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कोरोना संक्रमण से कठिन हुई हज यात्रा, मदीने में तीन दिन रुकने की इजाजत, नए नियमों से हो रहे कम आवेदन
Sun, 06 Dec 2020 12:30 PM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Sun, 06 Dec 2020 12:30 PM IST
सार
- चार दिन शेष, महज 15 लोगों ने ही किए हैं आवेदन
- 250 से ज्यादा हाजी हर साल यात्रा करने के लिए जाते थे
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हज यात्रा
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विस्तार
ताजनगरी से 2021 में हज यात्रा के लिए आवेदन करने की अंतिम तारीख 10 दिसंबर है। अब महज चार दिन बाकी हैं मगर आगरा से अभी तक महज 15 लोगों ने ही हज यात्रा के लिए आवेदन किया है। इस बार हज यात्रियों को सऊदी अरब में सात दिन तक क्वारंटीन भी रहना होगा। उन्हें बगदाद या अन्य किसी स्थान पर जाने की इजाजत भी नहीं होगी।
कोरोना काल में वर्ष 2020 में हज यात्रा स्थगित हो चुकी है। अब अगले साल हज जाने वालों को आवेदन करने के लिए 10 दिसंबर तारीख नियत की गई है। तीन दिसंबर तक 15 लोगों ने ही आवेदन किए हैं। जिला हज कमेटी से जुड़े मोहम्मद अनस ने बताया कि इस बार हज यात्रियों के लिए शर्तें बेहद कठिन हैं। यात्री को अरब पहुंचकर सात दिन तक क्वारंटीन रहना होगा।
जियारत करने के लिए किसी दूसरे स्थान पर नहीं जा सकेंगे। वहीं मदीने में पहले आठ दिन तक रहते थे, लेकिन अबकी बार केवल तीन दिन रह सकेंगे। हरम शरीफ (काबा) में तीन घंटे से अधिक नहीं रह पाएंगे। इसके अलावा उम्र की बंदिश भी बड़ी बाधा बनी हुई है। अभी तक ज्यादातर हाजी 60 साल से ऊपर के जाते थे, लेकिन इस बार 65 साल से ज्यादा के लोग नहीं जा सकते हैं। यही कारण हैं कि महज पांच दिन बाकी होने के बाद भी केवल 15 लोगों ने ही आवेदन किए हैं। आमतौर पर आगरा से 250 से ज्यादा हाजी हर साल हज यात्रा करने के लिए जाते थे।
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कोरोना काल में वर्ष 2020 में हज यात्रा स्थगित हो चुकी है। अब अगले साल हज जाने वालों को आवेदन करने के लिए 10 दिसंबर तारीख नियत की गई है। तीन दिसंबर तक 15 लोगों ने ही आवेदन किए हैं। जिला हज कमेटी से जुड़े मोहम्मद अनस ने बताया कि इस बार हज यात्रियों के लिए शर्तें बेहद कठिन हैं। यात्री को अरब पहुंचकर सात दिन तक क्वारंटीन रहना होगा।
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जियारत करने के लिए किसी दूसरे स्थान पर नहीं जा सकेंगे। वहीं मदीने में पहले आठ दिन तक रहते थे, लेकिन अबकी बार केवल तीन दिन रह सकेंगे। हरम शरीफ (काबा) में तीन घंटे से अधिक नहीं रह पाएंगे। इसके अलावा उम्र की बंदिश भी बड़ी बाधा बनी हुई है। अभी तक ज्यादातर हाजी 60 साल से ऊपर के जाते थे, लेकिन इस बार 65 साल से ज्यादा के लोग नहीं जा सकते हैं। यही कारण हैं कि महज पांच दिन बाकी होने के बाद भी केवल 15 लोगों ने ही आवेदन किए हैं। आमतौर पर आगरा से 250 से ज्यादा हाजी हर साल हज यात्रा करने के लिए जाते थे।
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‘एवजी’ की रवायत पर लगा ग्रहण
इस्लाम की मान्यता के मुताबिक, अगर घर के किसी बुजुर्ग की हज करने की ख्वाहिश थी मगर यह ख्वाहिश किसी वजह से पूरी नहीं हो सकी और उनका इंतकाल हो गया। ऐसे में सक्षम लोग मस्जिदों के मुतवल्ली या मदरसों के बुजुर्ग शिक्षकों को अपने बुजुर्ग की एवज में हज कराते थे। यह रवायत बरसों पुरानी है। भारतीय मुस्लिम विकास परिषद के अध्यक्ष समी आगाई ने बताया कि एवजी की रवायत महंगाई के कारण टूट रही है।
पहले हज यात्रा में खर्च 1.45 लाख तक का आता था, अब यह बढ़कर साढ़े तीन लाख से चार लाख रुपये हो गया। ऐसे में कौन दूसरे को हज यात्रा कराएगा। पहले तो कई लोग एवजी में हज करके आ चुके हैं। हिंदुस्तानी बिरादरी के अध्यक्ष डॉ. सिराज कुरैशी ने बताया कि एवजी की रवायत बहुत पुरानी है मगर वक्त के साथ इस पर ग्रहण लग गया है।
इस्लाम की मान्यता के मुताबिक, अगर घर के किसी बुजुर्ग की हज करने की ख्वाहिश थी मगर यह ख्वाहिश किसी वजह से पूरी नहीं हो सकी और उनका इंतकाल हो गया। ऐसे में सक्षम लोग मस्जिदों के मुतवल्ली या मदरसों के बुजुर्ग शिक्षकों को अपने बुजुर्ग की एवज में हज कराते थे। यह रवायत बरसों पुरानी है। भारतीय मुस्लिम विकास परिषद के अध्यक्ष समी आगाई ने बताया कि एवजी की रवायत महंगाई के कारण टूट रही है।
पहले हज यात्रा में खर्च 1.45 लाख तक का आता था, अब यह बढ़कर साढ़े तीन लाख से चार लाख रुपये हो गया। ऐसे में कौन दूसरे को हज यात्रा कराएगा। पहले तो कई लोग एवजी में हज करके आ चुके हैं। हिंदुस्तानी बिरादरी के अध्यक्ष डॉ. सिराज कुरैशी ने बताया कि एवजी की रवायत बहुत पुरानी है मगर वक्त के साथ इस पर ग्रहण लग गया है।