{"_id":"581cd2904f1c1bad314386ac","slug":"half-a-million-hernia-patients-in-the-country-effective-method-for-telescope","type":"story","status":"publish","title_hn":"देश में पांच लाख हार्निया मरीज, दूरबीन विधि कारगर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
देश में पांच लाख हार्निया मरीज, दूरबीन विधि कारगर
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 04 Nov 2016 11:55 PM IST
विज्ञापन
कम्बाइंड नेशनल लेप्रोस्कॉपिक सर्जरी कांफ्रेंस शुरू
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हार्निया के देश में पांच लाख से अधिक मरीज हैं। 95 फीसदी का आपरेशन ओपन सर्जरी से हो रहा है। लेप्रोस्कॉपिक (दूरबीन) सर्जनों का मानना है कि ओपन विधि से दोबारा आपरेशन का 18 फीसदी तक खतरा रहता है। कम्बाइंड नेशनल लेप्रोस्कॉपिक सर्जरी की कांफ्रेंस में विशेषज्ञों ने इसकी जरूरत और होने वाले लाभों पर व्याख्यान दिया।
कांफ्रेंस के पहले दिन सचखंड हास्पिटल में पहले दिन हार्निया, पथरी समेत 22 आपरेशन हुए। मुख्य वक्ता एम्स के निदेशक प्रो. एमसी मिश्रा ने बताया कि मोटापा, बिगड़े खानपान से भी हार्निया की परेशानी बढ़ रही है। लेप्रोस्कॉपिक सर्जरी के कम उपयोग पर उन्होंने कहा कि देश में इसके प्रचार-प्रसार और प्रशिक्षित डाक्टरों की कमी भी कारण है।
संयोजक डा. एसडी मौर्या ने कहा कि लेप्रोस्कॉपिक विधि से महज तीन प्रतिशत ही दोबारा आपरेशन की जरूरत रहती। कैंसर, बांझपन जैसी बीमारियों के आपरेशन भी इस विधि से किए जा रहे हैं। प्रदर्शनी लगाई गई और क्विज प्रतियोगिता भी हुई।
विज्ञापन
डा. संदीप कुमार, डा. सुनील शर्मा, डा. रिचा सिंह, डा. ज्ञानप्रकाश, डा. एचएल राजपूत, डा. भूपेंद्र प्रसाद, डा. शरद गुप्ता, डा. किशोर पंजवानी, डा. मुनीर खान, डा. विनोद बंसल, डा. अपूर्व चतुर्वेदी, डा. अमित श्रीवास्तव ने आपरेशन किए।
विज्ञापन
कांफ्रेंस के पहले दिन सचखंड हास्पिटल में पहले दिन हार्निया, पथरी समेत 22 आपरेशन हुए। मुख्य वक्ता एम्स के निदेशक प्रो. एमसी मिश्रा ने बताया कि मोटापा, बिगड़े खानपान से भी हार्निया की परेशानी बढ़ रही है। लेप्रोस्कॉपिक सर्जरी के कम उपयोग पर उन्होंने कहा कि देश में इसके प्रचार-प्रसार और प्रशिक्षित डाक्टरों की कमी भी कारण है।
विज्ञापन
संयोजक डा. एसडी मौर्या ने कहा कि लेप्रोस्कॉपिक विधि से महज तीन प्रतिशत ही दोबारा आपरेशन की जरूरत रहती। कैंसर, बांझपन जैसी बीमारियों के आपरेशन भी इस विधि से किए जा रहे हैं। प्रदर्शनी लगाई गई और क्विज प्रतियोगिता भी हुई।
विज्ञापन
डा. संदीप कुमार, डा. सुनील शर्मा, डा. रिचा सिंह, डा. ज्ञानप्रकाश, डा. एचएल राजपूत, डा. भूपेंद्र प्रसाद, डा. शरद गुप्ता, डा. किशोर पंजवानी, डा. मुनीर खान, डा. विनोद बंसल, डा. अपूर्व चतुर्वेदी, डा. अमित श्रीवास्तव ने आपरेशन किए।