आगरा: डेंगू-वायरल फीवर से बचाव के लिए स्वास्थ्य विभाग ने जारी की गाइडलाइन, बरतें एहतियात
फिरोजाबाद जिले में वायरल फीवर और डेंगू से हाहाकर मचा हुआ है। आगरा में भी डेंगू के मरीज मिल रहे हैं। इसे लेकर स्वास्थ्य विभाग ने अलर्ट जारी किया है। साथ ही इन बीमारियों से बचाव के लिए गाइडलाइन जारी की है। सीएमओ ने कहा कि डेंगू-वायरल फीवर, मलेरिया, लेप्टोस्पाइरोसिस, स्क्रब टाइफस के लगभग एक जैसे लक्षण होते हैं। बचाव के लिए सावधानी बेहद जरूरी है।
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आगरा में स्वास्थ्य विभाग ने बदले मौसम में डेंगू, वायरल फीवर, मलेरिया, चिकनगुनिया, स्क्रब टाइफस, कोरोना और लेस्टोस्पाइरोसिस का अलर्ट जारी किया है। यह बैक्टीरियल और वायरल इन्फेक्शन की बीमारी हैं। इनके लक्षण लगभग एक जैसे हैं। सावधानी बरतने से इनका खतरा काफी कम हो सकता है। स्वास्थ्य विभाग ने इसके लिए गाइडलाइन जारी की है।
आगरा के सीएमओ डॉ. अरुण श्रीवास्तव ने बताया कि घर में कूलर की टंकी से पानी खाली कर दें। साफ-सफाई बरतें और मच्छर नहीं पनपने दें। दिन-रात पूरी आस्तीन के कपड़े पहनकर रहें। बुखार आता है तो चिकित्सक को दिखाकर जांच कराएं। किसी भी आपात स्थिति पर (0562-2600412) पर संपर्क कर सकते हैं।
इन बीमारियों का है खतरा
वायरल फीवर: बुखार लगातार बढ़ता है। गले में खराश, जुकाम रहता है। सिर और शरीर में दर्द होता है। आंखें लाल रहती हैं। मरीज बेचैनी महसूस करता है। इलाज से सात से दस दिन में ठीक होता है। बरसात के दौरान वातावरण में नमी से यह अधिक फैलता है।
मलेरिया: सर्दी के साथ तेज बुखार आता है। मरीज को लगातार बुखार नहीं रहता। 24 से 36 घंटे बाद पसीना आकर फिर से दोबारा बुखार आ जाता है। उल्टी होती है और मरीज का जी मिचलाता है। कमजोरी और शरीर में ऐंठन रहती है।
डेंगू: तेज बुखार आता है। सिर में दर्द रहता है। शरीर पर लाल चकत्ते पड़ जाते हैं। मांसपेशियों और जोड़ों में तेज दर्द रहता है। गंभीर हालत में मरीज के नाक, मुंह से रक्त आने लगतो है। मरीज सदमे में भी चला जाता है। उल्टी होती हैं, भूख भी नहीं लगती है।
चिकनगुनिया: बुखार रहता है। जोड़ों में तेज दर्द उभरता है। मांसपेशियां दर्द करती हैं। थकान-कमजोरी रहती है। शरीर पर लाल दाने उभर आते हैं। ठीक होने पर भी मरीज को लंबे समय तक जोड़ों में दर्द बना रहता है।
स्क्रब टाइफस: बुखार, खांसी, सिर दर्द होता है। सांस फूलती है। उल्टी होती हैं। मांसपेशियां दर्द करती हैं। लाल चकत्ते होते हैं। चूहे, छछूंदर, गिलहरी सहित पशुओं के शरीर पर पिस्सु के काटने से यह बीमारी होती है। इनकी लार में ओरियंटा सुसुगमुसी बैक्टीरिया इसकी वजह है। सात से 10 दिन में लक्षण दिखते हैं।
लेस्टोस्पाइरोसिस: बुखार के साथ सिर में दर्द रहता है। मांसपेशियों में दर्द रहता है। पशुओं पर रहने वाले परजीवी में लेप्टोस्पाइरा इंटेरोगंस बैक्टीरिया से यह बीमारी होती है। पशुओं के मूत्र के जरिये जमीन पर पहुंचता है, खुले में शौच करने से लोग संक्रमित हो जाते हैं। 15 से 20 दिन में लक्षण दिखने लगते हैं।
कोरोना वायरस: बुखार के साथ जुकाम-खांसी रहना। छाती में जकड़न होना, सांस फूलना। गले में खराश की शिकायत। सांस लेने में परेशानी होना। सिरदर्द होना। स्वाद और गंध न आना। ऑक्सीजन का स्तर कम होते जाना।
क्यूलेक्स मच्छर: इस मच्छर के काटने से फाइलेरिया होता है, यह बीमारी तराई क्षेत्रों में मिलती है। यह अंधेरे, नाली में रहता है। काटने से खुजली होती है।
एडीज एजिप्टी: इसके काटने से डेंगू- चिकनगुनिया होता है। यह चार-पांच फीट ऊंचाई तक उड़ता है, दिन में काटता है। यह साफ पानी में पनपता है।
एनाफिलीज: इसकी 400 से अधिक प्रजातियां हैं। इसके काटने से मलेरिया होता है। यह साफ और रुके हुए पानी में पनपता है। यह रात को काटता है।
(जैसा कि एसएन मेडिकल कॉलेज के माइक्रोबायोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. अंकुर गोयल ने बताया)
- नालियों की सफाई रखें, जलभराव न होने दें। अगर ऐसा है तो उसमें मिट्टी का तेल छिड़क दें।
- रात में खुले में न सोएं, पानी उबालकर पीएं, गुनगुना पानी पीने में इस्तेमाल करें।
- कूलर की टंकी से पानी खाली कर दें। घर में रसोई, बाथरूम में पानी को ढककर रखें।
- दिन और रात में पूरी आस्तीन के कपड़े पहनें, पैर और हाथ ढके रहें।
- रात में सोते वक्त भी पूरी आस्तीन के कपडे़ पहनकर रखें, बच्चों पर विशेष ध्यान दें।
- दाल, हरी सब्जी समेत पौष्टिक भोजन करें। रेफ्रिजरेटर में रखी खाद्य सामग्री से बचें।
- खुले खाद्य पदार्थों, खुली आइसक्रीम और ठंडे पानी से बचें।
- जलभराव होने पर छिड़काव के लिए नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग को जानकारी दें।