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Agra News: जब कोच ही नहीं तो कैसे बनेंगे सचिन तेंदुलकर और साैरभ गांगुली
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शिवम और प्रिंस
आगरा। जिले में खेल प्रतिभाओं को निखारने के लिए कोचों की कमी है, जिसके चलते खिलाड़ी बारीकियां नहीं सीख पा रहे हैं। ऐसे में सचिन तेंदुलकर और सौरव गांगुली जैसे खिलाड़ी यहां नहीं बन पा रहे हैं।
युवाओं के सबसे लोकप्रिय खेल क्रिकेट में कोई कोच उपलब्ध नहीं है। विभाग के अनुसार, इसमें 20 खिलाड़ियों ने पंजीकरण कराया है, लेकिन कोच नहीं होने से वे निराश हैं। बरौली अहीर के शिवम और प्रिंस ने कहा कि कोच नहीं है तो कैसे सीखेंगे। हॉकी के लिए भी कोच नहीं है। शूटिंग, तलवारबाजी, लॉन टेनिस और वॉलीबॉल में भी कोई प्रशिक्षक नहीं है। इन खेलों के खिलाड़ी बिना उचित मार्गदर्शन के ही अभ्यास कर रहे हैं।
खेलो इंडिया योजना की शुरुआत भारत सरकार ने 2017-18 में खेल संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए की थी। आगरा में हालात बदतर हैं। यहां टेबल टेनिस के लिए खेलो इंडिया सेंटर के दो साल पूरे होने वाले हैं। इसके बावजूद, अभी तक कोई खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर के लिए तैयार नहीं हो सका है। विशेषज्ञ मानते हैं कि बुनियादी ढांचा और कोचिंग की कमी से योजना का लाभ खिलाड़ियों तक नहीं पहुंच पा रहा है। क्रिकेट, हॉकी, शूटिंग और वॉलीबॉल जैसे खेलों में कोच नहीं होने से खिलाड़ियों की क्षमता में निखार नहीं हो पा रहा है। इस बारे में क्षेत्रीय क्रीड़ाधिकारी संजय शर्मा से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन कॉल रिसीव नहीं हुई।
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एथलेटिक्स में सबसे ज्यादा दिलचस्पी
एकलव्य स्पोर्ट्स स्टेडियम में खिलाड़ियों की सबसे ज्यादा दिलचस्पी एथलेटिक्स में है। एथलेटिक्स में 100, बास्केटबाॅल में 34, जिम्नास्टिक में 29, कुश्ती में 15, जूडो में 28, ताइक्वांडो में 37, टेबल टेनिस में 3, बाॅक्सिंग में 26 और बैडमिंटन में 37, क्रिकेट में 20 रजिस्ट्रेशन हुए हैं।
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युवाओं के सबसे लोकप्रिय खेल क्रिकेट में कोई कोच उपलब्ध नहीं है। विभाग के अनुसार, इसमें 20 खिलाड़ियों ने पंजीकरण कराया है, लेकिन कोच नहीं होने से वे निराश हैं। बरौली अहीर के शिवम और प्रिंस ने कहा कि कोच नहीं है तो कैसे सीखेंगे। हॉकी के लिए भी कोच नहीं है। शूटिंग, तलवारबाजी, लॉन टेनिस और वॉलीबॉल में भी कोई प्रशिक्षक नहीं है। इन खेलों के खिलाड़ी बिना उचित मार्गदर्शन के ही अभ्यास कर रहे हैं।
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खेलो इंडिया योजना की शुरुआत भारत सरकार ने 2017-18 में खेल संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए की थी। आगरा में हालात बदतर हैं। यहां टेबल टेनिस के लिए खेलो इंडिया सेंटर के दो साल पूरे होने वाले हैं। इसके बावजूद, अभी तक कोई खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर के लिए तैयार नहीं हो सका है। विशेषज्ञ मानते हैं कि बुनियादी ढांचा और कोचिंग की कमी से योजना का लाभ खिलाड़ियों तक नहीं पहुंच पा रहा है। क्रिकेट, हॉकी, शूटिंग और वॉलीबॉल जैसे खेलों में कोच नहीं होने से खिलाड़ियों की क्षमता में निखार नहीं हो पा रहा है। इस बारे में क्षेत्रीय क्रीड़ाधिकारी संजय शर्मा से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन कॉल रिसीव नहीं हुई।
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एथलेटिक्स में सबसे ज्यादा दिलचस्पी
एकलव्य स्पोर्ट्स स्टेडियम में खिलाड़ियों की सबसे ज्यादा दिलचस्पी एथलेटिक्स में है। एथलेटिक्स में 100, बास्केटबाॅल में 34, जिम्नास्टिक में 29, कुश्ती में 15, जूडो में 28, ताइक्वांडो में 37, टेबल टेनिस में 3, बाॅक्सिंग में 26 और बैडमिंटन में 37, क्रिकेट में 20 रजिस्ट्रेशन हुए हैं।

शिवम और प्रिंस