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गणेश चतुर्थीः आज रात मत करना चांद का दर्शन, लग जाएगा यह दोष
Mon, 02 Sep 2019 07:54 PM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Mon, 02 Sep 2019 07:54 PM IST
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गणेश चतुर्थी
- फोटो : अमर उजाला
सोमवार को आगरा में गणेश चतुर्थी की धूम रही। शहर में जगह-जगह गणेश प्रतिमाएं स्थापित की गईं। वहीं ज्योतिषाचार्य का कहना है कि आज की रात को चंद्रमा का दर्शन नहीं करना चाहिए।
ज्यातिषाचार्य पूनम वार्ष्णेय का कहना है कि भागवताचार्य चैतन्य हरि चरत जी महाराज के अनुसार भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी के दिन चांद का दीदार करने पर कलंक लगता है।
ये भी पढ़ें: Ganesh Chaturthi 2019: घर पर करना चाहते हैं गणपति स्थापना, जानें सही तरीका और शुभ मुहूर्त
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गणेश जी की व्रत कथा में वर्णन है कि गणेश जी एकबार घूमते घूमते चंद्रलोक जा पहुंचे। गणेश जी का स्वरूप देख चंद्रमा हंस पड़े। उन्होंने क्रोध में आकर कहा कि हे चंद्रमा आज के दिन (शुक्ल चतुर्थी) कोई तुम्हारा मुंह नहीं देखेगा, जो देख लेगा उसे झूठा कलंक लगेगा।
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ज्यातिषाचार्य पूनम वार्ष्णेय का कहना है कि भागवताचार्य चैतन्य हरि चरत जी महाराज के अनुसार भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी के दिन चांद का दीदार करने पर कलंक लगता है।
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गणेश जी की व्रत कथा में वर्णन है कि गणेश जी एकबार घूमते घूमते चंद्रलोक जा पहुंचे। गणेश जी का स्वरूप देख चंद्रमा हंस पड़े। उन्होंने क्रोध में आकर कहा कि हे चंद्रमा आज के दिन (शुक्ल चतुर्थी) कोई तुम्हारा मुंह नहीं देखेगा, जो देख लेगा उसे झूठा कलंक लगेगा।
अन्य देवताओं और स्वयं चंद्रमा के क्षमा याचना पर गणेश जी ने कहा कि इस वरदान के अतिरिक्त वह दूसरा वर दे सकते हैं। उन्होंने कहा कि शुक्ल पक्ष की द्वितीया के दिन जो व्यक्ति प्रति मास चंद्रमा का दर्शन करता रहेगा, उसे भादों सुदी चौथ के दर्शन से विविध कष्ट नहीं भोगना होगा।
इस तरह करें स्थापना
ज्योतिषाचार्य पूनम वार्ष्णेय के अनुसार, पीले वस्त्र पर चावल का स्वास्तिक बनाकर उस पर भगवान श्रीगणेश जी की प्रतिमा को स्थापित करें। फिर पंचोपचार व षोड्षाचार पूजन करें। भगवान गणेश जी को विशेष रूप से हरी दुर्वा चढ़ाएं, घी का दीपक जलाएं। मोदक, पंच मेवा, पांच फलों का भोग लगाएं। नारियल, तांबुल व कमल गट्टे, सुपारी व लौंग इलायची आदि चढ़ाएं।
इस तरह करें स्थापना
ज्योतिषाचार्य पूनम वार्ष्णेय के अनुसार, पीले वस्त्र पर चावल का स्वास्तिक बनाकर उस पर भगवान श्रीगणेश जी की प्रतिमा को स्थापित करें। फिर पंचोपचार व षोड्षाचार पूजन करें। भगवान गणेश जी को विशेष रूप से हरी दुर्वा चढ़ाएं, घी का दीपक जलाएं। मोदक, पंच मेवा, पांच फलों का भोग लगाएं। नारियल, तांबुल व कमल गट्टे, सुपारी व लौंग इलायची आदि चढ़ाएं।