{"_id":"6507f3b3e000b0ba2709a8c9","slug":"ganesh-chaturthi-is-on-19th-september-sthapana-time-puja-vidhi-2023-09-18","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"Ganesh Chaturthi 2023: सजने लगे पंडाल, 19 सितंबर को है गणेश चतुर्थी; बड़े वाले गणपति 24 फीट के","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Ganesh Chaturthi 2023: सजने लगे पंडाल, 19 सितंबर को है गणेश चतुर्थी; बड़े वाले गणपति 24 फीट के
Mon, 18 Sep 2023 12:22 PM IST
धीरेन्द्र सिंह
अमर उजाला, आगरा
अमर उजाला, आगरा
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Mon, 18 Sep 2023 12:22 PM IST
सार
Ganesh Chaturthi Date and Time 2023: गणेशजी की पूजा के लिए चतुर्थी तिथि को अत्यंत ही शुभ फलदायी माना जाता है। ऐसा कहा जाता है कि इस दिन ही गणपति का जन्म हुआ था। इस बार गणेश चतुर्थी का व्रत 19 सितंबर को रखा जाएगा। इसे लेकर शहर में तैयारियां शुरू हो गई हैं।
विज्ञापन
Ganesh Chaturthi 2023
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
Ganesh Chaturthi Date and Time 2023: विघ्नहर्ता के पधारने से पहले गलियों से मंदिरों तक पंडाल सज रहे हैं। घर-घर में भी 19 सितंबर को गणपति बप्पा विराजेंगे। रविवार को दुकानों पर मूर्ति खरीदने भक्त पहुंचे। इस बार शहर में सबसे बड़े गणपति सदर के नौलक्खा में 24 फीट के विराजेंगे। यह पंडाल मंगलमूर्ति सेवा समिति बनवा रही है। बल्केश्वर में 23 फीट के इको फ्रेंडली गणपति को क्रेन से विराजित कराया जाएगा। वहीं बाजार में मखमल और सितारों से जड़ी पोशाक पहने इको फ्रेंडली और पीओपी की मूर्तियां भी खूब बिक रही हैं।
महाराष्ट्र के कारीगरों ने बनाई
मंगल मूर्ति सेवा समिति के सदस्य दिग्विजय नाथ ने बताया कि सदर नौलक्खा में 24 फीट के इको फ्रेंडली गणेश जी की मूर्ति महाराष्ट्र के कारीगरों ने बनाई है। 26 से 28 फीट का पंडाल सजेगा। 10 दिनों तक सेवा बस्तियों से ही गणेश जी का सुबह-शाम भोग लगेगा।
लालबाग के महंत लाएंगे पोशाक
कमला नगर बल्केश्वर के राजा गणेश मंडल समिति के उपाध्यक्ष राजा ने बताया कि बल्केश्वर में इस बार 23 फीट के ईको फ्रेंडली गणेश जी विराजेंगे। 30 फीट का पंडाल व दिल्ली से देशी-विदेशी फूलों से फूल बंगला सजेगा। गणेश जी की पोशाक महाराष्ट्र के लालबाग से महंत खुद लगाएंगे और सोने के वर्क के लड्डू का भोग लगेगा।
विज्ञापन
1008 मोदकों का लगेगा भोग
नेहरू नगर निवासी डॉ. योगेश भार्गव ने बताया कि स्थित राधा-कृष्ण मंदिर में 19 सितंबर को 1008 मोदकों का भोग गणेश जी को लगेगा। साथ ही 29 सितंबर तक मंदिर में प्रत्येक दिन रंगारंग कार्यक्रम होंगे।
विज्ञापन
महाराष्ट्र के कारीगरों ने बनाई
मंगल मूर्ति सेवा समिति के सदस्य दिग्विजय नाथ ने बताया कि सदर नौलक्खा में 24 फीट के इको फ्रेंडली गणेश जी की मूर्ति महाराष्ट्र के कारीगरों ने बनाई है। 26 से 28 फीट का पंडाल सजेगा। 10 दिनों तक सेवा बस्तियों से ही गणेश जी का सुबह-शाम भोग लगेगा।
विज्ञापन
लालबाग के महंत लाएंगे पोशाक
कमला नगर बल्केश्वर के राजा गणेश मंडल समिति के उपाध्यक्ष राजा ने बताया कि बल्केश्वर में इस बार 23 फीट के ईको फ्रेंडली गणेश जी विराजेंगे। 30 फीट का पंडाल व दिल्ली से देशी-विदेशी फूलों से फूल बंगला सजेगा। गणेश जी की पोशाक महाराष्ट्र के लालबाग से महंत खुद लगाएंगे और सोने के वर्क के लड्डू का भोग लगेगा।
विज्ञापन
1008 मोदकों का लगेगा भोग
नेहरू नगर निवासी डॉ. योगेश भार्गव ने बताया कि स्थित राधा-कृष्ण मंदिर में 19 सितंबर को 1008 मोदकों का भोग गणेश जी को लगेगा। साथ ही 29 सितंबर तक मंदिर में प्रत्येक दिन रंगारंग कार्यक्रम होंगे।
गणेश उत्सव : पूजा की तिथि और शुभ मुहूर्त
ज्योतिषाचार्य आशिमा शर्मा ने बताया कि गणपति बप्पा की मूर्ति लाने के लिए शुभ समय का ध्यान जरूर रखना चाहिए।
