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मनोकामना पूर्ति के लिए इस मुहूर्त में करें होलिका दहन, पूजन का ये समय रहेगा श्रेष्ठ

Tue, 27 Feb 2018 09:43 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला आगरा Updated Tue, 27 Feb 2018 09:43 AM IST
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holi pujan muhurt 2018
होलिका दहन
रंग और उल्लास का पर्व होली फाल्गुन मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। होली पर प्रकृति में मादकता का एहसास होता है और रंगों का उल्लास पर्व को खास बना देता है। त्योहार पर लोग आपसी भेदभाव को भुलाकर प्रेम और सद्भाव के साथ एक- दूसरे के प्र्रति प्रेम भाव का प्रदर्शन करते हैं।
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होलिका दहन एक मार्च की शाम को होगा। होली का त्योहार भी इससे अछूता नहीं है। प्रकृति पूरे शबाब पर होती है और खेतों में फसल लहलहाने लगती है। इसलिए होलिका में चने (होला) जौ और गेहूं की बालियां भूनकर उन्हें प्रसाद स्वरूप ग्रहण करने की परंपरा है। एक- दूसरे दाने देकर उनके परिवार में धन धान्य की बढ़ोत्तरी की कामना की जाती है। 
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दो मार्च को रंग खेलने की परंपरा को मनाया जाएगा। इस दिन लोग एक- दूसरे को रंग और गुलाल लगाकर उन्हें होली की शुभकामनाएं देंगे और बड़ों से आशीर्वाद प्राप्त करेंगे। 
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तीन मार्च को भैया दूज का पर्व मनाया जाएगा। इस दिन बहनें अपने भाइयों का टीका कर उनके मंगल की कामना करेंगी। दरअसल भारतीय त्योहार प्रकृति के प्रति प्रेम और आदर की भावना को जगाते हैं।

होली की कथा

holi pujan muhurt 2018
प्रहलाद कथा - फोटो : अमर उजाला
शास्त्रों के अनुसार होलिका दहन की परंपरा भक्त और भगवान के संबंध का अनोखा एहसास है। कथानक के अनुसार भारत में असुरराज हिरण्यकश्यप राज करता था। उनका पुत्र प्रहलाद भगवान विष्णु का अनन्य भक्त था, लेकिन हिरण्यकश्यप विष्णु द्रोही था। 

हिरण्यकश्यप ने पृथ्वी पर घोषणा कर दी थी कि कोई देवताओं की पूजा नहीं करेगा। केवल उसी की पूजा होगी, लेकिन भक्त प्रहलाद ने पिता की आज्ञा पालन नहीं किया और भगवान की भक्ति लीन में रहा। 

हिरण्यकश्यप ने पुत्र प्रहलाद की हत्या कराने की कई बार कोशिश की, लेकिन वह सफल नहीं हो पाया तो उसने योजना बनाई। इस योजना के तहत उसने बहन होलिका की सहायता ली। होलिका को वरदान मिला था, वह अग्नि से जलेगी नहीं। 

योजना के तहत होलिका प्रहलाद को गोद में लेकर अग्नि में बैठ गई, लेकिन भगवान ने भक्त प्रहलाद की सहायता की। इस आग में होलिका तो जल गई और भक्त प्रहलाद सही सलामत आग से बाहर आ गए। तब से होलिका दहन की परंपरा है। होलिका में सभी द्वेष भाव और पापों को जलाने का संदेश दिया जाता है।

होली का मुहूर्त

फाल्गुन शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा के दिन प्रदोष काल में होलिका दहन की परंपरा है। ज्योतिषाचार्य डॉ. हरिकृष्ण पाराशर के मुताबिक होलिका दहन में भद्रा वर्जित है। पड़वा और चौदस को भी होलिका दहन नहीं किया जा सकता है। 

एक मार्च 2018 को पूर्णिमा निशामुखी है। अत: रात्रि आठ से लेकर 9.21 बजे तक शुद्ध प्रदोष काल और कन्या लग्न में होलिका दहन समग्र राष्ट्र के लिए शुभकारी होगा। पूर्णिमा तिथि का क्षय राष्ट्र शत्रुओं के पराभव का कारण बनेगा। 

होलिका पूजन का समय दोपहर 12 से तीन बजे तक और शाम 4.30 से छह बजे तक शुभ होगा। शुक्रवार को रंग और शनिवार को भैया दूज का त्योहार मनाया जाएगा। 
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