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हिंदी हैं हमः हिंदी की सेवा कर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिली ख्याति, कवि-साहित्यकारों से बढ़ा मान
Fri, 21 Aug 2020 11:13 AM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Fri, 21 Aug 2020 11:13 AM IST
सार
हिंदी का मान बढ़ाने के लिए जिले के कवि और साहित्यकारों ने खूब साधना की। हिंदी की सेवा करने के लिए उन्हें राष्ट्रीय और
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ख्याति भी मिली।
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हिंदी का मान बढ़ाने वाले मैनपुरी के कवि और साहित्यकार
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
यूं तो मैनपुरी को मयन ऋषि की तपोभूमि कहा जाता है, लेकिन इतिहासकाल से ही यहां कवियों और साहित्यकारों ने भी अपना परचम लहराया। करहल निवासी डॉ. पदम सिंह पदम को न केवल राष्ट्रपति पुरस्कार मिला, बल्कि अमेरिका में भी हिंदी दिवस पर सम्मानित किया गया। कवि दीन मोहम्मद दीन को उप्र हिंदी संस्थान ने साहित्य भूषण और यश भारती जैसे पुरस्कार दिए। नवोदित कवि भी हिंदी के दामन को थामे हुए हैं। कवियों और साहित्यकारों की बस एक ही इच्छा है कि सरकार भी हिंदी और हिंदी प्रेमियों के लिए पहल करें, जिससे विश्व पटल पर हिंदी की परचम लहराए।
हिंदी से बेहतर कोई दूसरी भाषा पूरे विश्व में नहीं है। आज हिंदी के प्रति दूसरे देशों का रुझान भी बढ़ रहा है। हमें चाहिए कि हम हिंदी को आगे बढ़ाने के लिए विशेष पहल करें। लेखक और कवियों को भी आगे बढ़ाया जाना चाहिए। श्रीकृष्ण मिश्रा, साहित्यकार।
हिंदी की सेवा में अपना पूरा जीवन लगा दिया। जब तक सांस है हिंदी के लिए कार्य करता रहूंगा, लेकिन आज हिंदी के प्रति कम हो रहे रुझान से मन खिन्न हो जाता है। सरकार को हिंदी को बढ़ावा देने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए। - दीन मोहम्मद दीन, कवि।
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हिंदी से बेहतर कोई दूसरी भाषा पूरे विश्व में नहीं है। आज हिंदी के प्रति दूसरे देशों का रुझान भी बढ़ रहा है। हमें चाहिए कि हम हिंदी को आगे बढ़ाने के लिए विशेष पहल करें। लेखक और कवियों को भी आगे बढ़ाया जाना चाहिए। श्रीकृष्ण मिश्रा, साहित्यकार।
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हिंदी की सेवा में अपना पूरा जीवन लगा दिया। जब तक सांस है हिंदी के लिए कार्य करता रहूंगा, लेकिन आज हिंदी के प्रति कम हो रहे रुझान से मन खिन्न हो जाता है। सरकार को हिंदी को बढ़ावा देने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए। - दीन मोहम्मद दीन, कवि।
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हिंदी का मान बढ़ाने वाले कवि और साहित्यकार
- फोटो : अमर उजाला
हिंदी हमारी मातृभाषा होने के साथ विश्व की सबसे श्रेष्ठ और सरल भाषा है। शायद ही हिंदी जितनी कोई स्पष्ट भाषा हो। हमें चाहिए कि हम अपनी आने वाली पीढ़ी में हिंदी के प्रति प्रेम को जागृत करें। प्रतिभाओं को भी सम्मान मिलना बहुत जरूरी है। - संजय दुबे, कवि।
वैसे तो हिंदी किसी परिचय की मोहताज नहीं है, लेकिन आज हिंदी का लोहा विश्व के अन्य देश भी मान रहे हैं। हिंदी संस्थानों में दूसरे देशों से लोग हिंदी सीखने और डिग्री लेने के लिए आ रहे हैं। हमें भी हिंदी का सम्मान करना चाहिए। - डॉ. पदम सिंह पदम, कवि।
संबंधित खबर- हिंदी हैं हमः राष्ट्रभाषा हिंदी के बल पर आत्म गौरव का अधिकारी है भारत
हिंदी के मुकाबले कोई भी दूसरी भाषा है ही नहीं। मैंने अपने जीवन में हिंदी की सेवा करते हुए कई पुस्तकें लिखीं। आज जरूरत है कि आने वाली पीढ़ियों को हिंदी के गौरव से अवगत कराएं। हिंदी से भंग होते मोह को रोकना बहुत जरूरी है। - लाखन सिंह भदौरिया, कवि।
मैनपुरी की धरा पर अनगिनत हिंदी की सेवा करने वाले कवि और साहित्यकार हुए हैं। आज भी इसकी कोई कमी नहीं है। अगर सरकार का साथ मिले तो हिंदी की सेवा में मैनपुरी विश्व पटल पर अपना योगदान कर सकता है। - बलराम श्रीवास्तव, कवि।
वैसे तो हिंदी किसी परिचय की मोहताज नहीं है, लेकिन आज हिंदी का लोहा विश्व के अन्य देश भी मान रहे हैं। हिंदी संस्थानों में दूसरे देशों से लोग हिंदी सीखने और डिग्री लेने के लिए आ रहे हैं। हमें भी हिंदी का सम्मान करना चाहिए। - डॉ. पदम सिंह पदम, कवि।
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हिंदी के मुकाबले कोई भी दूसरी भाषा है ही नहीं। मैंने अपने जीवन में हिंदी की सेवा करते हुए कई पुस्तकें लिखीं। आज जरूरत है कि आने वाली पीढ़ियों को हिंदी के गौरव से अवगत कराएं। हिंदी से भंग होते मोह को रोकना बहुत जरूरी है। - लाखन सिंह भदौरिया, कवि।
मैनपुरी की धरा पर अनगिनत हिंदी की सेवा करने वाले कवि और साहित्यकार हुए हैं। आज भी इसकी कोई कमी नहीं है। अगर सरकार का साथ मिले तो हिंदी की सेवा में मैनपुरी विश्व पटल पर अपना योगदान कर सकता है। - बलराम श्रीवास्तव, कवि।