{"_id":"6a7448205249b0982f0e2114","slug":"germany-based-husband-demands-20-lakh-throws-wife-and-newborn-out-women-seek-justice-at-commission-2026-08-06","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"अबला जीवन हाय! तुम्हारी यही कहानी: विदेश गए पति का बदला रंग, किसी को किया बेघर; रुला देगा इन महिलाओं का दर्द","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अबला जीवन हाय! तुम्हारी यही कहानी: विदेश गए पति का बदला रंग, किसी को किया बेघर; रुला देगा इन महिलाओं का दर्द
Thu, 06 Aug 2026 02:08 PM IST
Dhirendra Singh
श्याम जोशी, संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा
श्याम जोशी, संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा
Published by: Dhirendra Singh
Updated Thu, 06 Aug 2026 02:08 PM IST
सार
राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष बबिता सिंह चौहान ने 24 मामलों की सुनवाई कर पुलिस-प्रशासन को त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए। महिलाओं से जुड़े गंभीर मामलों में जांच, समझौते और कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया।
विज्ञापन
जनसुनवाई कार्यक्रम में महिलाओं की समस्या सुनती राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष बबीता सिंह चौहान।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विस्तार
अबला जीवन हाय! तुम्हारी यही कहानी। आंचल में है दूध और आंखों में पानी...। राष्ट्रकवि मैथिली शरण गुप्त ने अपने प्रसिद्ध खंडकाव्य यशोधरा में नारी की स्थिति को बयां करती ये पंक्तियां वर्ष 1932 में लिखीं थीं। नारी सशक्तीकरण की तमाम कवायदों के बावजूद ये पंक्तियां आज भी नारी की दशा पर उतनी ही सटीक बैठती हैं जितनी लगभग 94 वर्ष पहले। किसी महिला को जर्मनी गए पति ने फरमान सुनाया है कि मेरे पास यहां आना है तो बीस लाख रुपये अपने मायके से लाने होंगे, किसी को केवल इसलिए घर से निकाल दिया गया कि उसने दो बेटियों को जन्म दे दिया। ऐसी कई पीड़ित महिलाएं बुधवार को राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष के समक्ष पहुंचीं और इंसाफ की मांग की।
विज्ञापन
महिला उत्पीड़न के लगभग दो दर्जन मामले बुधवार को राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष बबिता सिंह चौहान की जनसुनवाई में सामने आए। उन्होंने लोक निर्माण विभाग के गेस्ट हाउस में 24 प्रकरणों की सुनवाई कर पुलिस-प्रशासन के अधिकारियों को उनके प्रभावी निस्तारण के निर्देश दिए। उन्होंने पुलिस-प्रशासन के कई अधिकारियों की गैर मौजूदगी पर नाराजगी जताई एवं उन्हें नोटिस देने के आदेश दिए। उन्होंने कहा कि महिला अपराधों की संख्या में कमी आई है। हालांकि महिलाओं में अभी भी जागरुकता की कमी है। इसके लिए सरकार गांव-गांव महिला जागरूकता के कार्यक्रम चला रही है। पीड़ित महिलाओं के प्रति पूरी गंभीरता बरतनी ही होगी और उन्हें त्वरित न्याय दिलाना होगा।
विज्ञापन
विज्ञापन
केस-01
जर्मनी के सब्जबाग दिखाकर पत्नी को नवजात बच्ची समेत घर से निकाला
