फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Agra News ›   Gokul Mission Yojana Dwaparugin Cows Will Be Seen In Etah Village

एटा के पांच सौ गांवों में नजर आएंगी द्वापरयुगीन साहीवाल गायें, नस्ल सुधार में जुटी सरकार

Tue, 18 Aug 2020 01:04 PM IST
Abhishek Saxena उमेश भारद्वाज, अमर उजाला, एटा
उमेश भारद्वाज, अमर उजाला, एटा Published by: Abhishek Saxena Updated Tue, 18 Aug 2020 01:04 PM IST
सार

गोकुल मिशन योजना के तहत देसी गायों की नस्ल सुधार में जुटी सरकार
 

विज्ञापन
Gokul Mission Yojana Dwaparugin Cows Will Be Seen In Etah Village
गाय, गौशाला (फाइल फोटो) - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

द्वापर और त्रेतायुगीन गायें क्रमश: साहीवाल और थारपारकर गायें अब पांच सौ गांवों में नजर आएंगी। केंद्र सरकार ने साहीवाल सहित 35 तरह की गायों की नस्ल सुधारने के लिए गोकुल ग्राम मिशन योजना शुरू की है। इसके तहत जिले के पांच सौ गांवों में पचास हजार गायों का कृत्रिम गर्भाधान कराया जाएगा। 
विज्ञापन


योजना के तहत सरकार देसी गायों की नस्ल में सुधार कर किसानों की आय बढ़ाना चाहती है। इसके लिए गायों को तीन ग्रुप में बांटा गया है। पहले ग्रुप में दुधारू गायों को रखा गया है। इनमें साहीवाल, देसी, ब्रींड और थारपारकर आदि गायें शामिल हैं।
विज्ञापन


वहीं, दूसरे ग्रुप में दूध भी कम और काम भी कम करने वाली गायों को रखा गया है। इसमें हरियाणा और दक्षिणी राज्यों की गायें शामिल हैं। वहीं, तीसरे ग्रुप में दूध कम और बैल के रूप में ज्यादा उपयोगी होने वाली गायों को रखा गया है। इसमें प्रमुख रूप से नागौरी है। इन सभी की नस्ल में सुधार किया जाएगा। 
विज्ञापन
विज्ञापन

किसानों की आय बढ़ेगी 
सरकार का उद्देश्य पशुपालन से किसानों की आय बढ़ाने का है। पहली नस्ल सुधार की प्रक्रिया के बाद देसी गायें प्रतिदिन आठ से दस लीटर तक दूध देना शुरू कर सकती हैं। इससे किसानों की आय बढ़ जाएगी। 

मुरा भैंस की नस्ल भी सुधारेंगे
मिशन के तहत मुरा नस्ल की भैंस की नस्ल सुधार के लिए इनमें भी कृत्रिम गर्भाधान कराया जाएगा। 

योजना के तहत कृत्रिम गर्भाधान एक अगस्त से 30 सितंबर तक चलेगा। इसमें पशु चिकित्सा विभाग की टीमें गांव-गांव जाकर कृत्रिम गर्भाधान कराएंगी। मुख्यालय को भेजी गई डिमांड में गोकुल मिशन योजना के तहत जिले में पांच सौ गांवों में प्रत्येक में सौ गायों का चयन किया गया है। जिले में करीब पचास हजार गायों का कृत्रिम गर्भाधान कराया जाएगा। इसमें देसी गाय में साहीवाल का सीरम की डिमांड मुख्यालय को भेजी गई है। -एसपी सिंह सोलंकी, सीवीओ

साहीवाल और थारपारकर की विशेषताएं

-यह देसी गायें भारत के जलवायु के अनुकूल हैं। इन्हें न तो विदेशी बीमारियां घेरती हैं और न ही इन्हें ज्यादा गर्मी और सर्दी ही लगती है। थारपाकर पचास डिग्री सेल्सियस में रह लेती हैं, जबकि विदेशी गायों को इस तापमान में कूलर और पंखा चाहिए।

-इनकी दूध की क्वालिटी विदेशी गायों के मुकाबले, जहां बेहतर होती है, वहीं इनको विदेशी गायों के मुकाबले चारा और पानी की आवश्यकता भी कम पड़ती है। इससे इन्हें कम खर्च में भी पाला जा सकता है।

-इनका गोबर भारत की मिट्टी में जैविक खेती का काम करता है, प्राचीन काल में गायों के गोबर से ही खेती होती थी।

-सबसे विशेष बात विदेशी गाय जीवन काल में केवल चार से पांच बार बच्चे देती है, जबकि देसी गाय पंद्रह से बीस बार तक बछड़ा पैदा कर सकती है।
 

साहीवाल और थारपारकर दोनों देसी गायें क्रमश: द्वापर और त्रेतायुगीन हैं। इसको बढ़ावा देने से हमारे गावों की अर्थ व्यवस्था में आशातीत सुधार आएगा। देसी गाय पालने से किसानों को कम लागत में अधिक दूध मिलेगा, वहीं इनके गोबर, मूत्र आदि की भी डिमांड रहती है। इससे आने वाले दिनों में यदि किसान वैज्ञानिक पद्धति से देसी गायों को पालें तो वह उन्हें विदेशी गायों की अपेक्षा ज्यादा मुनाफा देंगी। -प्रो. केएलएल पाठक, पूर्व वीसी पं. दीनदयाल उपाध्याय पशु चिकित्सा एवं विज्ञान विश्वविद्यालय एवं गो अनुसंधान संस्थान दुवासू
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed