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आगरा: श्वानों को सता रहा दिल का रोग, फूल रहीं सांसें

Tue, 10 May 2022 02:03 PM IST
धीरेन्द्र सिंह अमर उजाला ब्यूरो, आगरा
अमर उजाला ब्यूरो, आगरा Published by: धीरेन्द्र सिंह Updated Tue, 10 May 2022 02:03 PM IST
सार

आगरा में आयोजित स्मॉल एनिमल वेटरनरी एसोसिएशन ऑफ नार्थ की कार्यशाला में श्वानों को लेकर होने वाली बीमारियों पर चर्चा की गई।

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Heart disease tormenting dogs Animal experts SAWAN workshop in agra 
श्वानों की फूल रही सांस - फोटो : Social Media

विस्तार

श्वानों को दिल का रोग सता रहा है। चलने में उसकी सांस फूल रही है। बार-बार प्यास लगती है। सोते हुए भी हांफता है तो श्वान के दिल की जांच कराएं। उसको हार्ट अटैक से बचा सकते हैं। ये कहना है श्वान विशेषज्ञ डॉ. विनोद व्यास का। उन्होंने स्मॉल एनिमल वेटरनरी एसोसिएशन ऑफ नार्थ (सावन) की कार्यशाला के समापन सत्र में श्वानों की बीमारियों पर अनुभव साझा किए। 

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दो दिन की कार्यशाला में देशभर से आए 70 से अधिक पशु विशेषज्ञ शामिल हुए। बिल्ली, खरगोश, पालूत चिड़ियों पर भी चर्चा हुई। ग्वालियर से आए श्वान विशेषज्ञ डा. व्यास ने कहा कि इंसानों की तरह श्वानों में भी दिल का रोग तेजी से बढ़ रहा है। श्वान को मोटा बनाने के चक्कर में लोग अधिक खिलाते-पिलाते हैं। जो उनके लिए घातक है। वे डायलेटिड कार्डियो मायोपैथी (डीसीएम) के शिकार हो रहे हैं। 30 फीसदी मोटे श्वानों में यह बीमारी हो रही है। आयोजन सचिव डॉ. संजीव नेहरू ने बताया कि पग, लेब्रोडोरे, गोल्डन रीट्रीट नस्ल के श्वानों की हार्ट अटैक से मृत्यु अधिक हो रही हैं। उन्होंने इसके लिए 70 से अधिक केस स्टडी प्रस्तुत कीं।

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ऐसे करें पहचान

- श्वान दस कदम चलने पर ही बार-बार रुक जाता है।
- बार-बार प्यास लगती है, पानी अधिक पीने लगता है।
- सोते हुए या बैठे हुए भी श्वान तेज हांफने लगता है।
- दौड़ नहीं पाता, सुस्त रहता है। सीढ़ी नहीं चढ़ पाता है।

उपचार से बच सकती है जान

- श्वान विशेषज्ञों के मुताबिक दिल की बीमारी वाले श्वानों का इलाज ईसीजी व अन्य जांचों व दवाइयों से किया जाता है। समय रहते पता चलने पर उपचार से जान बच सकती है।

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ये विशेषज्ञ रहे मौजूद

- कार्यशाला का उद्घाटन पंत विश्विविद्यालय पशु चिकित्सा विभाग के पूर्व डीन एसपी पचौरी ने किया। डॉ. जसमीत सिंह, डॉ. कुनाल देव शर्मा, डॉ. राजवीर सिंह, डॉ. गुरु बख्सानी, डॉ. विशाल मोहन, डॉ. रजनीश त्यागी आदि ने मंथन किया। 

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