शहर की एक महिला ने अध्यक्ष के सामने आंखों में आंसू भरकर अपनी पीड़ा सुनाई। बताया कि वैवाहिक वेबसाइट के जरिए दो वर्ष पूर्व उनकी शादी मथुरा में ही हुई थी। पति जर्मनी में एक कंपनी में नौकरी करते हैं। विवाह से पहले पति ने उन्हें भी जर्मनी साथ ले जाने के सब्जबाग दिखाए लेकिन विवाह के बाद उसे गर्भवती स्थिति में छोड़कर अकेले ही तीन वर्ष के लिए जर्मनी चले गए। आठ माह पूर्व उसे एक बेटी पैदा हुई है। अब महिला ने बेटी समेत जर्मनी जाने की बात कही तो ससुराल वालों ने कहा कि 20 लाख रुपये अपने मायके से लेकर आओ। तभी जा सकोगी। पति ने भी उन्हीं की हां में हां मिला दी। महिला ने बताया इसी दौरान उसके पिता का निधन हो गया। पैसे नहीं देने पर सास-ससुर ने उसे मासूम बेटी के साथ घर से निकाल दिया। अध्यक्ष ने पुलिस भेजकर ससुर को सुनवाई में ही बुलवाया। वहीं उसे 15 दिन में पति को जर्मनी से बुलाकर दोनों के बीच सुलह कराई जाए। यदि बेटे को नहीं बुलाया तो महिला के सास-ससुर के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करने आदेश दिए हैं।
जर्मनी के सब्जबाग दिखाकर पत्नी को नवजात बच्ची समेत घर से निकाला
शहर की एक महिला ने अध्यक्ष के सामने आंखों में आंसू भरकर अपनी पीड़ा सुनाई। बताया कि वैवाहिक वेबसाइट के जरिए दो वर्ष पूर्व उनकी शादी मथुरा में ही हुई थी। पति जर्मनी में एक कंपनी में नौकरी करते हैं। विवाह से पहले पति ने उन्हें भी जर्मनी साथ ले जाने के सब्जबाग दिखाए लेकिन विवाह के बाद उसे गर्भवती स्थिति में छोड़कर अकेले ही तीन वर्ष के लिए जर्मनी चले गए। आठ माह पूर्व उसे एक बेटी पैदा हुई है। अब महिला ने बेटी समेत जर्मनी जाने की बात कही तो ससुराल वालों ने कहा कि 20 लाख रुपये अपने मायके से लेकर आओ। तभी जा सकोगी। पति ने भी उन्हीं की हां में हां मिला दी। महिला ने बताया इसी दौरान उसके पिता का निधन हो गया। पैसे नहीं देने पर सास-ससुर ने उसे मासूम बेटी के साथ घर से निकाल दिया। अध्यक्ष ने पुलिस भेजकर ससुर को सुनवाई में ही बुलवाया। वहीं उसे 15 दिन में पति को जर्मनी से बुलाकर दोनों के बीच सुलह कराई जाए। यदि बेटे को नहीं बुलाया तो महिला के सास-ससुर के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करने आदेश दिए हैं।
केस-02
दो बेटी पैदा होने का अभिशाप झेल रही पत्नी ने मांगा भत्ता
एक और स्थानीय महिला ने अध्यक्ष से मांग की कि पति से गुजारा भत्ता दिलवाएं। उन्होंने बताया कि वह शादी के बाद वर्ष 2015 से मायके में ही रहकर अपनी दोनों बेटियों का भरण पोषण कर रही है। पति उसे ससुराल ले जाने को तैयार नहीं है। कोर्ट में मुकदमा भी चल रहा है। कोर्ट ने उसे चार हजार रुपये एवं दोनों बेटियों के लिए 1500-1500 रुपये कुल 7000 रुपये गुजारा भत्ता देने के आदेश भी दिए हैं। इसके बावजूद पति उसे गुजारा भत्ता नहीं दे रहा है। तारीख पर कोर्ट में भी पेश नहीं हो रहा है। उसने दो बेटियों को जन्म दिया और बेटा नहीं हुआ, इसलिए उसे ससुराल से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। आयोग की अध्यक्ष ने जिला प्रोबेशन अधिकारी को महिला को गुजारा भत्ता एवं उसकी दोनों बेटियों के लिए पढ़ाई-लिखाई के लिए भी खर्चे की व्यवस्था कराने के आदेश दिए हैं। वहीं उचित विधिक सहायता के लिए सरकारी खर्चे पर वकील भी उपलब्ध कराने के आदेश दिए हैं।
दो बेटी पैदा होने का अभिशाप झेल रही पत्नी ने मांगा भत्ता
एक और स्थानीय महिला ने अध्यक्ष से मांग की कि पति से गुजारा भत्ता दिलवाएं। उन्होंने बताया कि वह शादी के बाद वर्ष 2015 से मायके में ही रहकर अपनी दोनों बेटियों का भरण पोषण कर रही है। पति उसे ससुराल ले जाने को तैयार नहीं है। कोर्ट में मुकदमा भी चल रहा है। कोर्ट ने उसे चार हजार रुपये एवं दोनों बेटियों के लिए 1500-1500 रुपये कुल 7000 रुपये गुजारा भत्ता देने के आदेश भी दिए हैं। इसके बावजूद पति उसे गुजारा भत्ता नहीं दे रहा है। तारीख पर कोर्ट में भी पेश नहीं हो रहा है। उसने दो बेटियों को जन्म दिया और बेटा नहीं हुआ, इसलिए उसे ससुराल से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। आयोग की अध्यक्ष ने जिला प्रोबेशन अधिकारी को महिला को गुजारा भत्ता एवं उसकी दोनों बेटियों के लिए पढ़ाई-लिखाई के लिए भी खर्चे की व्यवस्था कराने के आदेश दिए हैं। वहीं उचित विधिक सहायता के लिए सरकारी खर्चे पर वकील भी उपलब्ध कराने के आदेश दिए हैं।
