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गाय के गोबर से बनी गोकाष्ठ दिलाएगी मोक्ष, पर्यावरण के लिए है अनुकूल
Sun, 19 May 2019 04:36 PM IST
मुकेश कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मथुरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मथुरा
Published by: मुकेश कुमार
Updated Sun, 19 May 2019 04:36 PM IST
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गाय के गोबर से बनी गोकाष्ठ
- फोटो : अमर उजाला
समाजसेवा अगर निस्वार्थ भाव से की जाए तो मानवता का कर्तव्य सही मायनों में निभाया जा सकता है। गोवर्धन में समाजसेवियों द्वारा शुरू की गई अनूठी सेवा की मुहिम अब रंग ला रही है। धीरे-धीरे की गई छोटी शुरुआत ने अब बड़ा रूप ले लिया है।
राधाकुंड परिक्रमा मार्ग गांव हरीपुरा के निकट मोक्ष धाम (श्मशान) स्थली पर समाजसेवी गौतम खंडेलवाल ने अपने अथक परिश्रम से गाय के गोबर से गोकाष्ठ तैयार कर रहे हैं। इसका इस्तेमाल अंतिम संस्कार के लिए किया जाता है। गोकष्ठ का पर्यावरण के अनुकूल है।
समाजसेवी गौतम खंडेलवाल ने पंजाब से गाय के गोबर से गोकष्ठ बनाने की मशीन लेकर आए थे। गोवर्धन में मोक्ष स्थली पर अंतिम संस्कार के लिए गोकाष्ठ बनाने में गाय का गोबर, कपूर, हवन सामग्री, नवग्रह की समिधा, जल का उपयोग किया जाता है।
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राधाकुंड परिक्रमा मार्ग गांव हरीपुरा के निकट मोक्ष धाम (श्मशान) स्थली पर समाजसेवी गौतम खंडेलवाल ने अपने अथक परिश्रम से गाय के गोबर से गोकाष्ठ तैयार कर रहे हैं। इसका इस्तेमाल अंतिम संस्कार के लिए किया जाता है। गोकष्ठ का पर्यावरण के अनुकूल है।
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समाजसेवी गौतम खंडेलवाल ने पंजाब से गाय के गोबर से गोकष्ठ बनाने की मशीन लेकर आए थे। गोवर्धन में मोक्ष स्थली पर अंतिम संस्कार के लिए गोकाष्ठ बनाने में गाय का गोबर, कपूर, हवन सामग्री, नवग्रह की समिधा, जल का उपयोग किया जाता है।
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गो सेवा से मिली गो काष्ठ बनाने की प्रेरणा
ज्योतिषाचार्य प्रशांत लवानियां ने बताया कि गाय आध्यात्मिक रूप से मां जगदंबा का स्वरूप है। इसके गोबर के बने ईंधन में सबसे अधिक ऑक्सीजन उत्सर्जित होती है, जो कि पर्यावरण के लिए अनुकूल है।
गोवर्धन में गोकाष्ठ बनाने को लेकर इस मुहिम से जुड़े गौतम खंडेलवाल कहते हैं कि ब्रज में गायों की दुर्दशा हो रही है। वे गोशालाओं से गोबर लेकर आ रहे हैं। प्रशांत लवानियां कहते हैं कि अंतिम संस्कार में सेवा करना सबसे बड़ा पुण्य का काम है।
आकाश मिश्रा का कहना है कि इसमें ज्योतिष के हिसाब से नौ ग्रहों का भी ध्यान रखा है। मोहित लवानियां कहते हैं अंतिम संस्कार में पेड़ों को काट कर लकड़ी जलाई जाती थी। अब इससे पेड़ों का कटान रुकेगा।
गोवर्धन में गोकाष्ठ बनाने को लेकर इस मुहिम से जुड़े गौतम खंडेलवाल कहते हैं कि ब्रज में गायों की दुर्दशा हो रही है। वे गोशालाओं से गोबर लेकर आ रहे हैं। प्रशांत लवानियां कहते हैं कि अंतिम संस्कार में सेवा करना सबसे बड़ा पुण्य का काम है।
आकाश मिश्रा का कहना है कि इसमें ज्योतिष के हिसाब से नौ ग्रहों का भी ध्यान रखा है। मोहित लवानियां कहते हैं अंतिम संस्कार में पेड़ों को काट कर लकड़ी जलाई जाती थी। अब इससे पेड़ों का कटान रुकेगा।