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लॉकडाउन से पांच साल में सबसे शुद्ध हुई ताजनगरी की हवा, स्वच्छ वातावरण में सांस ले रहे लोग
Thu, 26 Mar 2020 03:12 PM IST
मुकेश कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: मुकेश कुमार
Updated Thu, 26 Mar 2020 03:12 PM IST
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ताजमहल
- फोटो : Amar Ujala
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बार-बार बारिश और अब कोरोना वायरस के कारण लॉकडाउन ने आगरा की हवा की गुणवत्ता पिछले पांच साल में सबसे अच्छी कर दी है। पूरे मार्च महीने में ताजनगरी के लोग सबसे स्वच्छ हवा में सांस ले रहे हैं।
फैक्टरी, वाहन बंद होने और वायु प्रदूषण के अन्य कारणों के बंद होने के कारण एयर क्वालिटी मानक से बेहतर हो गई है। 2016 से 2020 के बीच मार्च माह में इसी साल 25 मार्च को सबसे कम वायु गुणवत्ता सूचकांक 60 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर पर रहा, जो सबसे बेहतर स्थिति है।
बुधवार को अति सूक्ष्म कणों (पीएम 2.5), कार्बन मोनोऑक्साइड, नाइट्रोजन डाइ-ऑक्साइड, सल्फर डाइ-ऑक्साइड और ओजोन की अधिकतम मात्रा में गिरावट आई। एयर क्वालिटी इंडेक्स महज 60 रहा, जो बेहद कम है।
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फैक्टरी, वाहन बंद होने और वायु प्रदूषण के अन्य कारणों के बंद होने के कारण एयर क्वालिटी मानक से बेहतर हो गई है। 2016 से 2020 के बीच मार्च माह में इसी साल 25 मार्च को सबसे कम वायु गुणवत्ता सूचकांक 60 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर पर रहा, जो सबसे बेहतर स्थिति है।
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बुधवार को अति सूक्ष्म कणों (पीएम 2.5), कार्बन मोनोऑक्साइड, नाइट्रोजन डाइ-ऑक्साइड, सल्फर डाइ-ऑक्साइड और ओजोन की अधिकतम मात्रा में गिरावट आई। एयर क्वालिटी इंडेक्स महज 60 रहा, जो बेहद कम है।
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हवा की गुणवत्ता में सुधार
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) की रिपोर्ट में आगरा में पूरे मार्च महीने में 14 दिन हवा की गुणवत्ता अच्छी रही, जबकि 11 दिन ये औसत रही। इस पूरे महीने ही धूल के कण और कार्बन मोनोऑक्साइड की मात्रा कम रही।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के प्रभारी अधिकारी कमल कुमार के मुताबिक लॉकडाउन और बारिश के कारण इस महीने की हवा सुधरी है। आगरा में धूल कण ही ज्यादा हैं जो बारिश होने से दब गए। वाहन न चलने, निर्माण न होने से दबे हुए है।
उतर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी भुवन प्रकाश यादव के मुताबिक इस पूरे महीने बारिश कई बार हुई है और वाहन भी कम चले हैं। होली पर और उसके बाद लॉक डाउन तथा जनता कर्फ्यू के कारण कोई भी बाहर सड़कों पर नहीं है। इस स्थिति में प्रदूषण स्तर में कमी दर्ज की गई है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के प्रभारी अधिकारी कमल कुमार के मुताबिक लॉकडाउन और बारिश के कारण इस महीने की हवा सुधरी है। आगरा में धूल कण ही ज्यादा हैं जो बारिश होने से दब गए। वाहन न चलने, निर्माण न होने से दबे हुए है।
उतर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी भुवन प्रकाश यादव के मुताबिक इस पूरे महीने बारिश कई बार हुई है और वाहन भी कम चले हैं। होली पर और उसके बाद लॉक डाउन तथा जनता कर्फ्यू के कारण कोई भी बाहर सड़कों पर नहीं है। इस स्थिति में प्रदूषण स्तर में कमी दर्ज की गई है।
एयर क्वालिटी इंडेक्स
25 मार्च 2016 120
25 मार्च 2017 137
25 मार्च 2018 150
25 मार्च 2019 151
25 मार्च 2020 60
सबसे खराब रहा मार्च, 2018
एयर क्वालिटी इंडेक्स के लिहाज से मार्च, 2018 सबसे खराब रहा, जब केवल एक दिन 5 मार्च को एक्यूआई लेबल 96 पर रहा। तब 10 दिन हवा बेहद खराब और 20 दिन औसत स्तर पर रही थी। इससे पहले 2017 में 6 दिन तक बेहद खराब यानी 300 के पार एक्यूआई पहुंच गया था।
2016 में भी 7 दिनों तक आगरा की हवा बेहद खराब और 3 दिन खराब के स्तर पर रही थी। वर्ष 2019 के मार्च महीने में आगरा के लोगों को केवल 3 दिन ही अच्छी हवा नसीब हो पाई थी, जबकि इस बार मार्च के महीने में इन 25 दिनों में 14 दिन आगरा की हवा बेहतर रही है।
25 मार्च 2017 137
25 मार्च 2018 150
25 मार्च 2019 151
25 मार्च 2020 60
सबसे खराब रहा मार्च, 2018
एयर क्वालिटी इंडेक्स के लिहाज से मार्च, 2018 सबसे खराब रहा, जब केवल एक दिन 5 मार्च को एक्यूआई लेबल 96 पर रहा। तब 10 दिन हवा बेहद खराब और 20 दिन औसत स्तर पर रही थी। इससे पहले 2017 में 6 दिन तक बेहद खराब यानी 300 के पार एक्यूआई पहुंच गया था।
2016 में भी 7 दिनों तक आगरा की हवा बेहद खराब और 3 दिन खराब के स्तर पर रही थी। वर्ष 2019 के मार्च महीने में आगरा के लोगों को केवल 3 दिन ही अच्छी हवा नसीब हो पाई थी, जबकि इस बार मार्च के महीने में इन 25 दिनों में 14 दिन आगरा की हवा बेहतर रही है।