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यमुना में तैराकीः मुगलकालीन नौचंदी मेले का शुभारंभ, दस फुट ऊंचे झंडे लेकर कूदे युवा
Fri, 06 Sep 2019 12:09 AM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Fri, 06 Sep 2019 12:09 AM IST
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नौचंदी मेले के दौरान तैरकर बल्केश्वर घाट से हाथी घाट तक जाते गोकुल अखाड़ा के तैराक
- फोटो : अमर उजाला
दस फुट ऊंचे झंडे को लेकर युवा यमुना में कूद गए। बल्केश्वर के लक्ष्मी माता मंदिर से हाथी घाट तक तैरकर पहुंचे। इससे पहले अपने अपने अखाड़ों से युवा ढोल नगाड़ों के साथ बल्केश्वर पहुंचे।
मुगल काल में शुरू हुए नौचंदी मेले की परंपरा आज तक चली आ रही है। इसमें हिंदू-मुस्लिम अखाड़ों के युवा ढोल नगाड़ों के साथ बल्केश्वर स्थित लक्ष्मी माता मंदिर पहुंचते हैं। इसके बाद सभी अपने अपने अखाड़े का झंडा लेकर यमुना नदी में छलांग लगाते हैं।
अपने-अपने झंडे को लेकर समूह में युवा बल्केश्वर से हाथी घाट तक पहुंचे। वहीं हाथी घाट पर पहुंचने वालों का ढोल नगाड़ों के साथ स्वागत किया जाता है। वहीं बल्केश्वर में मेला का आयोजन होता है, जहां हर उम्र के लोग पहुंचकर मेला का लुत्फ उठाते हैं।
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गोकुलपुरा अखाड़े के राजकुमार कुशवाहा और देवीराम गुप्ता ने बताया कि यह वर्षों से चली आ रही परंपरा का निर्वहन कर रहे हैं। उनके साथ सुमित और छोटे भी यमुना में छलांग लगाते हैं।
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मुगल काल में शुरू हुए नौचंदी मेले की परंपरा आज तक चली आ रही है। इसमें हिंदू-मुस्लिम अखाड़ों के युवा ढोल नगाड़ों के साथ बल्केश्वर स्थित लक्ष्मी माता मंदिर पहुंचते हैं। इसके बाद सभी अपने अपने अखाड़े का झंडा लेकर यमुना नदी में छलांग लगाते हैं।
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अपने-अपने झंडे को लेकर समूह में युवा बल्केश्वर से हाथी घाट तक पहुंचे। वहीं हाथी घाट पर पहुंचने वालों का ढोल नगाड़ों के साथ स्वागत किया जाता है। वहीं बल्केश्वर में मेला का आयोजन होता है, जहां हर उम्र के लोग पहुंचकर मेला का लुत्फ उठाते हैं।
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गोकुलपुरा अखाड़े के राजकुमार कुशवाहा और देवीराम गुप्ता ने बताया कि यह वर्षों से चली आ रही परंपरा का निर्वहन कर रहे हैं। उनके साथ सुमित और छोटे भी यमुना में छलांग लगाते हैं।