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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Agra News ›   Hindi Hain Hum: Samvad With Poets And Scholars Of Firozabad

#हिंदीहैंहमः राष्ट्रीय कवि के रूप में बनाई पहचान, शहर का नाम किया रोशन

Tue, 01 Sep 2020 09:06 PM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क, अमर उजाला, फिरोजाबाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, फिरोजाबाद Published by: Abhishek Saxena Updated Tue, 01 Sep 2020 09:06 PM IST
सार

गांधी नगर निवासी संजीव सारस्वत तपन ने बताया कि एमएससी (गणित) करने के बाद बाद एमए (हिंदी साहित्य) से की और पीएचडी
भी की। 30 वर्षों से हिंदी काव्य मंचों पर सक्रिय रहे। आकाशवाणी, दूरदर्शन, चैनलों पर काव्य पाठ किया है। 

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Hindi Hain Hum: Samvad With Poets And Scholars Of Firozabad
हिंदीहैंहमः संवाद में वक्ताओं ने रखे अपने विचार - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

फिरोजाबाद में कई लोग ऐसे हैं जिन्होंने पढ़ाई दूसरे विषयों से की लेकिन उनको पहचान हिंदी से ही मिली। हिंदी से ही शहर का नाम भी देश से बाहर रोशन किया। अमर उजाला द्वारा व्हाट्सएप पर हुए संवाद में लोगों ने अपनी राय रखी। 
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राज्य शिक्षा सेवा में अधिकारी पद पर नियुक्त हैं संजीव
गांधी नगर निवासी संजीव सारस्वत तपन ने बताया कि एमएससी (गणित) करने के बाद बाद एमए (हिंदी साहित्य) से की और पीएचडी भी की। 30 वर्षों से हिंदी काव्य मंचों पर सक्रिय रहे। आकाशवाणी, दूरदर्शन, चैनलों पर काव्य पाठ किया है। उन्होंने एक गजल संग्रह एवं एक गीत संग्रह भी लिखा है। वर्तमान में राज्य शिक्षा सेवा उत्तराखंड में अधिकारी के पद पर कार्यरत। उत्तराखंड एवं पड़ोसी राष्ट्र नेपाल में विभिन्न हिंदी कविताओं के कार्यक्रम में प्रतिभाग किया है और हिंदी की बदौलत ही कई सम्मान भी पाए हैं।
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नेपाल में भी हिंदी को बताया सबसे महान भाषा
टूंडला निवासी कवि लटूरी सिंह लट्ठ बताते हैं कि हिंदी की बदौलत ही पूरे देश में राष्ट्रीय कवि के रूप में पहचान बनाई। देश का शायद ही ऐसा कोई प्रांत हो, जहां हिंदी भाषा का पक्ष मजबूती से न रखा हो। उन्होंने बताया कि नेपाल में भी हिंदी कवि सम्मेलन में भाग लेने पहुंचा और हिंदी को ही सबसे महान भाषा बताया। उन्होंने बताया कि मैं एक हिंदी मीडियम स्कूल का संचालन करता हूं। लोगों ने उसे अंग्रेजी माध्यम में परिवर्तित करने की मांग की। किंतु उन्होंने हिंदी से किसी प्रकार का समझौता नहीं किया। 
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जीव विज्ञान के प्रवक्ता होने के बाद भी लिखा काव्य संग्रह
टूंडला के दिनेशकांत दोषी बताते हैं कि जीव विज्ञान से एमएससी और एलटी करने के बाद हिंदी से एमए किया। क्योंकि हिंदी में रुचि थी। वह ठाकुर वीरी सिंह इंटर कॉलेज में जीव विज्ञान विषय के प्रवक्ता पद पर नियुक्त हुए। उसके बाद भी हिंदी का प्रचार, प्रसार कर रहे हैं।

वह कहते हैं कि कक्षा नवमीं से हिंदी विषय की कविता लिखते रहे, जिस कॉलेज में आए उस कॉलेज की पत्रिका में कविता का प्रकाशन होता रहा। उन्होंने बताया कि दूरदर्शन आदि पर भी कवि सम्मेलन में प्रतिभाग किया। हिंदी अकादमी द्वारा कराए सम्मेलन में भी अहम भूमिका निभाई। वर्ष 1965 में कवि हरिवंशराय बच्चन की अध्यक्षता वाले समारोह में भी काव्य पाठ किया।
 
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