मध्याह्न गणेश पूजा मुहूर्त - 19 की सुबह 11:01 से दोपहर 1:28 बजे तक - अवधि - 02 घंटे 27 मिनट
चतुर्थी तिथि प्रारंभ- 18 सितंबर दोपहर 12:39 बजे
चतुर्थी तिथि समाप्ति- 19 सितंबर दोपहर 1:43 बजे
गणेश विसर्जन- बृहस्पतिवार, 28 सितंबर
ऐसे करें मूर्ति स्थापना
ज्योतिषाचार्य पूनम वार्ष्णेय ने बताया कि चतुर्थी के दिन ढोल-नगाड़ों के साथ विघ्नहर्ता को धूमधाम से घर लाना चाहिए। मूर्ति स्थापित करने के लिए सुबह स्नान के बाद भगवान गणेश का मंत्र जाप करते हुए एक सुंदर चौकी पर पीला वस्त्र बिछाएं। उसके ऊपर गणेश जी की प्रतिमा स्थापित करें। भगवान गणपति का मुख उत्तर दिशा की ओर रखें। इसके बाद गणपति का सुंदर वस्त्र, आभूषण, कलावा, अक्षत, पुष्प, माला मुकुट आदि से शृंगार करें। लाल चंदन से भगवान का तिलक करें। इसके बूंदी के लड्डू या मोदक के साथ पंचामृत, पांच फल और पंचमेवा का भोग लगाएं। धूप-दीप से आरती करें।
चतुर्थी पर हुआ था गणपति का जन्म
ऐसी मान्यता है कि गणेश चतुर्थी के दिन गणपति का जन्म हुआ था। गणेश जी की पूजा से समस्त मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। इस दिन नए कामों की शुरुआत करना शुभ होता है।
न देखें चंद्रमा, कलंक लगने की मान्यता
ज्याेतिषाचार्य के मुताबिक, गणेश चतुर्थी के दिन चंद्रमा को देखना वर्जित होता है। गणेश पुराण के अनुसार ऐसी मान्यता है कि भगवान कृष्ण पर स्यमंतक मणि चोरी करने का गलत आरोप लगा था। तब नारद ऋषि ने बताया कि भगवान कृष्ण ने भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी (गणेश चतुर्थी) को चंद्रमा देख लिया था और इसी कारण शापित हो गए थे। अगर भूलवश कोई व्यक्ति चंद्रमा को देख ले तो वह मोली में 21 दूर्वा बांधकर मुकुट बनाए और भगवान विनायक को अर्पित कर दे। इससे चंद्र दर्शन से दोष मुक्त हो जाएगा।
ज्योतिषाचार्य आशिमा शर्मा ने बताया कि गणपति बप्पा की मूर्ति लाने के लिए शुभ समय का ध्यान जरूर रखना चाहिए।
मध्याह्न गणेश पूजा मुहूर्त - 19 की सुबह 11:01 से दोपहर 1:28 बजे तक - अवधि - 02 घंटे 27 मिनट
चतुर्थी तिथि प्रारंभ- 18 सितंबर दोपहर 12:39 बजे
चतुर्थी तिथि समाप्ति- 19 सितंबर दोपहर 1:43 बजे
गणेश विसर्जन- बृहस्पतिवार, 28 सितंबर
ऐसे करें मूर्ति स्थापना
ज्योतिषाचार्य पूनम वार्ष्णेय ने बताया कि चतुर्थी के दिन ढोल-नगाड़ों के साथ विघ्नहर्ता को धूमधाम से घर लाना चाहिए। मूर्ति स्थापित करने के लिए सुबह स्नान के बाद भगवान गणेश का मंत्र जाप करते हुए एक सुंदर चौकी पर पीला वस्त्र बिछाएं। उसके ऊपर गणेश जी की प्रतिमा स्थापित करें। भगवान गणपति का मुख उत्तर दिशा की ओर रखें। इसके बाद गणपति का सुंदर वस्त्र, आभूषण, कलावा, अक्षत, पुष्प, माला मुकुट आदि से शृंगार करें। लाल चंदन से भगवान का तिलक करें। इसके बूंदी के लड्डू या मोदक के साथ पंचामृत, पांच फल और पंचमेवा का भोग लगाएं। धूप-दीप से आरती करें।
चतुर्थी पर हुआ था गणपति का जन्म
ऐसी मान्यता है कि गणेश चतुर्थी के दिन गणपति का जन्म हुआ था। गणेश जी की पूजा से समस्त मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। इस दिन नए कामों की शुरुआत करना शुभ होता है।
न देखें चंद्रमा, कलंक लगने की मान्यता
ज्याेतिषाचार्य के मुताबिक, गणेश चतुर्थी के दिन चंद्रमा को देखना वर्जित होता है। गणेश पुराण के अनुसार ऐसी मान्यता है कि भगवान कृष्ण पर स्यमंतक मणि चोरी करने का गलत आरोप लगा था। तब नारद ऋषि ने बताया कि भगवान कृष्ण ने भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी (गणेश चतुर्थी) को चंद्रमा देख लिया था और इसी कारण शापित हो गए थे। अगर भूलवश कोई व्यक्ति चंद्रमा को देख ले तो वह मोली में 21 दूर्वा बांधकर मुकुट बनाए और भगवान विनायक को अर्पित कर दे। इससे चंद्र दर्शन से दोष मुक्त हो जाएगा।