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दमघोंटू मॉकड्रिल की 40 पेजों में जांच रिपोर्ट तैयार कर रही आईएमए
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आगरा। श्रीपारस हॉस्पिटल में दमघोंटू मॉकड्रिल की जांच कर रही आईएमए की समिति की रिपोर्ट करीब 40 पेजों में तैयार हो रही है। इसमें 91 मरीज और उनके परिजनों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं। मृत्यु प्रमाणपत्र संलग्न करते हुए मृतकों के नाम भी लिखे हैं।
जांच रिपोर्ट में ऑक्सीजन की भारी कमी बताई गई है। खासतौर से 25 और 27 अप्रैल को अस्पताल में ऑक्सीजन की मारामामरी के बीच खुद तीमारदारों को सिलिंडर लेकर आने पड़े थे। अस्पताल में 10 मौत बताई हैं, जिनके मृत्यु प्रमाण पत्र लगाए हैं। इन सभी की रिपोर्ट बनाई जा रही है। अभी 23 पेज लिखकर तैयार हो गए हैं। मंगलवार को भी जांच समिति की बैठक नहीं हुई है, बुधवार को बैठक होगी, जिसमें अब तक लिख चुकी रिपोर्ट पर चर्चा होगी।
- 26 अप्रैल को अस्पताल में 10 मौत सामने आई हैं। जांच पारदर्शिता से की जा रही है, इसी के कारण अगर किसी और मरीज की इस दिन अस्पताल में मौत हुई तो फोन नंबर भी जारी किया है, जिस पर वह संपर्क कर जानकारी दे सकता है।
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डॉ. मुनीश्वर गुप्ता, वरिष्ठ सदस्य जांच समिति
- आईएमए की समिति सभी पहलुओं पर जांच करने के बाद रिपोर्ट तैयार कर रही है। इसमें मरीजों के बयान और साक्ष्य भी हैं। जांच रिपोर्ट तैयार होने के बाद इसे सार्वजनिक किया जाएगा।
डॉ. अनूप दीक्षित, सचिव, आईएमए
ऑक्सीजन होती तो बच जाती मां की जान: दीपांशु राजपूत
- छिबरामऊ के दीपांशु राजपूत ने आईएमए की जांच समित के साथ अमर उजाला से भी अपना दर्द बयां किया। उन्होंने बताया कि मेरी मां मीरा देवी (41) को 14 अप्रैल को श्रीपारस हॉस्पिटल में भर्ती कराया था। जांच में कोरोना की रिपोर्ट निगेटिव आई, लेकिन डॉक्टर ने निमोनिया बताया। 25 अप्रैल को ही ऑक्सीजन की कमी बताई। 26 की सुबह कहा कि ऑक्सीजन नहीं है, अपना इंतजाम कर लो या फिर अपने मरीज को लेकर जाओ। काफी मशक्कत करने पर भी ऑक्सीजन की व्यवस्था नहीं हुई और रात को दस बजे मां को निकाल दिया। घर लाने के बाद 27 की सुबह मां की मौत हो गई। अगर ऑक्सीजन होती तो मेरी मां की भी जान बच जाती। मेरे पिताजी सत्यप्रकाश राजपूत भी यहीं अस्पताल में भर्ती थे, जो ठीक होने के बाद 23 अप्रैल को डिस्चार्ज हो गए थे।
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जांच रिपोर्ट में ऑक्सीजन की भारी कमी बताई गई है। खासतौर से 25 और 27 अप्रैल को अस्पताल में ऑक्सीजन की मारामामरी के बीच खुद तीमारदारों को सिलिंडर लेकर आने पड़े थे। अस्पताल में 10 मौत बताई हैं, जिनके मृत्यु प्रमाण पत्र लगाए हैं। इन सभी की रिपोर्ट बनाई जा रही है। अभी 23 पेज लिखकर तैयार हो गए हैं। मंगलवार को भी जांच समिति की बैठक नहीं हुई है, बुधवार को बैठक होगी, जिसमें अब तक लिख चुकी रिपोर्ट पर चर्चा होगी।
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- 26 अप्रैल को अस्पताल में 10 मौत सामने आई हैं। जांच पारदर्शिता से की जा रही है, इसी के कारण अगर किसी और मरीज की इस दिन अस्पताल में मौत हुई तो फोन नंबर भी जारी किया है, जिस पर वह संपर्क कर जानकारी दे सकता है।
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डॉ. मुनीश्वर गुप्ता, वरिष्ठ सदस्य जांच समिति
- आईएमए की समिति सभी पहलुओं पर जांच करने के बाद रिपोर्ट तैयार कर रही है। इसमें मरीजों के बयान और साक्ष्य भी हैं। जांच रिपोर्ट तैयार होने के बाद इसे सार्वजनिक किया जाएगा।
डॉ. अनूप दीक्षित, सचिव, आईएमए
ऑक्सीजन होती तो बच जाती मां की जान: दीपांशु राजपूत
- छिबरामऊ के दीपांशु राजपूत ने आईएमए की जांच समित के साथ अमर उजाला से भी अपना दर्द बयां किया। उन्होंने बताया कि मेरी मां मीरा देवी (41) को 14 अप्रैल को श्रीपारस हॉस्पिटल में भर्ती कराया था। जांच में कोरोना की रिपोर्ट निगेटिव आई, लेकिन डॉक्टर ने निमोनिया बताया। 25 अप्रैल को ही ऑक्सीजन की कमी बताई। 26 की सुबह कहा कि ऑक्सीजन नहीं है, अपना इंतजाम कर लो या फिर अपने मरीज को लेकर जाओ। काफी मशक्कत करने पर भी ऑक्सीजन की व्यवस्था नहीं हुई और रात को दस बजे मां को निकाल दिया। घर लाने के बाद 27 की सुबह मां की मौत हो गई। अगर ऑक्सीजन होती तो मेरी मां की भी जान बच जाती। मेरे पिताजी सत्यप्रकाश राजपूत भी यहीं अस्पताल में भर्ती थे, जो ठीक होने के बाद 23 अप्रैल को डिस्चार्ज हो गए थे।