फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Agra News ›   Interlocotry application has been filed in the Supreme Court for planting plants around Taj Mahal

ताजमहल के आसपास पौधा लगाने के लिए सुप्रीम कोर्ट से क्यों मांगनी पड़ी इजाजत?

Mon, 27 Aug 2018 04:03 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा Updated Mon, 27 Aug 2018 04:03 PM IST
विज्ञापन
Interlocotry application has been filed in the Supreme Court for planting plants around Taj Mahal
ताजमहल
आगरा के ताज ट्रिपेजियम जोन (टीटीजेड) में पर्यावरण संरक्षण के लिए हरियाली विकसित करने की कवायद सिर्फ कागजों में ही सिमट कर रह गई है। इसके उलट धरातल पर प्रदूषण नियंत्रण के लिए पूरा जोर उद्योगों पर लगाया जा रहा है। जबकि टीटीजेड में हरियाली कम है।
विज्ञापन


विजन डॉक्यूमेंट में भी उद्योगों को शिफ्ट करने की सिफारिश की गई है। इसको लेकर हाल ही में आगरा डेवलेपमेंट फाउंडेशन (एडीएफ) के सचिव केसी जैन ने सुप्रीम कोर्ट में एक आईए (इंटरलोकोटरी एप्लीकेशन) दाखिल की है। इसमें एग्रो फॉरेस्ट्री की अनुमति मांगी है। ताकि लोग अपनी निजी जमीन पर भी पेड़ उगा सकें।
विज्ञापन


दरअसल सुप्रीम कोर्ट ने पेड़ काटने पर प्रतिबंध लगा रखा है। इसलिए अधिकांश लोग अपनी निजी जमीन पर पौधरोपण नहीं करते। उन्हें लगता है कि जब पेड़ बड़े जाएंगे तो जरूरत पड़ने पर इन्हें काट भी नहीं सकते। एग्रो फॉरेस्ट्री में लोग व्यवसाय के रूप में भी पेड़ लगा सकते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

Interlocotry application has been filed in the Supreme Court for planting plants around Taj Mahal
ताजमहल - फोटो : अमर उजाला
वर्तमान में टीटीजेड में वन क्षेत्र की स्थिति काफी खराब है। आगरा में भी सिर्फ साढ़े छह प्रतिशत के आसपास वन क्षेत्र है। हालांकि टीटीजेड के छह जिलों में से सबसे अधिक स्थिति आगरा की है लेकिन यह भी संतोषजनक नहीं है। फिरोजाबाद, हाथरस और मथुरा में तो वन क्षेत्र की स्थिति काफी कम है।

हाथरस और मथुरा की स्थिति टीटीजेड में सबसे खराब है। वर्ष 2017 की रिपोर्ट के अनुसार, मथुरा में सिर्फ 1.25 प्रतिशत और हाथरस में 1.8 प्रतिशत ही वन क्षेत्र है। टीटीजेड में दूसरे नंबर पर भरतपुर में हरियाली की स्थिति ठीकठाक है। हालांकि मानक के अनुरूप तो यहां भी काफी कम वन क्षेत्र है।

आईए याचिकाकर्ता के अनुसार, सरकारें प्रदूषण नियंत्रण के लिए पूरा जोर उद्योगों पर ही लगा रही हैं लेकिन हरियाली विकसित करने की ओर किसी का ध्यान नहीं है।

क्या है एग्रो फॉरेस्ट्री
इसके तहत कोई भी व्यक्ति अपनी जमीन पर पौधे रोप सकता है। बड़े होने पर जब वह पेड़ बन जाएं तो उन्हें बिना किसी की अनुमति के काट भी सकता है। इसका व्यवसायिक उपयोग भी किया जा सकता है। ऐसे में लोग व्यवसाय के रूप में पौधरोपण कर सकेंगे, इससे हरियाली को बढ़ावा मिलेगा।

Interlocotry application has been filed in the Supreme Court for planting plants around Taj Mahal
ताजमहल - फोटो : अमर उजाला
क्यों पड़ रही एग्रो फॉरेस्ट्री की जरूरत

सुप्रीम कोर्ट ने पेड़ काटने पर प्रतिबंध लगा रखा है। इसलिए अधिकांश लोग अपनी निजी जमीन पर पौधरोपण नहीं करते। उन्हें लगता है कि जब पेड़ बड़े जाएंगे तो जरूरत पड़ने पर इन्हें काट भी नहीं सकते। एग्रो फॉरेस्ट्री में लोग व्यवसाय के रूप में भी पेड़ लगा सकते हैं।

टीटीजेड में वन क्षेत्र की स्थिति (प्रतिशत में)

जिला      2001    2003    2005    2007    2009    2017
आगरा      6.38    2.2       6.78    6.86    6.86    6.73
एटा           2.2    2           2       2.23    2.23    1.28
फिरोजाबाद 1.82  1.86       1.86   1.99    1.99    2.04    
हाथरस     1.63    1.36     1.36     1.25   1.25     1.8
मथुरा       1.59    1.83     1.83      1.8    1.8      1.25
भरतपुर     4.92    4.66     4.66     4.6     4.7      4.52


हमारा उद्देश्य ताजमहल के साथ-साथ यहां के उद्योगों को भी बचाना है। उद्योगों पर आए दिन नये आदेश थोपे जा रहे हैं लेकिन हरियाली विकसित करने की ओर किसी का ध्यान नहीं है। इसलिए हमने सुप्रीम कोर्ट में आईए डाली है, जिसमें हमने एग्रो फॉरेस्ट्री के लिए अनुमति मांगी है।
केसी जैन, याचिकाकर्ता
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed