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50 करोड़ का ‘कूड़ा’
ब्यूरो अमर उजाला, आगरा
Updated Thu, 06 Aug 2015 01:35 AM IST
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नगर निगम शहर से निकलने वाले कूड़े का निस्तारण भले ही न कर पाया हो लेकिन 50 करोड़ रुपये का जरूर कूड़ा कर दिया है। सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट के लिए करोड़ों रुपये की लागत से लगाया गया प्लांट कबाड़ा हो गया है। लाखों की कीमत वाले अधिकांश उपकरण चोरी हो गए हैं। प्लांट के नाम पर अब सिर्फ लोहे का ढांचा ही बचा है। सरकारी खजाने से खरीदे गए इन उपकरणों की चोरी की न तो कोई शिकायत दर्ज कराई गई और न ही इनकी देखभाल के ही पुख्ता बंदोबस्त किए गए।
वर्ष 2007 में नगला रामबल में संचालित खत्ताघर से आसपास के क्षेत्रों में संक्रमण फैला गया था। इससे कई लोगों की मौत भी हो गई थी। इसके बाद शासन की नींद टूटी। इस खत्ताघर को पार्क का रूप दिए जाने के साथ-साथ कूड़ा निस्तारण के लिए कुबेरपुर लैंडफिल साइट पर ही करोड़ों की लागत से प्लांट लगाया गया। तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने नौ अक्टूबर 2011 को इस योजना का शिलान्यास किया था। यह हाईटेक प्लांट बनाया गया। लगभग 50 करोड़ की लागत से इस प्लांट को जलनिगम ने तैयार किया था। पूरी तरह से आटोमेटिक प्लांट के संचालन के लिए सूरत (गुजरात) की हंजर बायोटेक इनर्जीज प्रा. लि. को टेंडर दिया गया था।
कंपनी इस कूड़े से खाद बनाती थी। मगर, यह कंपनी भी ज्यादा दिन तक इसका संचालन नहीं कर पाई। कंपनी प्लांट को तस का तस छोड़कर 2012 मेें भाग खड़ी हुई। तब से इस प्लांट को फिर से संचालित करने की कवायद ही नहीं की गई। प्लांट बंद होते ही इसके पुर्जों का चोरी होना शुरू हो गया। लाखों की कीमत वाली मोटर भी चोरी हो गईं। धीरे-धीरे प्लांट का अधिकांश सामान चोरी हो गया। अब सिर्फ लोहे का ढांचा ही बचा है। खानापूर्ति करते हुए कुछ सुरक्षाकर्मी प्लांट की देखभाल के लिए तैनात किए गए।
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इनसेट
संक्रमण फैलने का डर
प्लांट बंद होने से कूड़े का निस्तारण नहीं हो पा रहा है। ऐसे में यहां कूड़े के ऊंचे-ऊंचे पहाड़ खड़े हो गए हैं। कुबेरपुर लैंडफिल साइट के कुछ किलोमीटर क्षेत्र में कई गांव हैं। यदि कूड़े का निस्तारण नहीं होगा तो इससे संक्रमण फैलने की आशंका बढ़ जाएगी। नगला रामबल स्थित डलाबघर के आसपास कई साल पहले संक्रमण से कई मौतें भी हो चुकी हैं। इसी के बाद यहां से कूड़ा डलाबघर कुबेरपुर शिफ्ट किया गया था।
इनसेट
ड्यूटी करने से घबराते हैं चौकीदार
प्लांट की सुरक्षा के लिए लगभग छह सुरक्षाकर्मी लगाए गए हैं। इनमें से चार रात में असलाह के साथ ड्यूटी पर रहते हैं और दो दिन में। मगर, यह सुरक्षाकर्मी भी खुद को सुरक्षित महसूस नहीं करते। इनका कहना है कि रात तो दूर, दिन में भी हथियारों से लैस चोर आ जाते हैं। ऐसे में ड्यूटी करना मुश्किल है।
जिस कंपनी के साथ अनुबंध था, उसे रद करने के लिए कंपनी को नोटिस जारी कर दिया गया है। जल्द ही कूड़े से बिजली बनाने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा।
- इंद्रविक्रम सिंह, नगर आयुक्त
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वर्ष 2007 में नगला रामबल में संचालित खत्ताघर से आसपास के क्षेत्रों में संक्रमण फैला गया था। इससे कई लोगों की मौत भी हो गई थी। इसके बाद शासन की नींद टूटी। इस खत्ताघर को पार्क का रूप दिए जाने के साथ-साथ कूड़ा निस्तारण के लिए कुबेरपुर लैंडफिल साइट पर ही करोड़ों की लागत से प्लांट लगाया गया। तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने नौ अक्टूबर 2011 को इस योजना का शिलान्यास किया था। यह हाईटेक प्लांट बनाया गया। लगभग 50 करोड़ की लागत से इस प्लांट को जलनिगम ने तैयार किया था। पूरी तरह से आटोमेटिक प्लांट के संचालन के लिए सूरत (गुजरात) की हंजर बायोटेक इनर्जीज प्रा. लि. को टेंडर दिया गया था।
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कंपनी इस कूड़े से खाद बनाती थी। मगर, यह कंपनी भी ज्यादा दिन तक इसका संचालन नहीं कर पाई। कंपनी प्लांट को तस का तस छोड़कर 2012 मेें भाग खड़ी हुई। तब से इस प्लांट को फिर से संचालित करने की कवायद ही नहीं की गई। प्लांट बंद होते ही इसके पुर्जों का चोरी होना शुरू हो गया। लाखों की कीमत वाली मोटर भी चोरी हो गईं। धीरे-धीरे प्लांट का अधिकांश सामान चोरी हो गया। अब सिर्फ लोहे का ढांचा ही बचा है। खानापूर्ति करते हुए कुछ सुरक्षाकर्मी प्लांट की देखभाल के लिए तैनात किए गए।
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संक्रमण फैलने का डर
प्लांट बंद होने से कूड़े का निस्तारण नहीं हो पा रहा है। ऐसे में यहां कूड़े के ऊंचे-ऊंचे पहाड़ खड़े हो गए हैं। कुबेरपुर लैंडफिल साइट के कुछ किलोमीटर क्षेत्र में कई गांव हैं। यदि कूड़े का निस्तारण नहीं होगा तो इससे संक्रमण फैलने की आशंका बढ़ जाएगी। नगला रामबल स्थित डलाबघर के आसपास कई साल पहले संक्रमण से कई मौतें भी हो चुकी हैं। इसी के बाद यहां से कूड़ा डलाबघर कुबेरपुर शिफ्ट किया गया था।
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ड्यूटी करने से घबराते हैं चौकीदार
प्लांट की सुरक्षा के लिए लगभग छह सुरक्षाकर्मी लगाए गए हैं। इनमें से चार रात में असलाह के साथ ड्यूटी पर रहते हैं और दो दिन में। मगर, यह सुरक्षाकर्मी भी खुद को सुरक्षित महसूस नहीं करते। इनका कहना है कि रात तो दूर, दिन में भी हथियारों से लैस चोर आ जाते हैं। ऐसे में ड्यूटी करना मुश्किल है।
जिस कंपनी के साथ अनुबंध था, उसे रद करने के लिए कंपनी को नोटिस जारी कर दिया गया है। जल्द ही कूड़े से बिजली बनाने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा।
- इंद्रविक्रम सिंह, नगर आयुक्त