केस-03
आर्थिक सहायता के लिए भटक रही बीडीसी सदस्य की पत्नी
जन समस्याओं के लिए संघर्ष करते हुए दिवंगत हुए क्षेत्र पंचायत के एक सदस्य के निधन के बाद अब उनकी पत्नी को अपने हक के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि पति के निधन पर पंचायत कल्याण कोष से मिलने वाली तीन लाख रुपये की आर्थिक सहायता के आवेदन की फाइल ही ब्लॉक मुख्यालय से गायब हो गई है। फरह ब्लॉक के एक गांव का यह मामला है। महिला आयोग की अध्यक्ष ने तहसीलदार सदर को तत्काल प्रकरण की जांच कर कार्रवाई करने एवं पीड़िता को आर्थिक सहायता उपलब्ध करवाने के आदेश दिए हैं।
आर्थिक सहायता के लिए भटक रही बीडीसी सदस्य की पत्नी
जन समस्याओं के लिए संघर्ष करते हुए दिवंगत हुए क्षेत्र पंचायत के एक सदस्य के निधन के बाद अब उनकी पत्नी को अपने हक के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि पति के निधन पर पंचायत कल्याण कोष से मिलने वाली तीन लाख रुपये की आर्थिक सहायता के आवेदन की फाइल ही ब्लॉक मुख्यालय से गायब हो गई है। फरह ब्लॉक के एक गांव का यह मामला है। महिला आयोग की अध्यक्ष ने तहसीलदार सदर को तत्काल प्रकरण की जांच कर कार्रवाई करने एवं पीड़िता को आर्थिक सहायता उपलब्ध करवाने के आदेश दिए हैं।
केस-04
अंतरजातीय प्रेम विवाह बिगड़ा तो रिश्तों ने भी किया किनारा
बीएससी पास युवती ने आगरा कॉलेज, आगरा में पढ़ाई के दौरान ही किरावली निवासी एक युवक को जीवनसाथी के रूप में पसंद कर लिया था। दोनों के माता-पिता ने भी फरवरी 2023 में दोनों का अंतरजातीय विवाह सम्पन्न करा दिया था। किरावली से नवदंपती मथुरा आकर रहने लग गए। युवती के परिजन भी मथुरा में ही आकर बस गए। करीब आठ माह पूर्व युवती के पति ने उसे घर से बाहर निकाल दिया है। ऐसे वह अब अपने मायके में आकर रह रही है। पति उसे वापस घर ले जाने को तैयार नहीं है। उन्होंने नाते-रिश्तेदारों को बुलाकर राजीनामा के लिए पंचायत कराने का प्रयास किया तो अंतरजातीय विवाह होने के कारण सबने उनसे किनारा कर लिया है। कोई भी उनकी मदद करने को तैयार नहीं है। इसकी शिकायत पर आयोग की अध्यक्ष ने महिला थाना पुलिस से दोनों को बुलाकर उनके बीच सुलह कराने के निर्देश दिए हैं।
अंतरजातीय प्रेम विवाह बिगड़ा तो रिश्तों ने भी किया किनारा
बीएससी पास युवती ने आगरा कॉलेज, आगरा में पढ़ाई के दौरान ही किरावली निवासी एक युवक को जीवनसाथी के रूप में पसंद कर लिया था। दोनों के माता-पिता ने भी फरवरी 2023 में दोनों का अंतरजातीय विवाह सम्पन्न करा दिया था। किरावली से नवदंपती मथुरा आकर रहने लग गए। युवती के परिजन भी मथुरा में ही आकर बस गए। करीब आठ माह पूर्व युवती के पति ने उसे घर से बाहर निकाल दिया है। ऐसे वह अब अपने मायके में आकर रह रही है। पति उसे वापस घर ले जाने को तैयार नहीं है। उन्होंने नाते-रिश्तेदारों को बुलाकर राजीनामा के लिए पंचायत कराने का प्रयास किया तो अंतरजातीय विवाह होने के कारण सबने उनसे किनारा कर लिया है। कोई भी उनकी मदद करने को तैयार नहीं है। इसकी शिकायत पर आयोग की अध्यक्ष ने महिला थाना पुलिस से दोनों को बुलाकर उनके बीच सुलह कराने के निर्देश दिए हैं।