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यहां जनता की रक्षा कर रही पुलिस और पुलिस की रखवाली में लगे लंगूर
ब्यूरो/अमर उजाला आगरा
Updated Fri, 15 Dec 2017 07:48 PM IST
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एसएसपी अाॅफिस
- फोटो : अमर उजाला
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आगरा में बंदरों के उत्पात से आजिज आए एसएसपी कार्यालय के स्टाफ ने अब लंगूर का सहारा लिया है। इसे एसएसपी दफ्तर के सामने एसपी वेस्ट के दफ्तर की ओर जाने वाले रास्ते पर तैनात किया गया है।
यह दोपहर 12 बजे से शाम चार बजे तक यहीं पर रहा करेगा। उम्मीद है कि इसकी मौजूदगी से बंदर दफ्तर के अंदर नहीं आएंगे। इसका किराया तीन हजार रुपये महीना जाएगा। इसके खाने का बंदोबस्त पुलिस की ओर से ही होगा। लाइन के मेस में इसके लिए भोजन तैयार होगा।
एसएसपी अमित पाठक के सामने उनके स्टाफ ने यह मामला रखा था कि बंदर बाज नहीं आ रहे हैं। खिड़कियां बंद करने केबावजूद कहीं से भी जरा सा रास्ता मिलते ही अंदर आ जाते हैं। मेन गेट पर जाली लगवाई जा चुकी है लेकिन पीछे के रास्ते बंदर आ रहे हैं।
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सिर्फ आते ही नहीं हैं, उत्पात मचाते हैं। फाइल फाड़ जाते हैं, कुर्सी तोड़ देते हैं, गंदगी कर जाते हैं। इसके चलते अब लंगूर तैनात करने का निर्णय लिया गया है। यह बुधवार को दफ्तर पर लगा दिया गया।
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यह दोपहर 12 बजे से शाम चार बजे तक यहीं पर रहा करेगा। उम्मीद है कि इसकी मौजूदगी से बंदर दफ्तर के अंदर नहीं आएंगे। इसका किराया तीन हजार रुपये महीना जाएगा। इसके खाने का बंदोबस्त पुलिस की ओर से ही होगा। लाइन के मेस में इसके लिए भोजन तैयार होगा।
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एसएसपी अमित पाठक के सामने उनके स्टाफ ने यह मामला रखा था कि बंदर बाज नहीं आ रहे हैं। खिड़कियां बंद करने केबावजूद कहीं से भी जरा सा रास्ता मिलते ही अंदर आ जाते हैं। मेन गेट पर जाली लगवाई जा चुकी है लेकिन पीछे के रास्ते बंदर आ रहे हैं।
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सिर्फ आते ही नहीं हैं, उत्पात मचाते हैं। फाइल फाड़ जाते हैं, कुर्सी तोड़ देते हैं, गंदगी कर जाते हैं। इसके चलते अब लंगूर तैनात करने का निर्णय लिया गया है। यह बुधवार को दफ्तर पर लगा दिया गया।
पुलिस लाइन में पहले से तैनात
लंगूर
- फोटो : अमर उजाला
पुलिस लाइन में पहले से दो लंगूर तैनात हैं। इनका किराया छह हजार रुपये महीना जा रहा है। पहले तो 12 हजार जाता था। तब लंगूर के साथ उसका हैंडलर भी आता था। उसका खर्च भी लंगूर के बराबर है। इन लंगूरों को भोजन पुलिस के मेस से मिलता है।
सिर्फ पुलिस ही नहीं, कलक्ट्रेट के सभी दफ्तर का स्टाफ बंदरों से परेशान है। यहां सैंकड़ों बंदर हैं। ये उत्पात मचाते हैं। फरियादियों को भी दिक्कत है। कभी किसी का पर्स छीन लेते हैं तो कभी किसी का चश्मा उतारकर ले जाते हैं।
सिर्फ पुलिस ही नहीं, कलक्ट्रेट के सभी दफ्तर का स्टाफ बंदरों से परेशान है। यहां सैंकड़ों बंदर हैं। ये उत्पात मचाते हैं। फरियादियों को भी दिक्कत है। कभी किसी का पर्स छीन लेते हैं तो कभी किसी का चश्मा उतारकर ले जाते हैं।