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कैसे मिलेगी डिग्री, विवि से 9500 चालान गायब

Tue, 07 Jun 2016 12:19 AM IST
धर्मेंद्र त्यागी
धर्मेंद्र त्यागी Updated Tue, 07 Jun 2016 12:19 AM IST
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How will get the degree,  University missed 9500 invoices
आवेदन पत्र - फोटो : अमर उजाला ब्‍यूूराो
डा. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय से डिग्री की आस में बैठे छात्रों के सामने संकट खड़ा हो गया है। करीब 9500 चालान फार्म डिग्री सेक्शन से गायब हैं। यहां पैरवी करने आने वाले छात्रों को डिग्री सेक्शन की लॉक बुक में विवरण ही नहीं मिल रहा है। ऐसे में आवेदक दोबारा चालान जमा करने को मजबूर है। यहां डिग्री के लिए रोजाना 250-400 चालान जमा होते हैं। नियमानुसार 40 दिन के अंदर डिग्री डिस्पैच हो जानी चाहिए। लेकिन 1990 से अब तक करीब 35 हजार डिग्री बनने को बाकी हैं। इसमें से करीब 9500 के चालान ही नहीं है। दरअसल, इलाहाबाद बैंक में पिछले तीन साल के लिए 150 और पांच साल से अधिक पुरानी डिग्री के लिए 500 रुपये का चालान जमा कराया जाता है। यहां से मिले चालान फार्म को शैक्षणिक दस्तावेजों के साथ डिग्री सेक्शन में जमा करना होता है। आवेदनों को डंप कर इकट्ठा कर लिया जाता है। अधिकांश की एंट्री लॉक बुक में नहीं करते। गुम होने पर अभ्यर्थी को दोबारा आवेदन की सलाह दी जाती है। कुलसचिव केएन सिंह का कहना है कि कई बार डिग्री के आवेदन मिस हो जाते हैं, अगर जानबूझकर ऐसा कर रहा है तो इसकी जांच कराई जाएगी।   
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कचरे में पड़े आवेदन
आखिर डिग्री मिले भी कैसे, जब इसके आवेदन कचरे और रद्दी के ढेर में फेंक दिए जाते हैं। डिग्री सेक्शन के सटे हुए कबाड़ में ऐसे ही सैकड़ों चालान फार्म पड़े हुए मिले। इसमें 2010 से लेकर 2015 तक के आवेदन हैं।
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अखलाक अहमद (रोल नंबर-70927) ने 2014 में डिग्री के लिए आवेदन किया। इन्होंने जेएलएन कालेज, एटा से एमए इकॉनोमिक्स की। शुल्क जमा कर चालान डिग्री सेक्शन में जमा कराया। इनका आवेदन कचरे के ढेर में पड़ा मिला। फार्म पर दर्ज इनके फोन नंबर पर बात की तो बताया कि सेक्शन में इनका चालान नहीं मिला था, दूसरी बार आवेदन किया।
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ऋतु शर्मा (60519)ने बैकुंठी देवी कन्या महाविद्यालय से एमए और बीएड की। इन्होंने आवेदन किया, दो साल से डिग्री नहीं मिली। मजबूरन उन्होंने प्रोविजनल डिग्री बनवा ली, ऑरजीनल डिग्री अभी तक नसीब नहीं हुई। इनका चालान फार्म भी कचरे के ढेर में मिला।



अलीगढ़ के ललित कुमार विश्वविद्यालय में डिग्री लेने आए थे, उन्होंने बीएड डिग्री के लिए 2012 में आवेदन किया था। उन्होंने बताया कि दिल्ली में ट्रेंड ग्रेजुएशन टीचर (टीजीटी)में चयन हो गया है। डिग्री की जरूरत है। लेकिन यहां कोई सुनवाई करने को तैयार नहीं। जॉब हाथ से जाती दिख रही है।
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