में राजस्व रिकॉर्ड में 367 वर्ग मीटर क्षेत्रफल में पुरानी पोखर है। खसरा-खतौनी में वक्फ बोर्ड भूमि पर पोखर दर्ज है। बुधवार को अमर उजाला टीम यहां पहुंची तो मौके पर आठ पक्की दुकानों का निर्माण मिला। दो दुकानों में शराब की मॉडल शॉप खुली है।
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तालाब की जमीन पर बनी शराब की दुकान
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
भोगीपुरा में तालाब को पाटकर पक्की दुकानें बनाई गईं और शराब के दो ठेके भी खोल लिए गए। डीएम के आदेश के बावजूद इन्हें हटाया नहीं गया। आसपास के लोग सात साल से तहसील से लेकर कलक्ट्रेट और एडीए से लेकर नगर निगम तक चक्कर काट रहे हैं।
मौजा भोगीपुरा में राजस्व रिकॉर्ड में 367 वर्ग मीटर क्षेत्रफल में पुरानी पोखर है। खसरा-खतौनी में वक्फ बोर्ड भूमि पर पोखर दर्ज है। बुधवार को अमर उजाला टीम यहां पहुंची तो मौके पर आठ पक्की दुकानों का निर्माण मिला। दो दुकानों में शराब की मॉडल शॉप खुली है।
ये भी पढ़ें- तालाबों की जांच में चौंकाने वाले खुलासे, पार्क बनाया, खुल गई पौधशाला
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क्षेत्रीय निवासी परशुराम शर्मा ने बताया कि पोखर में पूरे इलाके की नालियों का और बरसात में पानी इकठ्ठा होता था। 2013 में जब यहां अतिक्रमण व अवैध निर्माण हो रहे थे तब मैंने तत्कालीन डीएम जुहेर बिन सगीर से शिकायत की थी। उन्होंने नगर आयुक्त को पोखर से अवैध कब्जे हटाने के आदेश किए थे। इसके बाद भी अफसर नगर निगम, कलक्ट्रेट, तहसील और एडीए में चक्कर लगवाते रहे, लेकिन अतिक्रमण ध्वस्त नहीं किए। उन्होंने क्षेत्रीय लेखपाल व अधिकारियों पर कब्जा नहीं हटाने के नाम पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए।
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मौजा भोगीपुरा में राजस्व रिकॉर्ड में 367 वर्ग मीटर क्षेत्रफल में पुरानी पोखर है। खसरा-खतौनी में वक्फ बोर्ड भूमि पर पोखर दर्ज है। बुधवार को अमर उजाला टीम यहां पहुंची तो मौके पर आठ पक्की दुकानों का निर्माण मिला। दो दुकानों में शराब की मॉडल शॉप खुली है।
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क्षेत्रीय निवासी परशुराम शर्मा ने बताया कि पोखर में पूरे इलाके की नालियों का और बरसात में पानी इकठ्ठा होता था। 2013 में जब यहां अतिक्रमण व अवैध निर्माण हो रहे थे तब मैंने तत्कालीन डीएम जुहेर बिन सगीर से शिकायत की थी। उन्होंने नगर आयुक्त को पोखर से अवैध कब्जे हटाने के आदेश किए थे। इसके बाद भी अफसर नगर निगम, कलक्ट्रेट, तहसील और एडीए में चक्कर लगवाते रहे, लेकिन अतिक्रमण ध्वस्त नहीं किए। उन्होंने क्षेत्रीय लेखपाल व अधिकारियों पर कब्जा नहीं हटाने के नाम पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए।
भूमाफिया कर रहे हैं कब्जे
वक्फ मीर नियाज अली के मुतवल्ली सैयद जफर रिजवी का कहना है कि तालाब की जमीनों पर भूमाफिया कब्जे कर रहे हैं। उच्च न्यायालय के आदेश हैं कि तालाबों पर कब्जे न होने दिए जाएं, लेकिन अधिकारी इसका पालन नहीं करा रहे। उन्होंने कहा कि वक्फ की जमीन पर पोखर को पुराने स्वरूप में लाने के लिए जो हमें करना पड़े वो करेंगे।
नगर आयुक्त से मांगेंगे रिपोर्ट
नगर आयुक्त से इस मामले में रिपोर्ट मांगी जाएगी। आवेदक उनसे जाकर मिलें। पोखर व तालाबों से कब्जे हटेंगे, यह उच्च न्यायालय का आदेश है। नगर क्षेत्र में तालाबों पर कार्रवाई होगी।-प्रभु एन सिंह, जिलाधिकारी
तालाबों से अतिक्रमण नहीं हटे तो निलंबन की कार्रवाई: एसडीएम
ज्वाइंट मजिस्ट्रेट व एसडीएम सदर तहसील एम अरुण्मौली ने मंगलवार को लेखपालों को बुलाकर 38 तालाबों की सूची सौंपते हुए अतिक्रमण हटाने के आदेश दिए थे। 24 घंटे में ही आदेश बेअसर हो गए। बुधवार को कोई लेखपाल चिह्नित तालाबों पर कार्रवाई के लिए नहीं पहुंचा। सूची रख कर घर बैठ गए। एसडीएम ने कहा कि जो लेखपाल तालाबों से अतिक्रमण हटाने में लापरवाही बरतेंगे उन्हें निलंबित किया जाएगा। इसके लिए वह स्वयं दोषी होंगे।
वक्फ मीर नियाज अली के मुतवल्ली सैयद जफर रिजवी का कहना है कि तालाब की जमीनों पर भूमाफिया कब्जे कर रहे हैं। उच्च न्यायालय के आदेश हैं कि तालाबों पर कब्जे न होने दिए जाएं, लेकिन अधिकारी इसका पालन नहीं करा रहे। उन्होंने कहा कि वक्फ की जमीन पर पोखर को पुराने स्वरूप में लाने के लिए जो हमें करना पड़े वो करेंगे।
नगर आयुक्त से मांगेंगे रिपोर्ट
नगर आयुक्त से इस मामले में रिपोर्ट मांगी जाएगी। आवेदक उनसे जाकर मिलें। पोखर व तालाबों से कब्जे हटेंगे, यह उच्च न्यायालय का आदेश है। नगर क्षेत्र में तालाबों पर कार्रवाई होगी।-प्रभु एन सिंह, जिलाधिकारी
तालाबों से अतिक्रमण नहीं हटे तो निलंबन की कार्रवाई: एसडीएम
ज्वाइंट मजिस्ट्रेट व एसडीएम सदर तहसील एम अरुण्मौली ने मंगलवार को लेखपालों को बुलाकर 38 तालाबों की सूची सौंपते हुए अतिक्रमण हटाने के आदेश दिए थे। 24 घंटे में ही आदेश बेअसर हो गए। बुधवार को कोई लेखपाल चिह्नित तालाबों पर कार्रवाई के लिए नहीं पहुंचा। सूची रख कर घर बैठ गए। एसडीएम ने कहा कि जो लेखपाल तालाबों से अतिक्रमण हटाने में लापरवाही बरतेंगे उन्हें निलंबित किया जाएगा। इसके लिए वह स्वयं दोषी होंगे।