गौरा नंदन को विदा करने उमड़े भीड़, निकले विसर्जन जुलूस
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यमुना के घाटों पर पैर रखने तक के लिए जगह नहीं थी। घाटों पर गौरा नंदन का पूजन कर, उनके कान में सुख समृद्धि की कामना करते शब्द कहे गए। दोबारा जल्दी आने का आमंत्रण देकर अस्थायी कुंडों में गणेश प्रतिमाओं को विसर्जित किया गया।
अनंत चतुर्दशी के दिन भगवान को विदा करने की बेला पर तमाम भक्त गणेश जी विदा करने के समय भावविभोर होकर रोने लगे। सार्वजनिक पंडालों के आयोजकों ने ट्रकों पर गणेश का रथ बनाया था। आगे तेज आवाज में म्यूजिक सिस्टम बज रहा था। भक्त नाचते हुए चल रहे थे। चारों ओर गुलाल के बादल से छाए थे।
आगरा में 1800-2000 तक सार्वजनिक पंडाल लगाए गए। इसके अतिरिक्त घरों में गणेश प्रतिमा को स्थापित किया गया था। एक अनुमान के मुताबिक रविवार को करीब 4000-5000 प्रतिमाओं का विसर्जन हुआ। हाथी घाट पर दोपहर करीब 2:30 बजे तक करीब 450 प्रतिमाओं का पंजीकरण हो चुका था। इसके अतिरिक्त तमाम प्रतिमाएं बिना पंजीकरण कराए ही विसर्जित की गईं।
बल्केश्वर घाट, दशहरा घाट, कैलाश घाट, रेणुका धाम घाट पर भी बड़ी संख्या में विसर्जन हुए। कुंडों में प्रतिमाओं के लिए स्थान तक नहीं बचा था। देर शाम तक विसर्जन की प्रक्रिया चलती रही। भीड़ को संभालने में पुलिस को बड़ी मशक्कत करनी पड़ी। एडीएम सिटी केपी सिंह और एसपी सिटी ने सभी कुंडों का भ्रमण किया।
यमुना किनारा सहित कई मार्गों पर जाम
गणेश प्रतिमा विसर्जन जुलूसों के चलते शहर में कई स्थानों पर यातायात व्यवस्था बाधित हो गई। हालांकि रविवार का दिन होने के चलते स्कूल, कॉलेज और कार्यालय बंद रहे अन्यथा स्थिति और खराब हो जाती। सबसे अधिक परेशानी यमुना किनारा रोड पर हुई। हाथी घाट पर आने वाले जुलूसों की वजह से यहां जाम के हालात रहे। पार्किंग व्यवस्था न होने से श्रद्धालुओं के वाहन सड़क पर ही खड़े हुए।
जाम में तमाम पर्यटक वाहन फंस गए। कैलाश मोड़ से कैलाश मंदिर तक जाम के हालात रहे। मंदिर तक पहुंचने के पांच मिनट के रास्ते को तय करने में तीन-तीन घंटे तक लगे। बल्केश्वर कालोनी में लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
झूम कर नाचे विदेशी मेहमान
प्रतिबंध के बावजूद यमुना में विसर्जन
नदियों में प्रतिमा और पूजन सामग्री के विसर्जन पर प्रतिबंध है। इसीलिए अस्थायी कुंड बनाए गए हैं। लेकिन रविवार को बड़ी संख्या में लोगों ने यमुना नदी में विसर्जन किया। ककरैठा, पोइया घाट, दयालबाग, समोगर, इनर रिंग रोड की ओर से लोगों ने प्रतिमाओं को नदी में विसर्जित किया।