चुनावी इतिहास: आगरा में महज 47 वोटों से हारे थे हुकुम सिंह, रिपब्लिकन पार्टी के प्रत्याशी ने दर्ज की थी जीत
आगरा जिले में सबसे कम वोटों से बनवारी लाल जीतकर विधानसभा पहुंचे थे। उनकी तरह ही शहर में 10 ऐसे विधायक रहे हैं जो 500 वोटों के अंतर से चुनाव जीते और विधायक बने।
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महज 47 वोट कम मिले और विधायक बनने का सपना टूट गया। आगरा में आजादी के बाद के तीसरे विधानसभा चुनाव (1962) में प्रजा सोशलिस्ट पार्टी के फतेहाबाद से चुनाव लड़े हुकुम सिंह का ख्वाब 47 वोटों ने तोड़ दिया। उन्हें रिपब्लिकन पार्टी के बनवारी लाल ने हराया था। जिले में सबसे कम वोटों से बनवारी लाल जीतकर विधानसभा पहुंचे। उनकी तरह ही शहर में 10 ऐसे विधायक रहे हैं जो 500 वोटों के अंतर से चुनाव जीते और विधायक बने।
चुनाव आयोग की वेबसाइट के अनुसार आजादी के बाद 70 वर्षों में 17 विधानसभा चुनाव में सबसे कम वोटों से बनवारी लाल जीते तो उनके बाद कांग्रेस के कृष्णवीर सिंह कौशल ने केवल 80 वोटों से चुनाव जीता और भाजपा के रमेशकांत लवानियां की विधायक बनने की हसरत पूरी न हो सकी। सबसे ज्यादा कांटे की टक्कर फतेहाबाद, आगरा छावनी, आगरा पूर्व और आगरा पश्चिम पर रही है। इनमें से सभी मुकाबले आमने-सामने के थे, जिनमें मामूली अंतर से ही जीत-हार हुई।
दो बार जीतने से चूके भोगीलाल मिश्रा
कांग्रेस नेता भोगीलाल मिश्रा ने 1967 और 1969 का चुनाव लड़ा, लेकिन दोनों ही चुनाव में वह बेहद मामूली अंतर से हार गए। पहली बार आगरा पश्चिम सीट से कांग्रेस के टिकट पर लड़े भोगीलाल मिश्रा को रिपब्लिकन पार्टी के मास्टर मान सिंह ने केवल 122 वोटों से हराया।
उनकी हार के पीछे जनसंघ के प्रत्याशी ए. प्रकाश रहे, जिन्होंने इस लड़ाई को त्रिकोणीय बना दिया। उन्हें 1447 वोट मिले थे। 122 वोटों की हार को भोगीलाल मिश्रा भुला न सके और दो साल बाद 1969 में हुए विधानसभा चुनाव में आगरा पश्चिम सीट से कांग्रेस के टिकट पर फिर लड़े। इस बार भारतीय क्रांति दल के हुकुम सिंह ने उन्हें 416 वोटों से हरा दिया।
भीष्म पितामह को झेलनी पड़ी 511 वोटों की हार
1969 में ही आगरा छावनी से जनसंघ नेता और भाजपा के भीष्म पितामह कहे जाने वाले राजकुमार सामा कांटे की लड़ाई में 511 वोटों से हार गए। उन्हें कांग्रेस के देवकीनंदन विभव ने हराया। कांटे की टक्कर में आगरा के 10 प्रत्याशी ऐसे हैं जो 500 वोटों के अंतर से लखनऊ में विधानसभा में बैठने के अपने ख्वाब को पूरा नहीं कर पाए हैं।
15 प्रत्याशी ऐसे रहे जो लगभग एक हजार वोटों की हार से जीतने से चूक गए। इनमें एत्मादपुर से घनश्याम प्रेमी, फतेहपुरसीकरी से चंपावती, आगरा ग्रामीण से करन सिंह काने, एत्मादपुर से रामखिलाड़ी वर्मा, खेरागढ़ से जगदीश चंद्र दीक्षित प्रमुख रूप से शामिल हैं।
1962 फतेहाबाद बनवारी लाल 10986 हुकुम सिंह 10939 47
1985 छावनी कृष्णवीर सिंह कौशल 27455 रमेशकांत लवानियां 27375 80
1967 आगरा पश्चिम मान सिंह 15566 बीएल मिश्रा 15444 122
1985 आगरा पूर्व सत्यप्रकाश विकल 24409 सतीशचंद्र गुप्ता 24264 145
1996 फतेहाबाद विजय पाल सिंह 36518 छोटेलाल वर्मा 36163 355
1967 बाह आर दास 6629 आर चरन 6222 407
1969 पश्चिम हुकुम सिंह 15209 बीएल मिश्रा 14793 416
1969 छावनी देवकीनंदन विभव 20324 राजकुमार सामा 19813 511
1962 फिरोजाबाद भगवान दास 12086 जगदीश प्रसाद 11547 539
1977 आगरा पूर्व सुरेंद्र कालरा 25472 प्रकाश नारायन गुप्ता 24916 556