इन सरकारी दफ्तरों पर है लाखों रुपये का बिल बकाया, फिर भी कर रहे बिजली बर्बाद
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यहां अधिकारियों का रवैया जनता के सेवक वाला नहीं, ‘साहबों’ वाला है। इनमें से कई विभाग तो ऐसे हैं, जिन पर भारी भरकम बिजली बिल बकाया है। बिल तो चुका नहीं रहे। ऊपर से बिजली की अंधाधुंध खपत हो रही है।
हाल यह है कि साहब अपने दफ्तर में बैठे हों या नहीं बैठे हों, एसी, पंखा, लाइट दफ्तर बंद होने तक चालू ही रहते हैं। ताकि साहब जब आएं तो उन्हें अपना दफ्तर कूल-कूल मिले।
इनमें वह विभाग भी हैं, जिन पर ऊर्जा विभाग का लाखों रुपये का बकाया चला आ रहा है। विभाग बिल तो चुका नहीं रहे, बिजली बर्बाद करने और इस मामले में फिजूलखर्ची से भी नहीं चूक रहे।
दिन में भी कार्यालय की लाइटें जलती रहती हैं। एसी-पंखे, कूलर हर वक्त चालू रहते हैं। मार्च 2018 तक जिले के कई विभागों पर दक्षिणांचल का 50 करोड़ रुपये से अधिक का बकाया है।
सबसे अधिक प्राथमिक शिक्षा विभाग पर बकाया है। पुलिस और जिला प्रशासन भी दक्षिणांचल के कर्ज तले दबे हुए हैं। दक्षिणांचल ने कई बार नोटिस दिया लेकिन बकाया धनराशि नहीं वसूल पाया।
सरकारी विभागों से बिजली का बिल वसूल पाना आसान नहीं है। कई विभाग तो ऐसे हैं, जहां मीटर तक नहीं हैं। सीधे बिजली उपयोग कर रहे हैं। कई थाने ऐसे हैं, जहां या तो मीटर लगा ही नहीं है या फिर मीटर टूटा पड़ा है।
यहां धड़ल्ले से बिजली प्रयोग की जा रही है। वर्षों से ऐसा चला आ रहा है। इस बिल को भी दक्षिणांचल जोड़ता तो बकाया धनराशि का ग्राफ और बढ़ जाता। तमाम कोशिशों के बावजूद विभाग बकाया धनराशि की वसूली नहीं कर पा रहा है।
प्रमुख बकायेदार विभाग
विभाग बकाया धनराशि (लाख में)
प्राथमिक शिक्षा 1622.52
ग्राम्य विकास 1267.97
मंडी समिति 1099.57
माध्यमिक शिक्षा 309.44
चिकित्सा 306.12
पुलिस 203.40
पंचायती राज 56.55
खंड विकास अधिकारी 20.63
पशुधन 22.51
सहकारिता समिति 20.42
वन विभाग 16.20
जिला प्रशासन 11.97