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हवाहवाई हो रही सीएम की घोषणा, धरातल पर नहीं मिल रहा मुकाम
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सोरों(कासगंज)। दो साल पहले तीर्थनगरी के विकास के लिए सीएम की गई घोषणाएं हवाहवाई साबित हो रहीं है। दो साल पहले मांगे प्रस्ताव पर अब तक कोई काम नहीं हुआ है। इससे तीर्थनगरी के लोग नाखुश हैं।
वर्ष 2018 में सीएम योगी आदित्यनाथ ने तीर्थनगरी सोरों के विकास का प्रस्ताव मांगा था। तत्कालीन डीएम आरपी सिंह ने तीर्थनगरी सोरों के विकास का डीपीआर तैयार कराया। डीएम व जिले के आलाअधिकारियों, जनप्रतिनिधियों के समक्ष डीपीआर के प्रजेंटेशन के बाद इसे लखनऊ पर्यटन निदेशालय को पिछले साल नवंबर माह में भेज दिया था। इतना समय बीतने के बाद भी इस डीपीआर पर गंभीरता से विचार नहीं हो रहा है।
सीएम की घोषणा के बावजूद भी अभी तक विकास के लिए धनराशि स्वीकृत नहीं हुई है। इससे सोरों के लोग नाराज हैं। उनका कहना है कि सामाजिक धार्मिक संगठनों ने सासंद, विधायक, जनपद प्रभारी व अनेक मंत्रियों को इस संबंध में ज्ञापन दिए। मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री को भी ज्ञापन भेजे गए, लेकिन तीर्थवासियों की मांग पूरी नहीं हो पा रही।
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84 करोड़ का भेजा गया था प्रस्ताव
सोरों के लिए तैयार कर भेजा गया प्रस्ताव करीब 84 करोड़ रुपये का है। इससे यहां के मंदिरों, हरि की पदी के घाटों के अलावा कस्बे के अन्य चौराहों आदि के हालात सुधर जाएंगे। पर्यटन बढ़ने से यहां के लोगों के लिए रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे।
- पालिका बोर्ड बैठक में सर्वसम्मति से सूरकक्षेत्र को तीर्थस्थल घोषित करने व इसके विकास के लिए धन देने का प्रस्ताव पारित कर शासन को भेजा जा चुका है। पर्यटन महानिदेशक से भी शीघ्र धन मिलने का आश्वासन मिला है। - मुन्नी देवी, पालिकाध्यक्ष, सोरों।
आंदोलन का बिगुल फूंकने की तैयारी
अखंड आर्यावर्त संघ के अध्यक्ष भूपेश शर्मा ने बताया कि तीर्थनगरी के साथ भाजपा सरकार में नाइंसाफी हो रही है। जब सब तीर्थों का विकास हो रहा है तो सूकरक्षेत्र की उपेक्षा क्यों। 15 अगस्त के बाद राज्य व केंद्र सरकार को जगाने के लिए एक विस्तृत आंदोलन की रूपरेखा तैयार कर ली गई है।
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वर्ष 2018 में सीएम योगी आदित्यनाथ ने तीर्थनगरी सोरों के विकास का प्रस्ताव मांगा था। तत्कालीन डीएम आरपी सिंह ने तीर्थनगरी सोरों के विकास का डीपीआर तैयार कराया। डीएम व जिले के आलाअधिकारियों, जनप्रतिनिधियों के समक्ष डीपीआर के प्रजेंटेशन के बाद इसे लखनऊ पर्यटन निदेशालय को पिछले साल नवंबर माह में भेज दिया था। इतना समय बीतने के बाद भी इस डीपीआर पर गंभीरता से विचार नहीं हो रहा है।
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सीएम की घोषणा के बावजूद भी अभी तक विकास के लिए धनराशि स्वीकृत नहीं हुई है। इससे सोरों के लोग नाराज हैं। उनका कहना है कि सामाजिक धार्मिक संगठनों ने सासंद, विधायक, जनपद प्रभारी व अनेक मंत्रियों को इस संबंध में ज्ञापन दिए। मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री को भी ज्ञापन भेजे गए, लेकिन तीर्थवासियों की मांग पूरी नहीं हो पा रही।
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84 करोड़ का भेजा गया था प्रस्ताव
सोरों के लिए तैयार कर भेजा गया प्रस्ताव करीब 84 करोड़ रुपये का है। इससे यहां के मंदिरों, हरि की पदी के घाटों के अलावा कस्बे के अन्य चौराहों आदि के हालात सुधर जाएंगे। पर्यटन बढ़ने से यहां के लोगों के लिए रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे।
- पालिका बोर्ड बैठक में सर्वसम्मति से सूरकक्षेत्र को तीर्थस्थल घोषित करने व इसके विकास के लिए धन देने का प्रस्ताव पारित कर शासन को भेजा जा चुका है। पर्यटन महानिदेशक से भी शीघ्र धन मिलने का आश्वासन मिला है। - मुन्नी देवी, पालिकाध्यक्ष, सोरों।
आंदोलन का बिगुल फूंकने की तैयारी
अखंड आर्यावर्त संघ के अध्यक्ष भूपेश शर्मा ने बताया कि तीर्थनगरी के साथ भाजपा सरकार में नाइंसाफी हो रही है। जब सब तीर्थों का विकास हो रहा है तो सूकरक्षेत्र की उपेक्षा क्यों। 15 अगस्त के बाद राज्य व केंद्र सरकार को जगाने के लिए एक विस्तृत आंदोलन की रूपरेखा तैयार कर ली गई है।